छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: चेक बाउंस के मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, कोरबा श्री सुनील कुमार नन्दे के न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त सौरभ कालस्कर द्वारा प्रस्तुत आपराधिक अपील को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत दी गई सजा को बरकरार रखा है।
प्रकरण में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा द्वारा दिनांक 16 अक्टूबर 2025 को अभियुक्त सौरभ कालस्कर को 6 माह के सश्रम कारावास तथा ₹2,50,000/- के अर्थदंड से दंडित किया गया था। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर अतिरिक्त 2 माह के सश्रम कारावास का भी प्रावधान किया गया था।
अभियुक्त द्वारा उक्त निर्णय के विरुद्ध प्रस्तुत अपील में यह तर्क दिया गया था कि चेक भारतीय बैंक से लिए गए ऋण के संबंध में नहीं था। हालांकि अपीलीय न्यायालय ने अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं बैंक के दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद निचली अदालत के निष्कर्षों में कोई विधिक त्रुटि नहीं पाई। न्यायालय ने धारा 118(क) एवं धारा 139 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत उत्पन्न वैधानिक उपधारणाओं को भी विचार में लिया।
न्यायालय ने अपील को निराधार पाते हुए खारिज कर दिया तथा दिनांक 16.10.2025 के निर्णय एवं सजा को यथावत रखा। साथ ही अभियुक्त का जमानत मुचलका निरस्त करते हुए निचली अदालत को निर्णय एवं सजा के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया है।
यह निर्णय 17 सितंबर 2026 को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, कोरबा श्री सुनील कुमार नन्दे द्वारा सुनाया गया। प्रकरण में इंडियन बैंक की ओर से अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने पैरवी की।
यह भी पढ़ें: Health care: अगर आप अकेले हो और Heart Attack आ जाए… तो ये गलती बिल्कुल ना करें

Editor in Chief

