छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ, संतुलित एवं सार्थक जीवन का आधार है। व्यक्ति का मानसिक रूप से स्वस्थ होना न केवल उसके व्यक्तिगत जीवन, बल्कि परिवार और समाज की खुशहाली के लिए भी आवश्यक है। इसी महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम “जीने के अनुभवों को सुना गयाः सच्ची आवाजें, सच्चा बदलाव” के अवसर पर शासकीय ई.वी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा के मनोविज्ञान विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एल. एन. कवर के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा तनाव, चिंता, अवसाद एवं अन्य मानसिक परेशानियों के प्रति सकारात्मक, संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक परेशानियों को कमजोरी समझने या छिपाने के बजाय उन्हें समझना, स्वीकार करना और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करना आवश्यक है। वर्तमान समय में पढ़ाई, करियर, पारिवारिक परिस्थितियों एवं सामाजिक अपेक्षाओं के कारण अनेक लोग मानसिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसी व्यक्ति की भावनाओं को समझना, उसकी बात धैर्यपूर्वक सुनना और उसे भावनात्मक सहयोग प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को प्रेरित किया गया कि संवेदनशील संवाद और परस्पर सहयोग किसी व्यक्ति के जीवन में आशा, आत्मविश्वास एवं सकारात्मकता का संचार कर सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के प्रसार के लिए एक विशेष पहल के अंतर्गत मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा स्वयं तैयार किए गए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी फ्लैक्स महाविद्यालय के अन्य विभागों में वितरित किए गए। इन फ्लैक्स के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक परेशानियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण तथा जागरूकता की आवश्यकता का संदेश प्रसारित किया गया। इस पहल का उद्देश्य महाविद्यालय के अधिकाधिक विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों तक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सकारात्मक विचार पहुँचाना तथा एक जागरूक, संवेदनशील और सहयोगात्मक वातावरण विकसित करना था। विद्यार्थियों की इस रचनात्मक पहल ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी एवं सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया। कार्यक्रम का आयोजन मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अवंतिका कौशिल, अतिथि व्याख्याता डॉ. शैलेन्द्र कुमार गौतम एवं डॉ. अर्चना पाण्डेय के मार्गदर्शन में किया गया। मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति तथा जागरूकता फ्लैक्स तैयार करने एवं वितरित करने में सक्रिय सहभागिता निभाई। उनके प्रयासों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को महाविद्यालय के विभिन्न विभागों तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत चिंता का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। मानसिक परेशानियों के प्रति संवेदनशीलता, सकारात्मक संवाद, समय पर सहायता और आपसी सहयोग के माध्यम से एक ऐसे समाज का निर्माण किया जा सकता है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर
सके और आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी संकोच के सहायता प्राप्त कर सके। यह आयोजन विद्यार्थियों को स्वयं के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग, संवेदनशील और सहयोगी बनने की प्रेरणा देने वाला रहा। नुक्कड़ नाटक और जागरुकता फ्लैक्स के माध्यम से यह संदेश प्रसारित किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित न रहकर हमारे दैनिक व्यवहार और जीवन का हिस्सा बननी चाहिए।
किसी की खामोशी को समझना, उसकी बात को सुनना और कठिन समय में उसका साथ देना-यही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सच्ची संवेदनशीलता है।
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