कोलकाता/स्वराज टुडे : मोमिनपुर में होने वाला कोलकाता का एक प्रमुख जन्माष्टमी उत्सव। इस जन्माष्टमी उत्सव के ज्यादातर आयोजक मुस्लिम रहे हैं और यह शहर की मिली-जुली संस्कृति का एक उदाहरण है। इस बार यह जन्माष्टमी उत्सव सिर्फ हिंदुओं का कार्यक्रम बनने जा रहा है।
इस उत्सव की शुरुआत ही एक मुस्लिम शख्स ने की थी। यह पहली बार है जब मुसलमानों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। राकेश सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि इस साल उत्सव का आयोजन सिर्फ हिंदू करेंगे क्योंकि जन्माष्टमी एक हिंदू त्योहार है। राजेश सिंह पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से इस बार बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए।
राजेश सिंह कभी खुद कांग्रेस का पदाधिकारी मानते थे। वह इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (कांग्रेस से जुड़ी संस्था) के हिस्से के तौर पर अलीपुर चिड़ियाघर की लेबर यूनियन को संभालते थे। उन्होंने कहा कि वह विश्व हिंदू परिषद की इस विचारधारा में विश्वास करते हैं।
ममता बनर्जी के धर्म पर दिए बयान पर साधा निशाना
राजेश सिंह ने कहा कि धर्म व्यक्ति का होता है और त्योहार भी उन्हीं व्यक्तियों के होते हैं। उन्होंने पूर्व सीएम ममता बनर्जी के अक्सर दोहराए जाने वाले बयान की आलोचना की कि धर्म व्यक्ति का होता है लेकिन त्योहार सबके होते हैं। कोलकाता नगर निगम के वार्ड 79 में भुकाइलाश रोड-हुसैन शाह रोड क्रॉसिंग पर होने वाला यह जन्माष्टमी कार्यक्रम पोर्ट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
शुभेंदु अधिकारी के भवानीपुर से लगा इलाका
मोमिनपुर का इलाका शुभेंदु अधिकारी और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र की सीमा से लगा है। यहां होने वाला जन्माष्टमी उत्सव इस बार अपने 58वें साल में प्रवेश कर रहा है। इसके प्रमुख संरक्षकों में शहर के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम और वरिष्ठ तृणमूल पदाधिकारी मोहम्मद आलम और सेराजुल करीम शामिल रहे हैं।
विश्व हिंदी परिषद के बयान के बाद हुआ घटनाक्रम
राजेश सिंह का उत्सव को अपने हाथ में लेना VHP द्वारा शहर के दुर्गा पूजा आयोजकों को बंगाल के सबसे बड़े त्योहार को आयोजित करने के तरीके के बारे में संबोधित करने के लगभग एक हफ्ते बाद हुआ है। बताई गई बातों में यह शामिल था कि देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए और पंडालों का डिजाइन हिंदू संस्कृति और विरासत को बनाए रखने वाला होना चाहिए। VHP ने पूजा आयोजकों से आध्यात्मिक पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने की जरूरत का हवाला देते हुए मुख्य पंडाल क्षेत्र के अंदर मांसाहारी भोजन पर सख्ती से रोक लगाने को भी कहा।
क्या दूसरे धर्म के लोगों को पंडाल में जाने की होगी अनुमति ?
राजेश सिंह ने कहा कि वह जन्माष्टमी आयोजन समिति का अध्यक्ष और चेयरपर्सन हैं। उन्होंने कहा कि हम अपनी पारंपरिक संस्कृति का अपमान नहीं कर सकते। दूसरे धर्मों के लोगों को निश्चित रूप से पंडालों में आना चाहिए, लेकिन अपनी धार्मिक गतिविधियों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। जन्माष्टमी एक हिंदू त्योहार है और इसे केवल हिंदुओं द्वारा ही मनाया जाना चाहिए।
मोहम्मद काशिम ने की थी जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत
स्थानीय लोगों के अनुसार, किडरपोर समाज कल्याण समिति की ओर से आयोजित होने वाले जन्माष्टमी कार्यक्रम की शुरुआत लगभग छह दशक पहले एक मुस्लिम समाज सेवक, मोहम्मद काशिम ने की थी। लेकिन समय के साथ यह आयोजन फीका पड़ गया, जब तक कि 2011 में तृणमूल के सत्ता में आने के बाद मुस्लिम युवाओं के एक समूह ने इसे फिर से शुरू नहीं किया। तृणमूल के पदाधिकारी और आयोजन समिति के पूर्व सदस्य मोहम्मद आलम ने कहा कि 2011 से हम यहां जन्माष्टमी का आयोजन कर रहे हैं। आयोजन समिति में लगभग 20 सदस्य थे, जिनमें से आधे मुस्लिम थे। हम सब मिलकर यह कार्यक्रम मनाते थे, प्रसाद बांटते थे और सभी रीति-रिवाजों का पालन सुनिश्चित करते थे। लेकिन इस साल, समिति से सभी मुस्लिम सदस्यों को बाहर रखा गया है।
केसरिया और सफेद रंग का बन रहा पंडाल
बता दें कि कार्यक्रम स्थल पर केसरिया और सफेद रंग का एक बड़ा पंडाल बनाया जा रहा था। पंडाल के निर्माण की देखरेख कर रहे एक आयोजक ने कहा कि पिछले साल तक यहां जन्माष्टमी का आयोजन मुस्लिम समुदाय के लोग करते थे। लेकिन इस साल, इसे पूरी तरह से हिंदू समुदाय के लोग ही आयोजित और प्रबंधित करेंगे। यह एक तरह की ‘सफाई’ प्रकिया जैसा है।
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