रीवा/स्वराज टुडे: 15 अगस्त को देश भर में हर्षोल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा था. स्कूल कॉलेजों में भी रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा था. इसी बीच एक ऐसी दुखद खबर सामने आई जिसने सबके दिल को झकझोर दिया. दरअसल रीवा जिले के गरह क्षेत्र में, एक स्कूल के खेल के मैदान के पास गहरे पानी से भरे गड्ढे में दो छात्रों की जान चली गई. यह घटना तब हुई जब बच्चे देशभक्ति गीत गा रहे थे और राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे थे.अब, खुशी की जगह पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है.
जिला प्रशासन की इस चूक ने ले ली दो छात्रों की जान !!!
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा उपायों और अवैध मिट्टी खुदाई के गंभीर सवाल उठाए हैं. एक स्कूल और खेल के मैदान के इतने करीब इतना गहरा गड्ढा कैसे हो सकता है? इसे पानी से भरे होने के बावजूद सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? क्या स्थानीय अधिकारियों या प्रतिनिधियों ने कभी इस खतरनाक स्थल की जांच की?
शिकार हुए बच्चे, 13 वर्षीय सुभाष सोनी, खार्रा से और शिव पाठक, टेडाटल से, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में भाग लेने गरह आए थे. कार्यक्रम के बाद, वे सरकारी लड़कों के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल के मैदान के पास गए, जहां वे गड्ढे में डूब गए.
शोर सुनकर गांव वाले मौके पर पहुंचे, और गरह पुलिस को सूचित किया गया. दोनों बच्चों को पानी से निकाला गया और स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश, उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
स्वतंत्रता दिवस का जश्न मातम में बदला
उनकी मौत की खबर ने उनके गांवों में हड़कंप मचा दिया, जिससे एक उत्सव का दिन शोक में बदल गया. इस घटना ने ऐसे खतरनाक स्थलों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गुस्सा भड़काया है. स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि यह गड्ढा अवैध मिट्टी खुदाई के कारण बना था और बारिश के पानी से भरा हुआ था.
यदि गड्ढा वास्तव में इतना गहरा और खतरनाक था, तो इसके चारों ओर बाड़, बैरिकेड या चेतावनी संकेत क्यों नहीं थे? जिम्मेदार विभागों ने इसे स्कूल के खेल के मैदान के निकटता पर ध्यान क्यों नहीं दिया? यदि मिट्टी खुदाई की गई थी, तो किसने अनुमति दी, और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया?
इस घटना ने स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है; जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. अधिकारियों को यह जांच करनी चाहिए कि किसने स्कूल के पास इतना खतरनाक गड्ढा बनाने की अनुमति दी और किन सुरक्षा उपायों का पालन किया गया.
यह त्रासदी केवल दो परिवारों का नुकसान नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक चेतावनी है. यदि गरह और उसके आसपास अन्य समान खतरनाक गड्ढे या जलजमाव वाले क्षेत्र हैं, तो उन्हें तुरंत पहचान कर सुरक्षित करना चाहिए.
प्रशासन को स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और जनसंख्या वाले क्षेत्रों के निकट खतरनाक गड्ढों और खदानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करना चाहिए. आज, दो परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है: क्या प्रशासन जागेगा? क्या प्रतिनिधि अपनी आवाज उठाएंगे? क्या जिम्मेदारी तय की जाएगी? या यह घटना, कई अन्य की तरह, सरकारी फाइलों के अभिलेखों में खो जाएगी?
यह दिल दहला देने वाली घटना प्रणाली को एक दर्पण दिखाती है. प्रशासन, प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपनी जिम्मेदारियों पर विचार करें और यह सुनिश्चित करें कि इन दो निर्दोष बच्चों की मौतें उनकी तरह की आखिरी हों—अगली त्रासदी का इंतजार न करें.
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