सरपंच, पूर्व सरपंच और सचिव पर राशि गबन करने का आरोप; ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उठाई मांग
छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम कनकी में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप सामने आया है। ग्रामीणों ने आज कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत सौंपकर करीब एक करोड़ रुपये की राशि में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत कनकी में नल-जल योजना, नलकूप, सीसी रोड, मरम्मत और अन्य निर्माण कार्यों के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। आरोप है कि वर्तमान सरपंच फूल बाई मांझी, पूर्व सचिव लक्ष्मी राजपूत और पूर्व सरपंच बिहारीलाल मंझवार ने कुछ कार्य अधूरे या आंशिक रूप से कराकर पूरी राशि का आहरण कर लिया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
पहले भी की गई थी शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस मामले में 5 अक्टूबर 2026 को भी लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि जनपद पंचायत करतला के अधिकारी दादू सिंह पैकरा, देव सिंह पैकरा और संतोष कुमार नायर तथा वर्तमान सचिव खिलेश कुमार ने न तो उनका बयान दर्ज किया और न ही मामले की निष्पक्ष जांच की। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
जवाब लेने पहुंची स्वराज टुडे न्यूज़ की टीम
मामले में संबंधित पक्षों का जवाब जानने के लिए स्वराज टुडे न्यूज़ की टीम ने सरपंच पति गोरेलाल मांझी, पूर्व सचिव लक्ष्मी राजपूत, वर्तमान सचिव खिलेश पटेल और पूर्व सरपंच बिहारीलाल मंझवार से संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन बार-बार फोन करने के बावजूद किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। थोड़ी देर बाद कॉल बैक करके वर्तमान सचिव खिलेश पटेल ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
इसके बाद न्यूज़ टीम पूर्व और वर्तमान सरपंच के निवास पर पहुंची। पूर्व सरपंच बिहारीलाल मंझवार घर पर नहीं मिले, जबकि वर्तमान सरपंच फूल बाई मांझी से मुलाकात हुई। उनसे मामले के संबंध में जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने इस संबंध में जानकारी होने से अनभिज्ञता जाहिर की।
अब जिला प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
करीब एक करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े इस मामले में ग्रामीणों ने जांच और जवाबदेही की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में किन तथ्यों का खुलासा होता है।
यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति, स्वीकृत राशि के उपयोग और कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब भी सामने आना बाकी है।
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