मध्यप्रदेश
रायसेन/स्वराज टुडे: आशापुर ग्राम, जिला रायसेन मध्यप्रदेश में भोपाल से लगभग 35 किमी और भोजपुर से 5 किमी. दूर विदिशा मार्ग पर स्थित है। आशापुरी में परमारकालीन में गांव के बाहर तालाब किनारे 26 शिव मंदिर, आशापुरी देवी मंदिर, विष्णु मंदिर और हजारों कलात्मक पत्थर बिखरे पड़े हैं। इस गांव के बाहर परमार कालीन जैन मंदिरों के अवशेष 10- 11वीं सदी के उपलब्ध हैं। ‘सतमासिया’ जैन मंदिरों का समूह इस गांव में विद्यमान है। इस दो एकड़ के परिसर को पुरातत्त्व विभाग द्वारा चहार दीवारी बनवाकर संरक्षित किया गया है । इसके अतिरिक्त यहां एक राजकीय संग्रहालय भी है। इसमें अन्य प्रतिमाओं के अतिरिक्त अनेक जैन पुरातात्त्विक प्रतिमाएं संरक्षित है। प्रस्तुत है उन्हीं में से कुछ विशिष्ट जैन प्रतमाओं का संक्षिप्त परिचय। यहां संग्रहालय की प्रतिमाओं को साभार लिया गया है-
1. शिर रहित आदि जिन प्रतिमा प्रथम-
इस पद्मासन प्रतिमा के स्कंधों पर केश लटिकाएं हैं, जिससे यह आदि जिन की प्रतिमा प्रतीत होती है। इसके पादपीठ में चिह्न के स्थान पर शुभंकर कीर्तिमुख है। दोनों ओर विरुद्धाभिमुख सिंहासन के सिंह हैं, उनके भी वाह्य भाग में यक्ष-यक्षी उत्कीर्णित हैं। जिन के दोनों पार्श्वों में चामरधारी देव हैं। शिर सहित ऊपर वितान भाग खण्डित व अप्राप्त है।
2. शिर रहित तीर्थंकर जिन प्रतिमा-
यहां के संग्रह में शिरविहीन द्वितीय प्रतिमा है। यह भी पद्मासन मुद्रा में है। इसका शिल्पन सामान्य है, परिकर नहीं है।
3. त्रितीर्थी तीर्थंकर प्रतिमा प्रथम-
327 संख्या पर परिगृहीत इस प्रतिमा के परिकर में दो अन्य लघु जिन शिल्पित हैं, अतः यह त्रितीर्थी प्रतिमा है। अन्य परिकर- चामरधारी, माल्यवाहक व अभिषेक लक्ष्मी के गज उत्कीर्णित हैं।
4. त्रितीर्थी तीर्थंकर प्रतिमा द्वितीय-
इसका शिल्पन उक्त प्रथम त्रितीर्थी प्रतिमा के समान है। इसके पादपीठ में चिह्न के स्थान पर शुभंकर कीर्तिमुख है। विशेषता यह है कि चामरधारियों के पार्श्व में द्विभंगसन में खड़े यक्ष-यक्षी शिल्पित हैं। प्रायः ये ललितासन में बैठे हुए शिल्पित किये जाने की परम्परा है।
5. पार्श्वजिन प्रतिमा-
लघुशिखर युक्त इस प्रतिमा का शिर सप्तफणों से आच्छादित है, अतः यह पार्श्वजिन की प्रतिमा है।
6. एकल तीर्थंकर कायोत्सर्गस्थ-
यह सुन्दर और विशाल प्रतिमा है। इसके परिकर में चामरधारी व प्रभावल शिल्पित है। दोनों हाथ भग्न हैं।
7. जैन शासन देव-देवी प्रतिमा-
यह जैन शासन देव-देवी अत्यन्त सुन्दर रही होगी। इसके वितान मंे पांच लघु जिन तीर्थंकर प्रतिमाएं उत्कीर्णित हैं। मध्य में कीर्तिमुख शिल्पित है। दोनों पशर््ंकासन में बैठे हैं।
-डॉ महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर
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