छत्तीसगढ़
बिलासपुर/स्वराज टुडे: तृतीय राष्ट्रीय पत्रकार अधिवेशन में शिक्षाविद्, लेखिका एवं प्राचार्य डॉ. स्वाति जाजू की हिंदी पुस्तक ‘शांति शिक्षा’ और अंग्रेजी पुस्तक ‘Peace Education’ का गरिमापूर्ण विमोचन किया गया। इस अवसर पर डॉ. स्वाति जाजू को सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम अधिवेशन का प्रमुख आकर्षण रहा।
पुस्तकों के विमोचन के उपरांत डॉ. स्वाति जाजू ने दोनों पुस्तकों की विषयवस्तु एवं उनके शैक्षिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये पुस्तकें विशेष रूप से भावी शिक्षकों के लिए उपयोगी हैं। इनका उद्देश्य शिक्षक-प्रशिक्षण के माध्यम से शांति, मानवता, मानवीय मूल्यों, अहिंसा, सहिष्णुता एवं सामाजिक सद्भावना की भावना को प्रोत्साहित करना है।
डॉ. जाजू ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं, सह-अस्तित्व एवं शांतिपूर्ण से व्यवहार का विकास करना भी है। शांति शिक्षा के माध्यम से भावी शिक्षकों को इन मूल्यों के प्रति जागरूक बनाकर विद्यालयों में सकारात्मक, समावेशी एवं शांतिपूर्ण शैक्षिक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य के निर्माता होते हैं। यदि शिक्षक स्वयं शांति, अहिंसा, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों को अपने व्यवहार में अपनाते हैं, तो वे विद्यार्थियों में भी इन गुणों का विकास कर सकते हैं। इस दृष्टि से ‘शांति शिक्षा’ एवं ‘Peace Education’ पुस्तकें भावी शिक्षक-निर्माण तथा शिक्षा के माध्यम से शांतिपूर्ण समाज की स्थापना की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डॉ. स्वाति जाजू ने पुस्तकों के विमोचन एवं सम्मान के लिए मुख्य आयोजक तथा तृतीय राष्ट्रीय पत्रकार अधिवेशन के समस्त आयोजनकर्ताओं के प्रति हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षा, साहित्य एवं मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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