दरभंगा/स्वराज टुडे: बॉलीवुड की चकाचौंध और बड़े पर्दे पर अपने शानदार अभिनय से करोड़ों लोगों का दिल जीतने वाले दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनकी किसी नई फिल्म या किरदार की नहीं, बल्कि उनके सादगी भरे अंदाज की हो रही है।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद संजय मिश्रा पहली बार बिहार के दरभंगा जिले में स्थित अपने पैतृक गांव नारायणपुर पहुंचे। यहां उनका बिल्कुल देसी अंदाज देखने को मिला। महंगे कपड़ों और फिल्मी सितारों जैसी चमक-दमक से दूर संजय मिश्रा लुंगी और टीशर्ट पहनकर अपने घर के बरामदे में जमीन पर बैठे नजर आए। उन्होंने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों से मुलाकात की तथा कुलदेवी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। गांव में उनके अचानक पहुंचने से परिजनों में खुशी का माहौल बन गया।
बिना किसी सूचना के अचानक गांव पहुंचे अभिनेता
जानकारी के अनुसार, संजय मिश्रा बिहार के दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत राघोपुर पश्चिमी पंचायत के नारायणपुर गांव पहुंचे थे। उनका यह दौरा बेहद निजी और पारिवारिक था। बताया जा रहा है कि उन्होंने गांव आने की पूर्व सूचना नहीं दी थी।
ऐसे में जब परिवार के लोगों ने अचानक संजय मिश्रा को अपने बीच देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता ने गांव पहुंचने के बाद अपने रिश्तेदारों का हालचाल जाना और परिवार के बुजुर्गों से मुलाकात की।
इस दौरान संजय मिश्रा ने किसी फिल्मी सितारे जैसा व्यवहार करने के बजाय आम ग्रामीण की तरह परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताया। उनके इस अंदाज ने गांव के लोगों को प्रभावित किया।
लुंगी-टीशर्ट पहनकर दालान में बैठे संजय मिश्रा
गांव में संजय मिश्रा का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला दृश्य उनका साधारण पहनावा था। वह लुंगी और टीशर्ट पहने घर के दालान में जमीन पर बैठे दिखाई दिए। उनके आसपास परिवार के बच्चे, बुजुर्ग और अन्य सदस्य मौजूद थे। अभिनेता सभी के साथ सहज अंदाज में बातचीत करते नजर आए।
इस मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में संजय मिश्रा का सरल व्यवहार देखकर उनके प्रशंसक उनकी तारीफ कर रहे हैं। फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक काम करने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करने के बावजूद अभिनेता का अपनी जड़ों से जुड़ाव लोगों को पसंद आ रहा है।
सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक इसे उनकी सादगी और पारिवारिक संस्कारों का उदाहरण बता रहे हैं।
कुलदेवी की पूजा कर लिया आशीर्वाद
अपने पैतृक गांव पहुंचने के बाद संजय मिश्रा ने पारिवारिक परंपराओं का भी निर्वहन किया। उन्होंने कुलदेवी की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद लिया। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े परिवारों में कुलदेवी की पूजा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। संजय मिश्रा ने भी अपने गांव के दौरे के दौरान इस परंपरा को महत्व दिया।
राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद उनका गांव पहुंचना परिवार के लिए भावुक और खुशी से भरा अवसर रहा। परिजनों का कहना है कि संजय मिश्रा भले ही देशभर में प्रसिद्ध अभिनेता बन चुके हैं, लेकिन परिवार और गांव के प्रति उनका लगाव पहले जैसा ही है।
पटना में फिल्म की शूटिंग के बीच निकाला समय
बताया जा रहा है कि संजय मिश्रा इन दिनों एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पटना आए हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर पैतृक गांव जाने का फैसला किया। उनके भांजे विवेक मिश्रा ने बताया कि अभिनेता से मुलाकात कर परिवार के सभी लोग बेहद खुश हुए।
इस अवसर पर परिवार के राजीव मिश्रा, विजय कुमार मिश्रा, राजेश उर्फ टनटन मिश्रा सहित कई रिश्तेदार मौजूद रहे। गांव के पूर्व मुखिया श्रवण नायक और अन्य स्थानीय लोगों ने भी अभिनेता के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से हुए सम्मानित
संजय मिश्रा को हाल ही में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें फिल्म भक्षक में उनके प्रभावशाली अभिनय के लिए दिया गया। फिल्म में उन्होंने भास्कर सिन्हा नामक पत्रकार की भूमिका निभाई थी।
22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें रजत कमल प्रदान किया। करीब तीन दशक लंबे अभिनय करियर में यह उनका पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है। इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ पूरे मिथिलांचल में खुशी का माहौल रहा।
बचपन में प्यार से बुलाते थे ‘घूटन’
संजय मिश्रा की पारिवारिक जड़ें दरभंगा जिले के नारायणपुर गांव से जुड़ी हैं। गांव और परिवार के लोग बचपन में उन्हें प्यार से ‘घूटन’ कहकर बुलाते थे।
उनके पिता स्वर्गीय शंभुनाथ मिश्रा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े रहे थे। वहीं उनके दादा स्वर्गीय जगदीप नारायण मिश्रा प्रशासनिक सेवा में उच्च पद पर कार्यरत रहे थे। संजय मिश्रा ने अपने बचपन का समय पटना, वाराणसी और दिल्ली जैसे शहरों में बिताया। बचपन से ही उन्हें लोगों के व्यवहार, बोलचाल और अलग-अलग परिस्थितियों को समझने में रुचि थी। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय में भी दिखाई दिए।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से शुरू हुआ अभिनय का सफर
संजय मिश्रा ने दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन और फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत की।
टीवी धारावाहिक ऑफिस ऑफिस में शुक्ला जी के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने आंखों देखी, मसान, दम लगा के हईशा, वध और भक्षक जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।
कॉमेडी से लेकर गंभीर और संवेदनशील किरदारों तक, संजय मिश्रा ने अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया है। वह हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने मुख्य अभिनेता और चरित्र अभिनेता दोनों रूपों में दर्शकों की सराहना प्राप्त की है।
गांव की मिट्टी से आज भी कायम है रिश्ता
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद संजय मिश्रा का पैतृक गांव पहुंचना उनके परिवार और ग्रामीणों के लिए विशेष अवसर बन गया। अभिनेता ने अपने गांव के लोगों के साथ समय बिताकर यह संदेश दिया कि प्रसिद्धि हासिल करने के बाद भी अपनी जड़ों और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े रहना महत्वपूर्ण है। उनका लुंगी-टीशर्ट वाला देसी अंदाज अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशंसक उनके व्यवहार को सादगी और विनम्रता की मिसाल बता रहे हैं।
बॉलीवुड में अलग पहचान बनाने वाले संजय मिश्रा का यह रूप एक बार फिर साबित करता है कि उनकी लोकप्रियता केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सहज व्यक्तित्व भी लोगों को आकर्षित करता है।
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