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    Home»Featured»जंगलों का मौन प्रहरी: मॉटल्ड वुड आउल पारिस्थितिकी तंत्र का अनदेखा रक्षक, उपचार के बाद मिली नई ज़िंदगी
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    जंगलों का मौन प्रहरी: मॉटल्ड वुड आउल पारिस्थितिकी तंत्र का अनदेखा रक्षक, उपचार के बाद मिली नई ज़िंदगी

    Deepak SahuBy Deepak SahuJuly 8, 2026
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    छत्तीसगढ़
    कोरबा/स्वराज टुडे:  कोरबा जिला अपने जैव विविधता के लिए जाना जाता हैं । यहां विभिन्न प्रकार के पक्षियों का बसेरा हैं । कई बार ऐसा भी होता हैं कि कुछ पक्षी चोटिल अवस्था में मिलने पर उसके संरक्षण के लिए वन विभाग एवं एनजीओ लगातार प्रयास करता हैं । ऐसा ही मामला कुछ दिन पूर्व रजगामार में देखने को मिला जहां रजगामार निवासी होमेश के घर के पास ही कौवों के द्वारा एक उल्लू को जख्मी कर दिया जो चोटिल होने के कारण उड़ पाने में सक्षम नहीं था जिसके बाद कुछ लोगों ने उसको बचाने के उद्देश्य से वन विभाग को सूचना दी । इस पर वन विभाग की रेस्क्यु टीम एवं नोवा नेचर से जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे और उसको सुरक्षित रेस्क्यु कर लाया गया।

    वेटरिनरी डॉक्टर ने घायल उल्लू का किया उपचार

    IMG 20260708 053656प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (छ ग) श्री अरुण पांडे के वन्य जीव संरक्षण की नई दिशा एवं मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर श्री मनोज पाण्डेय, कोरबा वनमण्डलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार एवं उप वनमण्डलाधिकारी दक्षिण सूर्यकांत सोनी एवं उप वनमण्डलाधिकारी उत्तर श्रीराम सिंह राठिया के मार्गदर्शन वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा के नेतृत्व में घायल उल्लू का वेटनरी डॉक्टर अनिकेत ने उपचार चालू किया। उसके घाव की सफाई किया तथा उसका कुछ दिनों तक उसका ड्रेसिंग चलता रहा और प्रति दिन मांस का टुकड़ा खिलाया गया जिसके परिणाम स्वरूप उल्लू पूरी तरह स्वस्थ होने पर वन विभाग के कर्मचारी फॉरेस्ट बिट ऑफिसर कमलेश कुम्हार एवं जितेंद्र सारथी के द्वारा उसको प्राकृतिक रहवास जंगल में पुनः छोड़ दिया गया, यह घटना वन विभाग एवं सामाजिक संस्था के मेहनत को दर्शाता हैं।

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    प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मॉटल्ड वुड आउल की अहम भूमिका 

    घने जंगलों में रात का सन्नाटा अक्सर एक गहरी हूटिंग से टूटता है, यह आवाज़ होती है मॉटल्ड वुड आउल (Strix ocellata) की, जो भारतीय वनों का एक महत्वपूर्ण रात्रिचर शिकारी पक्षी है,अपनी उत्कृष्ट दृष्टि, तीव्र श्रवण क्षमता और लगभग निःशब्द उड़ान के कारण यह प्रकृति के सबसे कुशल शिकारी पक्षियों में गिना जाता है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मॉटल्ड वुड आउल केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण जीव है,यह बड़ी संख्या में चूहों, छिपकलियों, छोटे पक्षियों, मेंढकों तथा अन्य छोटे जीवों का शिकार करता है, जिससे कृषि फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कृंतकों की आबादी नियंत्रित रहती है, इसी कारण इसे किसानों का प्राकृतिक मित्र भी कहा जाता है।

    वन्य जीव संरक्षित प्रजाति है उल्लू

    भारत में यह प्रजाति शुष्क पर्णपाती वनों, पुराने वृक्षों, कृषि क्षेत्रों के आसपास तथा गाँवों के निकट बड़े पेड़ों पर भी देखी जाती है,दिन में यह पेड़ों की घनी शाखाओं में विश्राम करता है और रात होते ही भोजन की तलाश में निकल पड़ता है,
    विशेषज्ञ बताते हैं कि मॉटल्ड वुड आउल की एक विशेषता इसकी लगभग निःशब्द उड़ान है, जिससे यह अपने शिकार के बेहद करीब पहुँच जाता है, इसके द्वारा निकाले जाने वाले “पेललेट” (Pellets) का अध्ययन वैज्ञानिकों को इसके भोजन एवं स्थानीय जैव विविधता को समझने में भी मदद करता है,हालाँकि यह प्रजाति वैश्विक स्तर पर Least Concern (LC) श्रेणी में है, लेकिन भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I (Schedule I) के अंतर्गत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है, इसका शिकार, पकड़ना या व्यापार करना कानूनन दंडनीय अपराध है,पुराने वृक्षों की कटाई, प्राकृतिक आवासों का विनाश, अंधविश्वास के कारण अवैध शिकार तथा कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग इस प्रजाति के लिए प्रमुख खतरे हैं,यदि इनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखे जाएँ और लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए, तो इस महत्वपूर्ण पक्षी का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मॉटल्ड वुड आउल जैसे रात्रिचर पक्षियों का संरक्षण केवल एक प्रजाति की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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    Deepak Sahu

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