अस्पताल प्रबंधक ने कहा निष्पक्ष पत्रकारिता का उद्देश्य तथ्यों की सत्यता की पुष्टि करना है, न कि सनसनी फैलाने के लिए किसी प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाना।
बिलासपुर/स्वराज टुडे: – हाल ही में कुछ मीडिया पोर्टल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शिवा मेडिसिटी अस्पताल के खिलाफ प्रसारित की जा रही खबरें पूरी तरह से तथ्यहीन, भ्रामक और अस्पताल की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इन सनसनीखेज और गैर-जिम्मेदाराना आरोपों का कड़ा खंडन किया है और स्पष्ट किया है कि वास्तविकता इससे कोसों दूर है।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण चिकित्सकीय तथ्य इस प्रकार हैं:

1. मरीज की अत्यंत गंभीर स्थिति: मरीज Stage IV Pancreatic Cancer (Advanced Stage) के साथ Gastric Outlet Obstruction जैसी गंभीर स्थिति से पीड़ित थे। कैंसर इतना एडवांस था कि मुंबई के बड़े अस्पतालों ने भी इलाज की सीमाएं बताते हुए मरीज को वापस भेज दिया था।
2. अपोलो अस्पताल में प्रक्रिया: गैस्ट्रिक आउटलेट ऑस्ट्रक्शन के कारण अपोलो अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था, जिसके बाद मरीज की स्थिति और अधिक नाजुक हो गई थी। आर्थिक कारणों से परिजनों ने उन्हें शिवा मेडिसिटी में स्थानांतरित किया था।
3. शिवा मेडिसिटी में भर्ती के समय स्थिति: अस्पताल में भर्ती के समय मरीज का ब्लड प्रेशर (BP) और पल्स रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था तथा श्वसन क्रिया भी अत्यंत असामान्य थी। परिजनों को शुरुआत में ही स्पष्ट बता दिया गया था कि मरीज की स्थिति बेहद नाजुक है और किसी भी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
4. लिखित DNR (Do Not Resuscitate) सहमति: सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि परिजनों ने स्वयं स्वेच्छा से लिखित DNR पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत वेंटिलेटर और रिससिटेशन (CPR) से स्पष्ट इनकार किया गया था।
5. पेलिएटिव केयर (Palliative Care): मरीज को केवल ‘एंड-ऑफ़-लाइफ केयर’ (Supportive Care) के लिए भर्ती किया गया था, जिसका एकमात्र उद्देश्य उनके अंतिम समय में दर्द और तकलीफ को कम करना था।
6. इंजेक्शन को लेकर बेबुनियाद दावे: बिना किसी चिकित्सकीय जांच, पोस्टमार्टम या आधिकारिक प्रमाण के यह दावा करना कि मरीज की मृत्यु किसी इंजेक्शन के कारण हुई, पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भावनापूर्ण है।
मीडिया की जिम्मेदारी और कानूनी चेतावनी
निष्पक्ष पत्रकारिता का उद्देश्य तथ्यों की सत्यता की पुष्टि करना है, न कि सनसनी फैलाने के लिए किसी प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाना। शिवा मेडिसिटी अस्पताल में 24 घंटे क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ उपलब्ध रहते हैं। अस्पताल का पक्ष जाने बिना ऐसे गंभीर आरोप प्रसारित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
अस्पताल प्रबंधन ने संबंधित मीडिया पोर्टल्स को अपने वकील के माध्यम से नोटिस भेज दिया हैं यदि ये झूठे एवं मानहानिकारक आरोप तुरंत वापस एवं न्यूज साइड से नही हटाते तो प्रबंधन भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 सहित लागू अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत मानहानि और सख्त कानूनी कार्रवाई की जावेगी ।
* गोविंद शर्मा की रिपोर्ट*
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