छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास के द्वारा लोक साहित्य पर केंद्रित प्राक़ लोकमंथन 2026 ‘हम भारत के लोग’ कार्यक्रम विवेकानंद सेवा सदन, कोरबा में किया गया। छत्तीसगढ़ी लोकगीत और साहित्य पर यहां प्रस्तुति हुई। राजस्थान के जयपुर में 4 से 6 दिसंबर को होने वाले मुख्य समारोह मंथन में देश के विभिन्न राज्यों के कलाकार शामिल होंगे।
मुख्य वक्ता योगेश साहू, सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि लोक को आधार मानते हुए यह आयोजन यहां पर हुआ है। व्यापक दृष्टिकोण के साथ संगीत, साहित्य और लोगों को जोड़ने के लिए इस तरह की कोशिश हुई है। उन्होंने विवेकानंद के विदेश से जुड़े प्रसंग के माध्यम से अपने विचार को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोक जीवन को प्रभावित करने के लिए साहित्य और संगीत की अपनी विशेष भूमिका होती है और इसलिए लंबे समय के बाद भी इनका हर जगह अपना विशेष महत्व बना हुआ है। अखिल भारतीय स्तर पर किए जा रहे इन प्रयासों को मुख्य वक्ता ने सराहा। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार गेंदालाल शुक्ला कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने विश्लेषणात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि से इस अपने विचार रखे और स्पष्ट किया की लोकगीत और स्वरचित गीतों के बीच बुनियादी अंतर होता है। छत्तीसगढ़ में लोकगीतों की पहचान उसकी विषय वस्तु और विभिन्न आयाम से होती रही है। इस प्रकार के गीत बहुत लंबे समय से प्रचलन में है और जो अपना विशेष प्रभाव छोड़ते हैं। जबकि स्वरचित गीतों की अवधि कुछ समय पहले की है। उन्होंने कुछ वर्ष पहले तैयार किए गए राज्य गीत को लेकर भी अपना मनतव्य रखा।

शासकीय महाविद्यालय नवागढ़ के प्राचार्य भूपेंद्र कुमार पटेल ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपनी बात रखी और इस लोक साहित्य और संगीत से संबंधित इस खास आयोजन की सराहना की। आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों के द्वारा लोक संगीत की शानदार प्रस्तुति की गई। स्थानीय साहित्यकारों ने रचना पढ़ी। कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के मार्गदर्शक डॉक्टर देवदास साकेत ने अतिथियों का शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन अजय दास वैष्णव, संयोजक ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक तिवारी, प्राचार्य मृगेश यादव, गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर पापिया चतुर्वेदी, ब्लॉक एजुकेशन ऑफीसर जितेंद्र साहू, कार्यक्रम की योजना से जुड़े कैलाश नाहक, चंद्र किशोर श्रीवास्तव, उत्तम पाठक, अखिलेशमणि तिवारी, रामकिशोर श्रीवास्तव, नंदन मुखर्जी, भानू साहू , दिलीप चतुर्वेदी, रजनी चौहान, कृष्ण कुमार चंद्र, मुकेश अग्रवाल, और अन्य सहयोगियों की उपस्थिति रही।
Box विविधता में एकता दिखाने का प्रयास
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के लोक साहित्य आयाम के मार्गदर्शक डॉ देवदास साकेत ने बताया कि लोकमंथन का राष्ट्रीय कार्यक्रम जयपुर में दिसंबर को किया जा रहा है। इससे ठीक पहले छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में प्राक लोक मंथन की गतिविधियों की जा रही है । वसूधेव कुटुंबकम की भावना को मजबूत करने के लिए राज्यों की बोली, लोक कथा संगीत और साहित्य का अपना योगदान है। इसी श्रृंखला में छत्तीसगढ़ में कार्यक्रम किया। अन्य राज्यों में भी ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं। हमारा मानना है कि और लोक साहित्य में हर क्षेत्र की आत्मा शामिल होती है और इसके माध्यम से उसके भाव का प्रकृटीकरण होता है।
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