● ₹40 हजार से ₹1.20 लाख तक भुगतान के दावे ने मचाई खलबली
● गरीबों के आशियाने की योजना में ‘अपात्रों’ को लाभ पहुंचाने का आरोप;
● 29 लाभार्थियों के नामों ने खड़े किए गंभीर सवाल
● अब जनपद CEO की जांच में खुलेगा पात्रता का सच
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत भदौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सामने आई शिकायत ने पंचायत व्यवस्था और योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ऐसे लोगों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद हैं। कुछ नामों के संबंध में डबल स्टोरी मकान, ट्रैक्टर, कार, 2.5 एकड़ से अधिक भूमि और यहां तक कि सरकारी नौकरी जैसी स्थितियों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सूची में 29 नामों पर पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए हैं तथा कई मामलों में ₹40 हजार से लेकर ₹1.20 लाख तक राशि जारी अथवा निकाले जाने का दावा किया गया है।
पक्का मकान पहले से मौजूद, फिर PM आवास का लाभ कैसे?

शिकायत में रामसिंह, रुकमीन बाई, देवकी, मुन्नीबाई, कमलदेव, गया प्रसाद, मिश्रीलाल, द्वारिका, गोमती, शीला, आशीष कुमार, अनुसुइया सोनी, लोहन, गुलाब, तुलसी, सुमन और गेंदवती सहित कई नामों के सामने पहले से पक्का मकान होने का उल्लेख किया गया है। इनमें कुछ मामलों में डबल स्टोरी मकान होने का भी दावा है। सवाल सीधा है—यदि मौके पर पहले से पक्का मकान मौजूद था, तो संबंधित हितग्राही योजना की पात्रता की कसौटी पर कैसे खरे उतरे? यह सवाल अब केवल पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना की जांच और सत्यापन व्यवस्था पर भी उंगली उठाता है।
डबल स्टोरी मकान और खाते में सरकारी राशि का दावा!
शिकायत में जनक, महेश और हिरा के संबंध में डबल स्टोरी मकान होने का उल्लेख करते हुए क्रमशः करीब ₹1 लाख की राशि जारी होने का दावा किया गया है। वहीं कई अन्य नामों के सामने ₹40 हजार तथा कुछ मामलों में ₹95 हजार और ₹1.20 लाख तक राशि जारी होने या निकाले जाने की जानकारी दी गई है। यदि ये दावे दस्तावेजों और मौके की जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला बन सकता है।
ट्रैक्टर और 2.5 एकड़ से अधिक जमीन वालों को भी आवास?
शिकायत में दीपक ठाकुर, जितेश, केशव, तोपसिंह और नवमी सहित कुछ नामों के संबंध में 2.5 एकड़ से अधिक भूमि होने का दावा किया गया है। वहीं केशव और तोपसिंह के संबंध में ट्रैक्टर होने का भी उल्लेख है। नवमी के नाम पर ₹1.20 लाख तथा तोपसिंह के नाम पर ₹1.20 लाख राशि जारी होने का दावा किया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि संबंधित हितग्राहियों की भूमि, संपत्ति और अन्य पात्रता का सत्यापन किस आधार पर किया गया?
कार, ट्रैक्टर और सरकारी नौकरी—फिर भी आवास योजना का लाभ?
शालिनी / अवध के संबंध में शिकायत में कार, ट्रैक्टर और सरकारी नौकरी होने का दावा किया गया है। इसी तरह गुंजन/संतोष के मामले में GST Payment का उल्लेख करते हुए ₹95 हजार राशि जारी होने का दावा किया गया है। यदि ये तथ्य रिकॉर्ड और मौके की जांच में प्रमाणित होते हैं, तो योजना के लाभार्थी चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक ही परिवार में पति-पत्नी दोनों को आवास का लाभ?

शिकायत में थामन/खज्जू के मामले में पति-पत्नी दोनों को आवास का लाभ मिलने का भी आरोप है। यहां भी यह जांच का विषय है कि परिवार की वास्तविक स्थिति क्या है, दोनों नामों से लाभ क्यों स्वीकृत हुआ और योजना के नियमों के तहत इसकी अनुमति थी या नहीं। यदि एक ही परिवार को नियमों के विपरीत दोहरा लाभ मिला है, तो जिम्मेदारी तय किया जाना आवश्यक होगा।
अब सवाल सिर्फ 29 नामों का नहीं, पूरी प्रक्रिया का है
भदौरा की शिकायत ने प्रधानमंत्री आवास योजना में हितग्राही चयन, दस्तावेज सत्यापन, स्थल निरीक्षण, जियो-टैगिंग और भुगतान प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर पक्के मकान, डबल स्टोरी भवन, वाहन और अधिक भूमि जैसी स्थितियां यदि मौके पर मौजूद थीं, तो सत्यापन के दौरान इनका पता क्यों नहीं चला? क्या संबंधित अधिकारियों और पंचायत स्तर के जिम्मेदार लोगों ने वास्तव में भौतिक सत्यापन किया था या फिर पूरी प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित रही?
CEO जनपद पंचायत की जांच पर टिकी निगाहें
मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जनपद पंचायत CEO की होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए प्रत्येक नाम का मौके पर जाकर सत्यापन, मकान की वर्तमान स्थिति की जांच, भूमि रिकॉर्ड का परीक्षण, वाहन स्वामित्व की जानकारी, सरकारी सेवा की स्थिति, परिवार की पात्रता और बैंक भुगतान का मिलान कराया जाना चाहिए। यदि जांच में अपात्रता और नियमविरुद्ध भुगतान प्रमाणित होता है, तो सरकारी राशि की वसूली के साथ-साथ जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई भी आवश्यक होगी। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन से भी उनका पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है।
गरीबों के हक की योजना है, किसी की निजी जागीर नहीं
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि अपात्र लोगों को नियमों को दरकिनार कर सरकारी सहायता पहुंचाने की पुष्टि होती है, तो यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के अधिकार पर भी चोट होगी। अब देखना होगा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही प्रशासन भदौरा की इस शिकायत को गंभीरता से लेकर जमीन पर जांच कराता है या मामला कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाता है।
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