बिलासपुर-कोरबा/स्वराज टुडे: बिहार के जमुई कांड ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। हर वर्ग के लोग इस घटना के संबंध में अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और आरोपियों के लिए सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं । हालांकि इस वारदात में शामिल तीन लोगों को हाफ एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया जा चुका है ।
इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली इस घटना को लेकर समाज की प्रबुद्ध महिलाओं ने अपनी प्रतिक्रिया स्वराज टुडे न्यूज़ के साथ साझा की हैं।

शासकीय ई.वि.स्नातकोत्तर महाविद्यालय,कोरबा में पदस्थ असिस्टेंट प्रोफेसर (साइकोलॉजी) डॉ.श्रीमती अवंतिका कौशिल ने कहा कि वर्तमान समय में इस तरह की घटनाओं के लिए किसी को दोष देने के पूर्व हमें अपनी ज़िम्मेदारियों को समझना होगा। अगर हम सब अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से पालन करें तो इस प्रकार की घटनाओं को रोक सकते है । बेटियों को पढ़ाना और स्वतंत्रता देना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन उसके पूर्व उन्हें उनकी मर्यादा और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना भी सीखाना होगा । माता पिता को भी ध्यान रखना होगा कि उनकी बेटियां कब, कहाँ और किसके साथ जा रही है। नियत समय पर घर क्यो नहीं पहुची।
प्रशासन की जिम्मेदारी ये है कि वो कोचिंग सेंटर के आसपास और सभी जगह असामाजिक तत्वों के जमावड़े पर निगरानी रखें ताकि इस तरह की घटनाओं पर विराम लगे । अपनी बेटियों को सुरक्षित और समय पर घर पहुँचने की हिदायत के साथ यह भी सीखाना होगा कि यदि कोई विषम परिस्थिति आ जाए तो पुलिस प्रशासन को मदद के लिए तत्काल कैसे बुलाएं । बेटियों को अपनी सुरक्षा के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग अवश्य लेनी चाहिए । माता पिता को भी अपनी बबेटियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मज़बूत बनाना चाहिए ताकि वो किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए स्वयं तैयार रहें ।

पूर्व प्राचार्या, साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ स्वाति जाजू ने कहा कि ऐसी घटनाएं हमें सतर्क करती है कि वर्तमान परिवेश में हम अपनी सुरक्षा का ध्यान कैसे रखें। महिला सुरक्षा कानून सख्त बनाए जाने के बावजूद छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की घटनाएं कम होने की बजाए बढ़ती ही जा रही है। महिलाओं की सुरक्षा जरूरी है पर एक आम आदमी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। कुछ समाज के ठेकेदार अपने बच्चों को खुली छूट देते है । उन्हें सुधारने की बजाय उनकी हर अनैतिक गतिविधियों पर पर्दा डालने का काम करते हैं। परिणाम स्वरूप ऐसी घटनाएं सामने आती हैं क्योंकि उनमें कानून का कोई भय नहीं होता। समाज में खुलेआम अनैतिक कार्य हो रहे हैं। ये सब जानकर भी लोग विरोध नहीं करते क्योंकि सबको अपने परिवार की चिंता रहती है। पर हमारा समाज किस ओर जा रहा है इसे गंभीरता से विचार करने की जरूरत है । साथ ही पुलिस को असामाजिक तत्वों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई करना चाहिए ताकि समाज में लॉ एंड आर्डर की व्यवस्था बनी रहे और लोग खुद को सुरक्षित महसूस करें।
नजर के सामने घटते अपराध को मौन रहकर आखिर कब तक देखा जा सकता ? समाज की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अपराध सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कठोर एवं प्रभावी दंड मिलना चाहिए, ताकि कानून का भय और समाज में जागरूकता दोनों कायम रहें।

जमुई की घटना पर उत्कर्ष शिक्षा महाविद्यालय, सरखों की प्राचार्या डॉ. सुषमा पांडेय ने गहरी चिंता जताई है । उन्होंने कहा कि किसी महिला के साथ होने वाला अन्याय केवल एक घटना नहीं, बल्कि उसके आत्मसम्मान और जीवन पर गहरा आघात होता है। “जिस महिला ने पीड़ा सही है, उसे सवालों के कटघरे में खड़ा करने के बजाय उसके साथ संवेदना और सम्मान के साथ खड़ा होना हमारा पहला दायित्व है।” डॉ. पांडेय ने संबंधित मामले में निष्पक्ष जांच, पीड़िता की सुरक्षा तथा न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि किसी भी महिला को भय, सामाजिक दबाव या बदनामी के कारण अपनी आवाज दबाने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “महिला की पीड़ा को सुनना ही संवेदनशील समाज की पहली पहचान है।”

