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कोरबा में मानव तस्करी रोकथाम पर विशेष कार्यशाला: जागरूकता से मिलेगी सुरक्षा

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महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव!

कोरबा/स्वराज टुडे: एक मासूम बच्चे की चीख, एक महिला की बेबसी, और एक परिवार का टूटता सपना—मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) समाज का वो काला सच है, जिसे मिटाने के लिए कोरबा में एक बड़ा कदम उठाया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा ने कलक्ट्रेट सभा कक्ष में 19 मार्च 2025 को ट्रैफिकिंग और अनैतिक व्यापार रोकने के लिए एक प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम न सिर्फ जानकारी से भरा था, बल्कि दिल को छूने वाला और समाज को जगाने वाला भी था।

सबसे पहले क्यों जरूरी है यह जंग?

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मानव तस्करी एक ऐसा अपराध है, जो इंसानियत को शर्मसार करता है। इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता सुश्री डिम्पल भेडिया ने बताया कि ट्रैफिकिंग में लोगों को धोखे, डर या लालच से फंसाकर ऐसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया जाता है, जो वे कभी नहीं चाहते। कई बार बच्चों से भीख मंगवाई जाती है, महिलाओं से गंदे बर्तन धुलवाए जाते हैं, या फिर कचरा उठाने जैसे अमानवीय काम करवाए जाते हैं। उनकी यह बात हर किसी के दिल में चुभ गई कि यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत पर हमला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे रोकने के लिए हर गली-मोहल्ले में जागरूकता फैलानी होगी।

कानून और हौसले की ताकत

कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि सहायक श्रम आयुक्त श्री राजेश आदिले ने कानून की ताकत को सामने रखा। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, बंधुआ मजदूर उन्मूलन अधिनियम, बाल श्रम निषेध और किशोर न्याय अधिनियम जैसे कई कानून इस बुराई से लड़ने के लिए मौजूद हैं। लेकिन सिर्फ कानून काफी नहीं। उन्होंने अपील की कि जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, मीडिया और आम लोग एकजुट होकर इस जंग में शामिल हों, तभी जीत मुमकिन है। उनकी यह बात सुनकर लगा कि यह लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी है।

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पुलिस का साथ, समाज का भरोसा

पुलिस विभाग से आईं उपनिरीक्षक श्रीमती शारदा वर्मा ने गांव वालों से एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “अपने बच्चों को लालच में न आने दें। कोई बाहर से रोजगार का झांसा दे तो पहले पुलिस को बताएं।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पुलिस हर कदम पर लोगों के साथ है। उनकी सख्त लेकिन संवेदनशील बातों ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि छोटी-सी सावधानी कितने परिवारों को बचा सकती है।

जागरूकता का संकल्प

कार्यक्रम का समापन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री गजेंद्र देव सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि ट्रैफिकिंग रोकने के लिए गांव-गांव, पंचायत-पंचायत में ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। उनकी यह बात हर किसी के लिए एक प्रेरणा बन गई कि जागरूकता ही इस जंग का सबसे बड़ा हथियार है।

कौन-कौन रहे उपस्थित?

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इस कार्यशाला में कई लोग शामिल हुए- बाल संरक्षण अधिकारी श्रीमती रजनी मारिया, बाल संरक्षण अधिकारी गैर संस्थागत सुश्री दीपमाला सिसोदिया, केंद्र प्रशासक सखी वन स्टॉप सेंटर सुश्री पुष्पा नवरंग, सखी वन स्टॉप सेंटर के केसवर्कर श्रीमती कविता साहू एवं श्रीमती नीलोफर बानो, स्थानीय शिकायत समिति की अध्यक्ष डॉ.सुषमा पांडे, महिला उत्पीड़न निवारण समिति के सदस्य श्रीमती चंद्र बाला शुक्ला, श्रीमती निशा तायड़े, चाईल्ड लाइन टीम मेंबर स्रोत एनजीओ श्री सत्यनारायण जायसवाल, पैरा लीगल वालंटियर (पीएलवी) श्रीमती उमा नेताम, श्रीमती वंदना चंद्रोसा, श्रीमती विजयलक्ष्मी सोनी एवं रवि शंकर, महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक और कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता। इन सबने मिलकर यह संदेश दिया कि समाज के हर कोने से आवाज उठेगी, तो ट्रैफिकिंग का अंत जरूर होगा।

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एक कदम, बड़ी उम्मीद

यह कार्यशाला सिर्फ एक आयोजन नहीं थी, बल्कि उन मासूमों और बेबस लोगों के लिए उम्मीद की किरण थी, जो ट्रैफिकिंग के जाल में फंस गए हैं। कोरबा ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों और लोग साथ हों, तो कोई भी बुराई ज्यादा दिन नहीं टिक सकती। अब सवाल यह है—क्या हम सब भी इस जंग का हिस्सा बनेंगे? यह सोचने का वक्त है, क्योंकि हर कदम से एक जिंदगी बच सकती है।

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Deepak Sahu

Editor in Chief

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