मुम्बई/स्वराज टुडे: नाना पाटेकर की जिंदगी में एक जगह ऐसी थी, जहां बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर उन्हें सुकून मिलता था। अब यही 27 एकड़ का फार्महाउस उनके आखिरी विदाई का गवाह बना है। तस्वीरों में दिखती इस जगह की सादगी इसके मालिक की शख्सियत से खूब मेल खाती है।

पुणे के डोनजे गांव में, खड़कवासला इलाके के पास मौजूद नाना पाटेकर के फार्महाउस को उनके अंतिम संस्कार के लिए चुना गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्थिव शरीर यहां लाया गया और यहीं अंतिम विदाई दी गयी। महाराष्ट्र सरकार ने एक्टरके सिनेमा और रंगमंच में योगदान को देखते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

यह प्रॉपर्टी करीब 27 एकड़ में फैली बताई जाती है और पुणे के खड़कवासला के पास स्थित है। बॉलीवुड स्टार्स के आलीशान बंगलों से अलग, इस जगह की पहचान उसका बड़ा आकार होने के बावजूद भड़कीलेपन से दूर रहना है। खुले इलाके, हरियाली और खेती से जुड़े हिस्से इसे किसी लग्जरी सेलिब्रिटी होम के बजाय एक शांत ग्रामीण ठिकाने की पहचान देते हैं।
(तस्वीर में फार्महाउस पर नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार की तैयारी)

फार्महाउस के इंटीरियर में टेराकोटा फ्लोरिंग, लकड़ी का काम और एक्सपोज्ड वुडन बीम्स जैसे एलिमेंट्स बताए गए हैं। करीब सात कमरों और एक बड़े हॉल वाली इस जगह को बहुत चमकदार बनाने के बजाय प्राकृतिक और देसी एहसास दिया गया है। यही सिंपल डिजाइन इस घर को नाना की निजी पसंद और उनकी सादगी से जोड़ता है।

यहां महंगे डेकोर की जगह वुडन फर्नीचर, खुले बरामदे, प्राकृतिक रोशनी और हरियाली पर जोर दिखाई देता है। उपलब्ध तस्वीरों में घर का इंटीरियर काफी सादा नजर आता है। दीवारों और कमरों में पारंपरिक स्पर्श भी दिखता है, जिससे पूरा फार्महाउस किसी आधुनिक फिल्मी बंगले से ज्यादा एक शांत, देसी घर जैसा महसूस होता है।

नाना इस प्रॉपर्टी को सिर्फ वीकेंड होम की तरह इस्तेमाल नहीं करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां खेती भी होती थी और एक्टर खुद खेती के काम से जुड़े रहते थे। गेहूं, धान, चना, दाल जैसी फसलों का जिक्र मिलता है। यही वजह है कि इस फार्महाउस का रिश्ता नाना की उस जिंदगी से भी था, जिसे वह कैमरों और फिल्मी शोर से दूर जीना पसंद करते थे।

मुंबई की तेज रफ्तार से दूर खड़कवासला का यह इलाका उन्हें शांति, खुली हवा और प्रकृति देता था। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वह यहां परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताते, खेती करते और सामान्य जीवन जीते थे। नाना के लिए यह जगह स्टारडम से दूरी बनाने का तरीका थी-जहां वह एक्टरकम और किसान ज्यादा महसूस करते थे।
(तस्वीर फार्महाउस पर नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार की तैयारी के वक्त की है।)

रिपोर्ट्स में नाना के खेती से गहरे जुड़ाव का उल्लेख है। वह खेतों की देखभाल में खुद शामिल होते थे और इस जमीन को सिर्फ प्रॉपर्टी के तौर पर नहीं देखते थे। गेहूं, धान और दूसरी फसलों की खेती के अलावा उनका फार्म आसपास के ग्रामीण जीवन से भी जुड़ा था। यही कारण है कि यह जगह उनकी सादगी और मिट्टी से जुड़ी सोच का अहम हिस्सा बन गई थी।

फार्महाउस नाना के लिए निजी मेलजोल की भी खास जगह था। रिपोर्ट्स और साझा तस्वीरों से पता चलता है कि वह यहां दोस्तों, परिचितों और करीबियों का स्वागत करते थे। एक करीबी के मुताबिक, नाना गणपति उत्सव के दौरान यहां लोगों को खुद खाना खिलाते थे। यानी यह घर सिर्फ आराम की जगह नहीं, बल्कि उनके मिलनसार और अपनापन भरे अंदाज का भी हिस्सा था।

नाना पाटेकर का नाम भले ही दशकों की शोहरत से जुड़ा रहा हो, लेकिन उनकी निजी जिंदगी में दिखावे की जगह सादगी ज्यादा नजर आई। मुंबई में उनका छोटा 1BHK घर भी इसी बात का उदाहरण रहा है। पुणे का फार्महाउस बड़ा जरूर है, लेकिन इसका डिजाइन और जीवनशैली अब भी जमीन से जुड़ी दिखाई देती है।

जिस जगह पर नाना ने खेती की, दोस्तों के साथ वक्त बिताया और मुंबई की भागदौड़ से दूर सुकून तलाशा, अब वही जगह उनके अंतिम संस्कार की गवाह बनेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनजे स्थित फार्महाउस पर उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। नाना के चाहने वालों के लिए यह विदाई उस जगह से होगी, जो उनकी निजी जिंदगी का सबसे सादा और शायद सबसे करीब वाला हिस्सा थी।
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