बिलासपुर/स्वराज टुडे: आज हम एक ऐसे भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले हैं, जिसे सुनकर इंसान ही नहीं सांप भी हैरान रह जाएंगे. आज सांपों को भी एहसास हो जाएगा कि उनके जहर से ज्यादा जहरीला इंसानों के भीतर भ्रष्टाचार का जहर है.
छत्तीसगढ़ में एक सरकारी नियम है. नियम ये है कि अगर किसी व्यक्ति की सर्पदंश यानी सांप के काटने से मौत हो जाती है, तो सरकार आपदा कोष से मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देती है.
सरकार ने ये नियम इसलिए बनाया था ताकि गरीब परिवारों को संकट के समय आर्थिक मदद मिल सके. लेकिन बिलासपुर में इस आपदा को भ्रष्टाचार का अवसर बना लिया गया. ये सर्पदंश घोटाला कितना बड़ा है आपको इसके कुछ आंकड़े देखने चाहिए.
पिछले 3 साल में छत्तीसगढ़ की राजधानी बिलासपुर में 431 ऐसे मामले सामने आए हैं. जिनमें मौत की वजह को कुछ थी लेकिन उसे सर्पदंश दिखा दिया गया. इस पूरे खेल में 17 करोड़ 24 लाख रुपये का सरकारी मुआवजा निकाल लिया गया.
मौत की वजह केवल सर्पदंश कैसे?
मौत की वजह चाहे एक्सीडेंट हो या हार्ट अटैक, फाइलों में सांप को दोषी दिखाया जाता था. अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये खेल इतने सालों से चल कैसे रहा था. भ्रष्टाचार के इस मॉडल का खुलासा होने में सालों क्यों लग गए, तो आपको जानना चाहिए कि इसमें खाकी वर्दी से लेकर सफेद कोट और काले कोट वालों का पूरा नेक्सस काम करता था. जिसे नाम दिया गया था डायमंड गैंग.
भ्रष्टाचार का पहला स्टेप था मुखबिरी
बिलासपुर के CIMS अस्पताल में जैसे ही किसी मरीज की मौत होती थी, वहां तैनात पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवान इसकी सूचना तुरंत एडवोकेट हीरा खांडेकर को देते थे. हीरा खांडेकर ही डायमंड गैंग का मास्टरमाइंड था.
कैसे पीड़ित के परिवार को दिया जाता था लालच
गैंग का डायमंड यानी हीरा खांडेकर मृतक के परिवार वालों के पास पहुंचता था. परिवार को पैसों का लालच देकर परिवार को इस भ्रष्टाचार का हिस्सा बनाया जाता था. इसके बाद एंट्री होती थी डॉक्टरों की. डेड बॉडी पर सांप के दांतों के निशान बनाए जाते थे. डॉक्टर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाते थे, जिसमें मौत की वजह सर्पदंश लिखी जाती थी.
इसके बाद तहसील कार्यालय में तैनात कर्मचारी गोविंद विश्वकर्मा एक से डेढ़ लाख रुपये घूस लेकर इस केस को आगे बढ़ाता था और जब मुआवजा आता था तो परिवार को डायमंड गैंग के बीच पैसों का बंदरबांट हो जाता था. सांपों पर दोष मढ़कर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले इस खेल का खुलासा तब हुआ जब एक मृतक के परिजन सामने आए.
जांच के बाद 17 लोगों की गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस 14 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. एक महिला डॉक्टर को फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस गैंग से जुड़े कई डॉक्टर फरार हैं. तत्कालीन प्रभारी और कुछ पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवानों को गिरफ्तार किया गया है. मास्टरमाइंड हीरा खांडेकर और तहसील के 3 कर्मचारी भी गिरफ्तार हो चुके हैं.
इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला घोटाला
प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर में सामने आया ये सर्पदंश घोटाला इंसानियत को शर्मसार करने वाला घोटाला है, क्योंकि जितने कसूरवार इसमें शामिल वकील, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील ऑफिस के कर्मचारी हैं. उतने ही गुनहगार वो परिवार भी हैं, जिन्होंने चंद पैसों की लालच में अपने ही परिवार के मृत व्यक्ति के शव का सौदा कर दिया.
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