छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: दिनांक 9/8/26 26 को विश्व के प्रथम आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा में अंतरराष्ट्रीय विश्व आदिवासी मूल निवासी दिवस तीन दिनी महोत्सव का शानदार समापन
उपरोक्त अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री राजेंद्र सिंह दीवान जी ( सोनाखान ) छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी
शहीद श्री वीर नारायण सिंह जी के वंशज रहे।

कार्यक्रम के अध्यक्षता श्री बी एस पैंकरा जी
अति विशिष्ट अतिथि श्री सेवक राम मरावी जी जिला अध्यक्ष सर्व समाज कोरबा सहित 42 जनजातियों के समाज प्रमुख उपस्थित रहे। इस दिन दिवसीय विशाल आयोजन में लोगों की भारी मात्रा में भागीदारी रही और लोगों ने उपरोक्त व्यवस्थित सारे कार्यक्रमों का भूरी भूरी प्रशंसा की ।

मंची उद्बोधन में आए हुए अतिथियों ने अपनी बात रखते हुए आगाह किया की अपने रूढ़िजन्य परंपरा आदिम सांस्कृतिक विरासत अपनी पारंपरिक खेलों सहित शिक्षा के महत्व के महत्व के साथ-साथ नशा उन्मूलन पर भी बड़े ही वजह से पूर्ण तरीके से समाज में वैचारिक एवं सामाजिक एकता बनी रहे एवं वर्तमान में जो परिस्थितियों हैं उसका भी आकलन समाज को एवं समाज के एक बड़े हिस्से जो अधिकारी कर्मचारी एवं व्यापारी के रूप में स्थापित है उन्हें भी सोचना पड़ेगा इसी क्रम में शक्तिपीठ के संरक्षक रघुवीर सिंह मार्को ने भी अपने उद्बोधन में बड़ी व्यापक चर्चा कर समाज के सामने अपनी बात रखी ।

इसी क्रम में शक्तिपीठ के संरक्षक मोहन सिंह प्रधान ने अपनी बात रखते हुए कहा की आदिवासी समाज ही धरती जंगल एवं परंपराओं के रखवाले के रूप में अपनी महती भूमिका एवम गांव शहर से लेकर विश्व के पटल पर अपनी विरासत को समझने का काम किया है साथ में उन्होंने कहा आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के बेहद करीब रहकर अपनी जिंदगी जीना जीता आया है जंगल पहाड़ नदियां और जमीन उनके लिए सिर्फ संसाधन नहीं है बल्कि जीवन और संस्कृति का हिस्सा है विश्व आदिवासी दिवस भी इसी बात पर जोर देता है की दुनिया की विविधता सिर्फ बड़े शहरों और आधुनिक जीवन शैली से नहीं बनती जंगलों पहाड़ों और गांव में सदियों से अपनी संस्कृति को संजोग कर रखने वाले समुदाय भी इस विविधता का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित द डे ऑफ़ वर्ल्ड इंडीजीनस पीपुल
विश्व आदिवासी दिवस की घोषणा सभ्य मानवतावादी दृष्टिकोण की वैश्विक उदघोष है, जैसे की प्राचीन सैलाश्रयों के उत्खनन व अध्ययन से वैज्ञानिकों ने प्रमाणित किया है कि आदिमानव ही आदिवासी मूल निवासी हैं जो वर्तमान कालखंड से 50 करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी की शुष्क शीतोष्ण संरचना के फल स्वरुप निर्मित विविध वनस्पति एवं जीव जगत की उत्पत्ति से प्रारंभ हुआ पृथ्वी में जिओ के विकास क्रम में जलचर थलचर जैसे विशाल डायनासोरों की समाप्ति के बाद होमो सेपियंस नमक वानर प्रजाति से आदिमानव की उत्पत्ति एवं जीवन यात्रा प्रारंभ होता चला आया जिसमें जाति धर्म पंथ संप्रदाय वर्ण भेद रंगभेद ईश्वर वाद की परिकल्पना नहीं थी, इनका आरंभिक जीवन भोजन आश्रय वस्त्र सुरक्षा के बिना भयावह कष्टप्रद प्राकृतिक आपदा एवं कठिन चुनौतियों के कारण संघर्ष पूर्ण जिस परिणाम स्वरूप आदिवासी समाज में आदिवासी समाज में प्रकृति शक्तियों पूर्वजों की उपासना पद्धतियों को स्वीकार किया गया प्रागैतिक इतिहास कॉल में पाषाण युग आखेट युग ताम्र युग पशुपालन योग कृषि योग तथा वर्तमान में संयंत्र संचार क्रांति युक्त विकास यात्रा में विश्व मानव सभ्यता की का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।