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श्रीमती रश्मि शर्मा ने कहा कि बिहार के जमुई से बेहद शर्मनाक वाकया सामने आया है । यह तो इक्के दुक्के केस हैं जो सामने आ जाते हैं वरना कितनी बातें तो दब जाती है या दबा दी जाती है किसी एक ने ऐसी घटना को अंजाम दिया तो उसके साथ ऐसी सख्त कार्रवाई हो जिसे देख और सुनकर दोबारा ऐसी हिमाकत करने की कोई सोच भी ना सके । कानून के ढीलेपन के कारण आवारा लड़कों की दबंगई बढ़ गयी है।
संस्कार और परवरिश भी बहुत मायने रखती है। माता पिता को चाहिए कि बेटियों के साथ बेटों को भी संस्कार दें । यदि जमुई कांड के आरोपियों को उनके माता पिता ने संस्कार दिया होता तो वे उस नाबालिग छात्रा के साथ बदसलूकी ना करते बल्कि उसे सकुशल उसके घर पहुंचाते और उसके माता-पिता को आगाह करते कि अपनी बेटी को संभालो। वीराने में लड़के के साथ घूम रही थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं ।
मां बाप को चाहिए कि अपनी बेटी की ऐसी परवरिश करें जिसमें उनमें मर्यादा, शालीनता और शक्ति संपन्न योग्यता हो ताकि ऐसी वारदातों में मुंह तोड़ जवाब दे सके। आज आत्मरक्षा के गुर सीखना हर एक बेटी के लिए आवश्यक हो गया है। बॉडीगार्ड बनकर पुलिस ना तो प्रत्येक महिलाओं को सुरक्षा प्रदान कर सकती है और ना ही घर के बड़े बुजुर्ग हर समय घर की बेटियों के साथ रहकर उन्हें असामाजिक तत्वों से सुरक्षा दे सकते हैं।
बेटियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश ये है कि वे शालीन कपड़े पहनें। कहीं भी आना जाना करें तो अपने पालकों को सूचित करके जाएं कि वे कहां और किसके साथ जा रही हैं और कब तक लौटेंगी। अगर बेटियां अपनी मर्यादा में रहें तो काफी हद तक ऐसी घटनाओं को टाला जा सकता है। जमुई की घटना में अगर नाबालिग पीड़िता अपने दोस्त के साथ रात में सुनसान इलाके में वक्त गुजारने नहीं जाती तो तो ये घटना नहीं हुई होती । पढ़ाई लिखाई कर अपना कैरियर बनाने की उम्र में बॉयफ्रेंड – गर्लफ्रैंड बनाने का कल्चर समाज को विकास नहीं बल्कि बर्बादी की ओर ले जा रहा है।
चारों ओर विकारों की ऐसी आंधी चल रही है, जहां 5 वर्ष की नन्ही बच्ची में भी कुत्तों को औरत नजर आ जाती है। उसे भी लहू लुहान कर फेंक देते हैं। सर से पैर तक बुर्के में ढका हुआ शरीर भी सुरक्षित रहे इसकी कोई गारंटी नहीं।
ऐसे समय में लड़कियों को अपनी मर्यादा खुद तय करनी होगी । मुझे कब जाना है कहां जाना है किसके साथ जाना है । इन सब की भी मर्यादा होनी चाहिए परंतु घोर कलयुग का समय चल रहा है। सारे रिश्ते सारी मर्यादाएं तार तार हो रही हैं। ऐसे में किसी को दोष देने के बजाय लड़कियां स्वयं में वह शक्ति व गुण को धारण करें कि कोई उनकी तरफ बुरी नजर डाल ही ना सके।
शास्त्रों में दिखाया गया है ना कि सीता ने मर्यादा लांघी, लक्ष्मण रेखा पार की तभी रावण उसका हरण करने में सफल हुआ। मर्यादा हमारी सुरक्षा के लिए है, यह बात बेटियों की समझ में आनी चाहिए । वो कई बार लड़कियां बहस करती हैं कि लोग लड़कों को क्यों नहीं समझाते । सारी बंदिशें। हम लड़कियों के लिए ही क्यों है। तो मैं ऐसी लड़कियों को एक संदेश देना चाहूंगी कि हीरे को तिजोरी में बहुत सुंदर सी डिबिया में लाल मखमल के कपड़े के अंदर बहुत सहेज कर रखा जाता है परंतु परंतु लोहा दुकान के बाहर ऐसे ही खुले में पड़ा रहता है। इसलिए बेटियां अपनी उद्दंता को स्वतंत्रता ना समझे। अपनी वैल्यू को समझे कि वह हीरे की तरह नाजुक और बहुत ही वैल्युएबल है इसीलिए माता-पिता उन्हें अनुशासन और मर्यादा में रहने को कहते हैं। अपनी मर्यादा खुद डिसाइड करें और सुरक्षित रहें। दिन हो या रात, सुनसान जगहों पर जाने से बचें और अपनी सुरक्षा का भार स्वयं पर लें, क्योंकि समय ही घोर कलयुग का है चारों तरफ रावण, कंस और दुःशासन अवसर की तलाश बैठे हुए हैं।

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