छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कटघोरा श्री तन्मय खन्ना के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में आज ग्राम केंदाईख़ार, तहसील दर्री में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई।
तहसीलदार दर्री, तहसीलदार दीपका, तहसीलदार कटघोरा, नायब तहसीलदार दर्री, पुलिस विभाग तथा नगर निगम के संयुक्त दल द्वारा यह अभियान संचालित किया गया। संबंधित शासकीय भूमि बड़े झाड़ के जंगल मद में अवैध रूप से फ़ार्म हाउस बनाकर व्यावसायिक गतिविधि संचालित की जा रही थी।
09 फरवरी 2026 को अतिक्रमणकारियों को बेदख़ली नोटिस जारी कर 15 फरवरी 2026 तक बेजा कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे। परंतु निर्धारित तिथि तक कब्जा खाली न किए जाने के कारण आज 23 फरवरी 2026 को संयुक्त कार्रवाई कर अवैध रूप से निर्मित फ़ार्म हाउसों एवं व्यावसायिक संरचनाओं को हटाया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, निर्माण या व्यावसायिक उपयोग सहन नहीं किया जाएगा तथा ऐसे मामलों में भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शहर के भीतर बेजा कब्जाधारियों पर कार्रवाई कब ?
अतिक्रमण हटाओ अभियान शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहा है , लेकिन शहरी क्षेत्र में कार्रवाई कब होगी यह सोचने वाली बात है क्योंकि शहर के भीतर ऐसे कई इलाके हैं जहां शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से बेजा कब्जा किया जा रहा है। सुनालिया चौक से स्टेशन मार्ग पर नहर किनारे ठेले गुमटी वालों ने कब्जा कर रखा है । जहां ओपन जिम के साथ छोटा सा उद्यान बनाया गया था वो अब खाली हो चुका है। वहां की रेलिंग और व्यायाम के संसाधनों को गायब कर दिया गया है। इसी उद्यान में अवैध रूप से मंदिर का भी निर्माण कर लिया गया है। अगर शहर में नजर दौड़ाएं तो एक नहीं बल्कि सैकड़ों छोटे बड़े मंदिर मिल जाएंगे जिसे अवैध कब्जा कर बनाया गया है। शासकीय भूमि पर चर्च और मस्जिद के लिए बेजा कब्जा किया जाता है तो बवाल शुरू हो जाता है लेकिन मंदिर बने तो सब चलता है।
कुछ अरसा पहले मानस नगर में बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही हुई थी और सीएसईबी की भूमि को कब्जाधारियों से मुक्त कराया गया था । उस वक्त बुलडोजर लेकर पहुंचे प्रशासन के आलाधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल भी मौजूद थी लेकिन अब उस भूमि पर फिर से अवैध निर्माण किया जा चुका है ।
बुधवारी बायपास मार्ग पर बरसों पहले पौधारोपण कर ऑक्सीजन जोन बनाया गया था लेकिन सड़क किनारे अवैध ठेलों की बाढ़ सी आ गयी है। इसके अलावा मोटर गैरेज वालों का भी कब्जा है जहां मरम्मत के लिए आई गाड़ियां लाइन से खड़ी होती है । शासकीय भूमि पर ऑटो डीलरों का भी कब्जा है जहां बिक्री के लिए चौपहिया वाहनों को रखा जाता है ।
गेरवाघाट से प्रगतिनगर जाने वाले मार्ग पर भी करोड़ों की शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण किया जा चुका है । इस मार्ग पर बड़े बड़े मकान – दुकान और शोरूम तक बन चुके हैं । सूत्र बताते हैं कि वार्ड पार्षद ने पैसे लेकर लोगों को अवैध निर्माण की खुली छूट दे दी है।
इमलीडुग्गु गौमाता चौक से चाँम्पा मार्ग पर नहर तटबंध पर हरेभरे सैकड़ों पेड़ काट कर अवैध कब्जा कर लिया गया है। प्रशासन को सूचना दिए जाने के बावजूद इन अतिक्रमण धारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है । ऐसा प्रतीत होता है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान एक पक्षपात पूर्ण कार्रवाई है । किसी के अवैध कब्जे पर बुलडोजर कार्रवाई तो किसी कब्जाधारी को खुली छूट क्यों ? यहां सवाल उठना लाजिमी है कि ऐसे कब्जाधारियों को कहीं राजनीतिक संरक्षण तो प्राप्त नहीं जो उनके अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चल रहा।
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