● गरीबी ने रोका अंतिम संस्कार: 3 दिनों तक पति के शव के पास बैठी रही बेबस पत्नी
● कैंसर की बीमारी में खत्म हो गई जिंदगी भर की जमा-पूंजी
● सामाजिक उपेक्षा और बीमारी के डर ने बढ़ाई बेबसी
● सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला तो नगर परिषद ने लिया संज्ञान
● सरकारी दावों और सामाजिक व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
बिहार
खगड़िया/स्वराज टुडे: शहर स्थित रामचंद्रा मोहल्ले से मानवता और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां अत्यंत आर्थिक तंगी और बेबसी के कारण एक असहाय महिला अपने पति के शव के साथ तीन दिनों तक घर में ही बैठी रही।
गरीबी इस कदर हावी थी कि दाह-संस्कार के लिए भी महिला के पास एक रुपया नहीं था, और लंबे समय तक समाज या स्थानीय प्रशासन का कोई भी व्यक्ति मदद के लिए आगे नहीं आया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित अनीता देवी के पति मन्नू साह लंबे समय से लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और तीन दिन पहले उनका निधन हो गया। पति के इलाज के दौरान ही परिवार की बची-कुची सारी जमा-पूंजी पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी। अनीता देवी ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया कि उनकी कोई संतान नहीं है और दाह-संस्कार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, लेकिन पैसे न होने के कारण वे लाचार बनी रहीं।
अनीता देवी ने बताया कि आर्थिक बदहाली के साथ-साथ उन्हें सामाजिक उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा। गंभीर बीमारी (कैंसर) के कारण आसपास के लोग और पड़ोसी संक्रमण या अन्य डर की वजह से शव के पास आने और उसे छूने तक से परहेज करते रहे। न तो कोई कंधा देने आगे आया और न ही किसी ने आर्थिक मदद की, जिसके चलते वह मजबूर होकर तीन दिनों तक अपने पति के निष्प्राण शरीर के पास बैठकर सिर्फ मदद की गुहार लगाती रहीं।
जब यह हृदयविदारक मामला सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल हुआ और चारों ओर चर्चा का विषय बना, तब जाकर स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की नींद टूटी। मामले की गंभीरता को देखते हुए खगड़िया नगर परिषद के नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा ने पीड़ित महिला से संपर्क किया और तत्काल सहायता का भरोसा दिलाया। इसके बाद नगर परिषद की ओर से मृतक के अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराने की पहल शुरू की गई।
यह खौफनाक और दुखद घटना वर्तमान सामाजिक व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां सरकार गरीबी उन्मूलन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक तंगी और सामाजिक दूरी के कारण किसी व्यक्ति का शव तीन दिनों तक अंतिम संस्कार के लिए पड़ा रहे—यह समाज और व्यवस्था दोनों के लिए बेहद शर्मनाक और चिंताजनक स्थिति है।
यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय जननेता स्व. बिसाहूदास महंत जी को उनकी 48वीं पुण्यतिथि पर याद किया गया
यह भी पढ़ें: आधी रात को PM मोदी का संदेश: पेपर लीक मामले में सख्त एक्शन लेगी सरकार, लाएगी नया बिल

Editor in Chief