श्री प्रधान ने आगे कहा की जल जंगल जमीन पहाड़ के आदिवासियों की विरासत और उनके पूर्वजों के द्वारा इसे देव स्वरूप मानना उनका संरक्षण एवं संवर्धन करना उनकी प्राथमिकता में है लेकिन वर्तमान में जैसे हालात हैं विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए यह विकास के लिए सुखदाई तो जरूर है लेकिन मानव विकास एवं मानव जीवन के लिए कुछ वर्षों के बाद यह बहुत घातक सिद्ध होगा इसलिए आदिवासी समाज के साथ-साथ हर समाज को खुली हवा में सांस लेने की अनुमति प्रकृति ने दी है तो जल जंगल जमीनों का संरक्षण एवं संवर्धन सिर्फ आदिवासियों का नहीं होकर हर समाज के अंतिम छोर के व्यक्तियों का भी विजन एवं मिशन होना चाहिए ताकि शुद्ध हवा के हकदार हर कोई है ।
बात रखते हुए कहां कि समाज के अंदर में शिक्षा के महत्व को अंतिम छोर तक पहुंचाने का बीड़ा समाज को ही उठाना है साथ ही समाज में नशा उन्मूलन के लिए गांव गांव में जिस तरह से नशा उन्मूलन के काम चलाए जा रहे हैं उसमें और तेजी लानी चाहिए शिक्षा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं रोजगार व्यापार को प्रथम प्राथमिकता का आधार बनाकर संपूर्ण समाज को एकता बद्ध होकर कार्य करने की आवश्यकता है उन्होंने अपने उद्बोधन में समाज के सभी 42 जनजातियों के समाज प्रमुखों का धन्यवाद दिया अतिथियों को धन्यवाद दिया साथ में आए हुए नागरिकों का धन्यवाद दिया एवं शक्तिपीठ के संरक्षक मंडल पदाधिकारी मंडल युवा प्रकोष्ठ शंभू शक्ति सेना जंगो रायतार मातृशक्ति संघ समस्त अधिकारी कर्मचारी संघ एवं सभी चिकित्सकों सहित रक्तदान में शिविर लिए हुए प्रतिभागियों एवं भोजन व्यवस्था में लगे हुए सभी साथियों सुरक्षा में लगे हुए सभी सुरक्षा के प्रति सजग एवं खास करके इस पूरे कार्यक्रम को शक्तिपीठ के सांस्कृतिक विभाग एवं सांस्कृतिक प्रमुख श्री रूपेंद्र सिंह पैंकरा जी एवं उनकी टीम सहित पारंपरिक खेलकूद को संपन्न करने वाले बाहर से आए निर्णायक मंडल जिसमें मुख्य रूप से श्री अशोक नायक सर व्याख्याता पीडिया एवं कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर के एवं राज्य स्तर के जो रेफरी निर्णायक के रूप में अपनी अपनी बेहतरीन सेवाएं दी साथ में पूरे कमेटी के सदस्यों का जिन्होंने रात दिन मेहनत करके इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई उन सबों का धन्यवाद एवं आभार प्रदर्शन किया।

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