पटना/स्वराज टुडे: बिहार में गंगा, पुनपुन, गंडक और कोसी समेत दस नदियों में आई बाढ़ ने निचले इलाके और दियारा क्षेत्रों में कहर बरपाना शुरू किया है। कई ग्रामीण सड़कों पर पानी बहने के कारण आवागमन बाधित हुआ है।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोग ऊंची जगहों पर शरण लेने को मजबूर हैं। नालंदा के अस्थावां और पटना जिले के धनरुआ में तटबंध टूटने से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल डूब गई है जबकि बेगूसराय में दो रिंग बांधों में रिसाव से दहशत है।
आठ जिलों में बाढ़ का खतरा
इधर, पटना, बक्सर और भागलपुर के गंगा घाट डूब गए हैं। वहीं, सरयू का पानी छपरा शहर में प्रवेश कर गया है। गंगा, पुनपुन और दरधा में उफान की आशंका के मद्देनजर आठ जिलों को अलर्ट किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने पटना, नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय एवं जहानाबाद के डीएम को संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने को कहा है।
हाई अलर्ट पर NDRF और SDRF की टीम
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार तक पटना में गंगा नदी के अपने उच्चतम जलस्तर को पार करने की आशंका है। सोन, पुनपुन और दरधा के जलस्तर में भी वृद्धि हो रही है। तटबंधों एवं संवेदनशील स्थलों की 24 घंटे निगरानी चल रही है। जिला प्रशासन को कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर निचले इलाके से लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद लें। नदी में स्नान, तैराकी, सेल्फी लेने अथवा नौकायन की मनाही की गई है। बाढ़ का सर्वाधिक असर दक्षिण बिहार के जिलों में है।
गंगा नदी पटना से भागलपुर तक खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। पटना में दीघा से लेकर दीदारगंज तक नदी किनारे बसे कई मोहल्लों में पानी प्रवेश कर गया है। दीघा क्षेत्र स्थित बिंद टोली में बाढ़ का पानी घुसने से डेढ़ हजार लोग विस्थापित हो गए हैं। पश्चिम चंपारण के योगापट्टी और मधुबनी प्रखंड के कई गांव बाढ़ से घिर गए हैं। गंगा, सरयू, सोन और गंडक नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से छपरा सदर प्रखंड की पांच पंचायतों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया। गुरुवार को गंडक का जलस्तर हाजीपुर और लालगंज में लाल निशान को पार कर गया। भोजपुर जिले की 40 ग्राम पंचायतें बाढ़ से घिरी हैं।
धनरुआ : दरधा नदी की तेज धार से 25 फीट टूटा तटबंध
दरधा नदी में उफान से धनरुआ प्रखंड में बाढ़ का संकट गहरा गया है। बीर के महुआतड़ के पास बुधवार की रात तटबंध करीब 20 से 25 फीट तक टूट गया। इससे आसपास के करीब 30 घरों में पानी घुस गया। घरों में पानी आने के बाद ग्रामीण रात से ही तटबंध पर शरण लिये हुए हैं। वहीं, बीर-इमलीतड़ के पास स्थित अंडा फार्म के समीप तटबंध के ऊपर से नदी का पानी ओवरफ्लो कर रहा है। पानी बीर अस्पताल के गेट तक पहुंच गया है।
देवधा, लक्ष्मीचक, मुस्तफापुर, सदीसोपुर समेत करीब आधा दर्जन गांवों के खेतों में लगी फसलें डूब गई हैं। प्रशासन की ओर से मिट्टी व बालू भरे बोरे लगाकर पानी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन तेज बहाव के कारण पानी लगातार तटबंध के ऊपर से निकल रहा है। यही स्थिति भखरी गांव के पास की है। देवधा व आसपास के इलाकों में करीब 100 बीघे व महुआतड़ के पास करीब 500 बीघे में लगी धान की फसल पानी में डूब गयी है। बीर के महेंद्र बिंद और मालो देवी ने बताया कि दरधा नदी में सात-आठ वर्षों के बाद इतना पानी आया है। घर में पानी घुसने के बाद वह तटबंध पर शरण लिये हुए हैं। देवधा ईंट-भट्ठा के पास टूटे तटबंध की मरम्मत कराने का निर्देश एसडीओ धनराज कुमार ने अधिकारियों को दिया है।
संभावित बाढ़ से निपटने को आवश्यक तैयारी रखें: सीएम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बाढ़ की संभावित स्थिति को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह सजग और संवेदनशील है। आमजनों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संभावित बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी रखें। ताकि, किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर तथा बाढ़ के खतरे को देखते हुए स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तटबंधों की सुरक्षा तथा संभावित प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे एहतियाती प्रबंधों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह शुक्रवार की दोपहर एक बजे प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।
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