वाराणसी/स्वराज टुडे: पाकिस्तान के राष्ट्रपति के एक्स हैंडल से एक दिन पूर्व बनारस के संदर्भ में एक पोस्ट जारी होने के बाद से ही प्रकरण चर्चा में बना हुआ है। आसिफ अली जरदारी के एक्स हैंडल से बनारस में मस्जिद को लेकर रेलवे की ओर से जारी नोटिस पर आपत्ति जताई गई है।
रेलवे की ओर से काशी स्टेशन विस्तारीकरण के तहत पूर्व में मंदिर और मस्जिद को गिराया जा चुका है। अब एक और मस्जिद को हटाने की नोटिस जारी की गई है।
रेलवे की ओर से संबंधित मस्जिद को नोटिस जारी करते हुए कहा गया है कि काशी स्टेशन आपको सूचित किया जाता है कि, काशी रेलवे स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार के तरफ (सर्कुलेटिंग एरिया के पास) रेलवे भूमि पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण हुआ हैं जो कि, काशी रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्य में बाधक बना हुआ है।

नोटिस के साथ लिखा है कि इस सम्बन्ध में मूलवाद संख्या-1174/1991 अन्जुमन इन्तेजामिया बनाम यूनियन आफ इण्डिया माननीय न्यायालय सिविल जज (जू.डी.) शहर वाराणसी के न्यायालय में चल रहा था जो दिनांक-28.08.2 को माननीय न्यायालय द्वारा ख़ारिज कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन द्वारा रेलवे भूमि पर अवैध रूप से बने हुए मस्जिद को हटाने का निर्णय लिया गया है। अतः आप से अनुरोध है कि दिनांक-20.06.2026 तक अवश्य हटा लें अन्यथा रेलवे प्रशासन द्वारा उक्त तिथि के बाद किसी भी दिन मस्जिद हटाने और ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जायेगी।
इस नोटिस के जारी होने और नोटिस के पूर्ण होने के संदर्भ में तिथि बीतने के बाद अब कभी भी मस्जिद को गिराया जा सकता है। इसके संदर्भ में मस्जिद की ओर से भी जवाब दाखिल किया गया है। जवाब में कहा गया है कि कथित रेलवे प्रशासन की नोटिस पर न ही किसी अधिकारी की दस्तखत है और न ही नोटिस जारी करने का दिनांक है। जिस मुकदमा के खारिज होने की बात इसमें लिखी है वह मुकदमा मस्जिद के बाहर पूरब की ज़मीन से सम्बन्धित था। मस्जिद से इस मुकदमे का कोई सम्बन्ध नहीं था या है। यह नोटिस भ्रामक है।
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कहा गया है कि इसी मुकदमे में रेलवे प्रशासन ने अपने शपथ-पत्र में मस्जिद का होना, और मुसलमानों की मिल्कियत तस्लीम किया है। यह मस्जिद सन 1034 में बनी है 1883-84 के बन्दोबस्त नक्शे में है। उससे पहले के नक्शे में भी है। राजघाट में रेलवे 1887 में आई है। साबित है कि रेलवे से पहले की मस्जिद है। रेलवे की इस बदनीयती कि मस्जिद अवैध है अंजुमन मसाजिद हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेगी और लड़ भी रही है। रेलवे प्रशासन की नोटिस भ्रामक है और नगर की कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश है।
बनारस में पुलिस प्रशासन और मुस्लिम धर्म गुरुओं की ओर से पाकिस्तान के राष्ट्रपति की ओर से जारी पोस्ट को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि रेलवे और मस्जिद प्रशासन के बीच का प्रकरण है इसमें पाकिस्तान के राष्ट्रपति की ओर से आपत्तिजनक पोस्ट किया जाना द्वेष पूर्ण है। दरअसल एक्स हैंडल पर पोस्ट जारी होने के बाद से ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पोस्ट को लेकर आपत्ति का क्रम जारी है।
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क्या कहा है पाक राष्ट्रपति ने
पोस्ट में लिखा है कि राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों जिनमें वाराणसी की 1,000 साल पुरानी मस्जिद गंज शहीदा भी शामिल है को गिराए जाने और उन्हें दी जा रही धमकियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने भारत से ऐसी कार्रवाइयां तुरंत रोकने को कहा और चेतावनी दी कि इससे भारत के टूटने और वहां हमेशा के लिए अराजकता फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों व साझा सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा करने की अपील की।
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