छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा जमनीपाली द्वारा प्रस्तुत चेक अनादरण के प्रकरण में माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा कुमारी# कुमुदनी गर्ग ने महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त संतोष यादव, उम्र 39 वर्ष को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अपराध में दोषसिद्ध किया है।
प्रकरण में अभियुक्त द्वारा अपने ऋण दायित्व के निर्वहन के लिए ₹1,96,162/- का चेक जारी किया गया था, जो बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण “Funds Insufficient” की टीप के साथ अनादरित हो गया। इसके पश्चात बैंक की ओर से अभियुक्त को विधिक मांग सूचना पत्र प्रेषित किया गया, लेकिन निर्धारित अवधि में चेक की राशि का भुगतान नहीं किया गया।
विचारण के दौरान न्यायालय ने परिवादी बैंक द्वारा प्रस्तुत ऋण खाता विवरण, मूल चेक, चेक रिटर्न मेमो, विधिक सूचना पत्र एवं डाक संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त अपने पक्ष में उत्पन्न विधिक उपधारणा का खंडन करने में असफल रहा तथा परिवादी बैंक अपने मामले को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा।
न्यायालय ने अभियुक्त संतोष यादव को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। इसके अतिरिक्त परिवादी को हुई मानसिक एवं आर्थिक क्षति, ब्याज एवं अन्य व्यय को दृष्टिगत रखते हुए ₹2,20,000/- (दो लाख बीस हजार रुपये) अर्थदण्ड/प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश दिया गया है।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने अपने आदेश के पैरा 42 में अभियुक्त द्वारा पूर्व में प्रस्तुत किए गए जमानत मुचलकों को निरस्त कर दिया है।
इस अवसर पर यह भी उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता श्री धनेश कुमार सिंह द्वारा न्यायालय के समक्ष बैंक के पक्ष को प्रभावी, तथ्यपरक एवं विधिसम्मत तरीके से प्रस्तुत करते हुए लगातार प्रभावी पैरवी की जा रही है। उनके द्वारा बैंक के हितों से संबंधित प्रकरणों में साक्ष्यों, दस्तावेजों एवं विधिक प्रावधानों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप लगातार बैंक के पक्ष में निर्णय प्राप्त हो रहे हैं। प्रस्तुत निर्णय भी उनकी प्रभावी पैरवी एवं विधिक प्रस्तुतियों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
यह निर्णय परिवाद प्रकरण क्रमांक 4579/2025, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक विरुद्ध संतोष यादव, दिनांक 11 अगस्त 2026 को पारित किया गया। प्रकरण में परिवादी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की ओर से अधिवक्ता श्री धनेश कुमार सिंह ने पैरवी की।

Editor in Chief

















