पोषण गुणवत्ता, विशिष्ट सुगंध और प्रीमियम बाजार की संभावनाओं वाली पारंपरिक धान किस्म को किसानों तक पहुंचाने में जुटे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल
कोरबा/स्वराज टुडे: किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा गुणवत्तापूर्ण सुगंधित धान की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोरबा जिले में काला नमक धान की प्रायोगिक खेती शुरू की गई है। कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री संजय पटेल ने उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित Participatory Rural Development Foundation (PRDF) के प्रमुख श्री रामचेत चौधरी से संपर्क कर इस प्रसिद्ध पारंपरिक धान किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराए हैं।

काला नमक धान उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर एवं आसपास के तराई क्षेत्र की प्रसिद्ध पारंपरिक किस्म है। इसकी गहरे रंग की भूसी, सफेद चावल, विशिष्ट सुगंध और स्वाद इसे विशेष पहचान प्रदान करते हैं। सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन के अनुसार, इस चावल में प्रोटीन, आयरन एवं जिंक सहित अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं।
काला नमक एवं बासमती चावल के पोषक तत्वों की तुलनात्मक सूची
पोषक तत्व एवं विशेषता| काला नमक चावल| बासमती चावल
ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI)| लगभग 49–52; कम GI श्रेणी में| लगभग 71–77; मध्यम से उच्च GI श्रेणी में
आयरन (लौह तत्व)| लगभग 3.1 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम| लगभग 0.4–0.5 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम
प्रोटीन| सामान्यतः अधिक; पॉलिशिंग स्तर और किस्म के अनुसार लगभग 8–16 ग्राम प्रति 100 ग्राम| सामान्यतः कम; पॉलिश किए गए रूपों में लगभग 7–8 ग्राम या उससे कम
भूसी एवं मिलिंग| कम तापमान पर मिलिंग से पोषक तत्वों से भरपूर एल्यूरोन परत का अधिक संरक्षण| सामान्यतः अधिक पॉलिश किया जाता है

सूक्ष्म पोषक तत्व| जिंक, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम का अपेक्षाकृत अधिक स्तर| पॉलिशिंग प्रक्रिया के कारण मात्रा अपेक्षाकृत कम हो सकती है
दाना एवं सुगंध| छोटे से मध्यम आकार का दाना, गहरे या काले रंग की भूसी तथा मिट्टी जैसी हल्की अखरोटी सुगंध| लंबे, पतले दाने तथा हल्की पुष्पीय-अखरोटी सुगंध
सुगंध एवं स्वाद| विशिष्ट पारंपरिक सुगंध और गहरा, मिट्टी जैसा हल्का मीठा स्वाद| लंबे दाने और विशिष्ट सुगंध
पाक उपयोग| पारंपरिक क्षेत्रीय व्यंजनों और स्वाद-प्रधान पकवानों के लिए उपयोगी| बिरयानी, पुलाव और अलग-अलग खिले दानों वाले व्यंजनों के लिए लोकप्रिय
बाजार में पहचान| पारंपरिक एवं विशिष्ट प्रीमियम चावल| स्थापित घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजार
नोट: पोषण संबंधी आंकड़े विभिन्न किस्मों, पॉलिशिंग स्तर, मिलिंग प्रक्रिया और परीक्षण पद्धतियों के अनुसार बदल सकते हैं। GI पकाने की विधि और परोसने की स्थिति से भी प्रभावित होता है। उपर्युक्त तालिका सामान्य उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है, समान परिस्थितियों में किए गए प्रयोगशाला परीक्षण का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं। विशेष रूप से प्रोटीन, आयरन, जिंक तथा GI की सटीक तुलना के लिए दोनों चावलों की प्रमाणित रिपोर्ट आवश्यक है।
कम GI और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए संभावनाएं

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) किसी खाद्य पदार्थ के कार्बोहाइड्रेट से रक्त शर्करा के स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने का एक माप है। अपेक्षाकृत कम GI वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों के लिए संतुलित आहार का उपयोगी हिस्सा हो सकते हैं। उपलब्ध तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, काला नमक चावल का GI लगभग 49–52 बताया जाता है, जबकि सामान्य पॉलिश किए गए बासमती चावल का GI लगभग 71–77 हो सकता है। हालांकि, वास्तविक मान किस्म, पॉलिशिंग, पकाने की विधि और सेवन की मात्रा के अनुसार बदल सकता है।
इस कारण काला नमक चावल उन उपभोक्ताओं के लिए एक संभावित विकल्प हो सकता है, जो अपने भोजन की गुणवत्ता और रक्त शर्करा प्रबंधन पर ध्यान देते हैं। हालांकि, इसे शुगर-फ्री चावल या मधुमेह का उपचार नहीं माना जाना चाहिए। मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को सेवन की मात्रा के लिए चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
रुमगरा एवं रिस्दी में शुरू हुआ प्रायोगिक प्रदर्शन
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री संजय पटेल की पहल पर कोरबा जिले के ग्राम रुमगरा एवं ग्राम रिस्दी में काला नमक धान की प्रायोगिक खेती की जा रही है। ग्राम रुमगरा के किसान श्री विजय सिंह कंवर एवं श्री शिवकुमार कंवर तथा ग्राम रिस्दी के किसान श्री संजय कंवर इस पहल से जुड़े हैं।
इस प्रयोग के माध्यम से स्थानीय मिट्टी एवं जलवायु में धान की अनुकूलता, उत्पादन क्षमता, सुगंध और गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। परिणाम सकारात्मक रहने पर भविष्य में अन्य किसानों को भी इस किस्म की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
बेहतर बाजार मूल्य से किसानों की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य
काला नमक चावल की बाजार कीमत लगभग ₹300 से ₹400 प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। इसकी विशिष्ट सुगंध, पारंपरिक पहचान और प्रीमियम बाजार की संभावनाएं किसानों को कृषि विविधीकरण का अवसर प्रदान कर सकती हैं। वास्तविक लाभ उत्पादन लागत, उपज, गुणवत्ता और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।
श्री संजय पटेल की यह पहल पारंपरिक सुगंधित धान किस्मों को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती की संभावनाओं का विस्तार करने तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन के माध्यम से बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
काला नमक धान की प्रायोगिक खेती सफल होने पर कोरबा जिले के किसानों के लिए पारंपरिक खेती के साथ उच्च गुणवत्ता वाले सुगंधित चावल के उत्पादन का एक नया अवसर विकसित हो सकता है।

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