चंडीगढ़/स्वराज टुडे: परिवार ने बेटे का शव समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया, अंतिम रस्में पूरी कर दीं और उसकी यादों के साथ जिंदगी आगे बढ़ाने लगा। लेकिन करीब 20 दिन बाद जेल से आए एक फोन ने परिवार को ऐसा झटका दिया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
फोन पर बताया गया कि जिस बेटे को वे मृत समझ चुके हैं, वह कपूरथला सेंट्रल जेल में जिंदा बंद है। परिवार जब जेल पहुंचा और बेटे को अपनी आंखों के सामने देखा तो हर कोई हैरान रह गया।
दरअसल, करीब 22 दिन पहले कपूरथला पुलिस को कंजली के पास एक अज्ञात युवक का शव मिला था। इसी दौरान परिवार का एक युवक लापता था। परिवार ने पुलिस को मिले शव की पहचान अपने लापता बेटे के रूप में कर दी। पहचान के बाद पुलिस ने शव परिवार को सौंप दिया।
परिवार ने शव को अपने बेटे का मानकर 13 अगस्त 2026 को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद करीब 20 दिन पहले अंतिम रस्में और भोग भी कर दिया गया। परिवार को पूरी तरह यकीन था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है।
लेकिन अचानक कपूरथला सेंट्रल जेल से परिवार के पास फोन आया। जेल कर्मचारी ने बताया कि उनका बेटा जेल में बंद है और जिंदा है। पहले परिवार को इस बात पर भरोसा नहीं हुआ। उन्हें लगा कि शायद कोई गलतफहमी है। मगर जब वे जेल पहुंचे तो सामने वही युवक मौजूद था, जिसका कुछ दिन पहले अंतिम संस्कार किया जा चुका था।
बेटे को जिंदा देखकर परिवार की खुशी के साथ-साथ कई सवाल भी खड़े हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कंजली के पास मिला वह शव किसका था? परिवार ने जिस शव को अपने बेटे का मानकर अंतिम संस्कार कर दिया, उसकी पहचान में इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई?
पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। DSP शीतल सिंह के मुताबिक, यह पता लगाया जा रहा है कि शव की पहचान में चूक किस स्तर पर हुई। मामले में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब उस शव की भी पहचान कराने में जुटी है, जिसका अंतिम संस्कार परिवार ने अपने बेटे का समझकर कर दिया था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि युवक जेल तक कैसे पहुंचा और उसके परिवार को उसके जेल में होने की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली।
इस घटना ने कपूरथला पुलिस की कार्यप्रणाली और शव की पहचान की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

Editor in Chief















