दिल्ली/स्वराज टुडे: सिंधु घाटी सभ्यता के धीरे-धीरे खत्म होने का एक बड़ा कारण लगातार पड़े भयंकर सूखे की एक श्रृंखला हो सकती है जो 85 साल से भी ज्यादा समय तक चली. यह एक चौंकाने वाली लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई बात है.
यह खोज कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट नाम की पत्रिका में छपे एक रिसर्च में सामने आई है. इस रिसर्च ने अब तक का सबसे मजबूत सबूत दिया है कि यह महान सभ्यता अचानक खत्म नहीं हुई बल्कि यह सदियों तक धीरे-धीरे कमजोर होती गई और लुप्त हो गई.
कितनी पुरानी है ये सभ्यता?
Indus Valley Civilization आज के उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान में 5,000 से 3,500 साल पहले थी. इस सभ्यता को मुख्य रूप से इसके शहरों को व्यवस्थित बनाने और जल प्रबंधन के एडवांस तरीके के लिए जाना जाता है. पहले की रिपोर्टों में बताया गया है कि इनके शहरों में पानी की सप्लाई के लिए शानदार नालियां और पानी के बड़े भंडार बने हुए थे.
क्या थी ये स्टडी?
5,000 से 3,000 साल पहले इस इलाके में मौसम कैसा था यह जानने के लिए उन्होंने कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया. उन्होंने इस मॉडल को असली सबूतों के साथ मिलाया जिसमें भारत की 2 गुफाओं से मिले स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स की जांच की. उत्तर-पश्चिम भारत की 4 झीलों में पानी का स्तर समय के साथ कैसे बदला इसका रिकॉर्ड देखा.
जांच में क्या सामने आया?
उस समय के दौरान गर्मी 0.56 डिग्री बढ़ गई और हर साल होने वाले बारिश 10 से 20 प्रतिशत कम हो गई. 4,450 से 3,400 साल पहले के बीच चार बार बहुत लंबे समय तक सूखे पड़े. हर सूखा 85 साल से भी ज्यादा समय तक चलता रहा. इन सूखे ने सिंधु घाटी सभ्यता के 65 से 91% बड़े हिस्सों को प्रभावित किया. नतीजतन, हालात इतने खराब हो गए कि विकसित और उन्नत शहरी समाज भी इनसे संभल नहीं पाए और धीरे-धीरे खत्म होने लगे.
अध्ययन में क्या बताया गया?
इस अध्ययन में बताया गया कि इन लंबे सूखे के कारण लोगों के रहने की जगह पर क्या असर पड़ा. सिंधु घाटी के सभ्यता के लोग ज्यादा बारिश वाले इलाकों में रहते थे. सूखे के कारण लोगों ने अपनी जगह बदलनी शुरू कर दी. समुदाय सिंधु नदी के और करीब जाने लगे. ऐसा इसलिए क्योंकि बारिश पर आधारित पानी के सोर्स अब भरोसेमंद नहीं रहे. इसलिए वो शायद हमेशा बहने वाले पानी पर ज्यादा निर्भर हो गए.
कहीं और भी था ये बदलाव?
लोगों के रहने की जगह में आया यह बदलाव धोलावीरा जैसी जगहों पर भी दिखता है. वैज्ञानिकों ने धोलावीरे में पानी जमा करने का दुनिया का सबसे पुराना और बेहतरनी तरीका खोजा है. यह हड़प्पा सभ्यता की इंजीनियरिंग का एक और बड़ा उदाहरण है. जो सबसे आखिरी सूखा पाया गया वह 113 साल तक चला था जिसका समय 3,531 से 3,418 साल पहले के बीच था. यह सूखा ठीक उसी समय पड़ा जब शहरों के कमजोर पड़ने और खत्म होने के पुराने सबूत मिलते हैं.
कैसे हुआ सभ्यता का अंत?
लेखकों ने बताया कि सिंधु घाटी सभ्यता का अंत किसी एक बड़ी और अचानक घटना से नहीं बल्कि यह सभ्यता धीरे-धीरे कमजोर होती गई और इसी धीमी गिरावट के कारण अंत हुआ. इस गिरावट में लंबे समय तक पड़े सूखे ने सबसे अहम भूमिका निभाई. ये नतीजे बताते हैं कि पर्यावरण में बदलाव सबसे मजबूत समाजों को भी बदल सकता है. लेकिन यह बगलाव अचानक तबाही से नहीं बल्कि धीरे-धीरे उन चीजों को खत्म करके होता है जो समाज को सहारा देती हैं.
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