नई दिल्ली/स्वराज टुडे: जापान में आज सुबह ही सुबह एक भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया. देश के मध्य हिस्से में आए इस भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.7 मापी गई, अचानक धरती हिलने से लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए.
कई जगहों पर सामान गिरने और दुकानों के शीशे टूटने की खबरें भी सामने आई हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस भूकंप में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक भूकंप रात 1 बजकर 4 मिनट पर आया. इसका केंद्र शिजुओका प्रांत के पश्चिमी हिस्से में जमीन से करीब 40 किलोमीटर नीचे था. भूकंप के दौरान सबसे तेज झटके आइची प्रांत के चिता शहर में महसूस किए गए, जहां जापान के भूकंप मापने वाले पैमाने पर ऊपरी स्तर 5 की तीव्रता दर्ज की गई. आइची, नागानो और गिफू प्रांतों के कई इलाकों में भी निचले स्तर 5 की तीव्रता के झटके महसूस किए गए. भूकंप के बाद कुछ छोटे झटके भी आए. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जापान सरकार ने आपात संपर्क कार्यालय बनाया है, ताकि प्रभावित इलाकों की जानकारी जुटाने और राहत से जुड़े कामों में तेजी लाई जा सके.
सुनामी को लेकर क्या है अपडेट?
इस भूकंप के बाद सबसे बड़ा सवाल सुनामी के खतरे को लेकर था. हालांकि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने साफ किया है कि इस भूकंप से सुनामी आने की आशंका नहीं है. फिलहाल सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है. हालांकि एजेंसी ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि भूकंप के बाद दोबारा तेज झटके आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
भूकंप के लिहाज से क्यों संवेदनशील है जापान?
जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यह प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. यहीं पर कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं और उनके खिसकने से धरती में हलचल पैदा होती है. यही वजह है कि जापान में छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं. अगर पिछले कुछ सालों के बड़े भूकंपों पर नजर डालें तो-
- जनवरी 2024 में नोटो प्रायद्वीप में 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. इस घटना में 300 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और बड़े पैमाने पर इमारतें तबाह हुई थीं. इसके बाद अगस्त 2024 में मियाजाकी के पास 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था.
- इससे पहले 11 मार्च 2011 को आए 9.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने जापान को हिलाकर रख दिया था. इसके कारण समुद्र में उठी विशाल सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भीषण नुकसान पहुंचाया था. इस आपदा में करीब 20 हजार लोगों की मौत हुई थी.
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