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    Home»Featured»25 जून : इतिहास का काला दिन जब इंदिरा गांधी ने लगाया था आपातकाल..! मीसाबंदी रामबाबू अग्रवाल की जुबानी पूरी कहानी
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    25 जून : इतिहास का काला दिन जब इंदिरा गांधी ने लगाया था आपातकाल..! मीसाबंदी रामबाबू अग्रवाल की जुबानी पूरी कहानी

    Deepak SahuBy Deepak SahuJune 18, 2026Updated:June 18, 2026
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    मध्यप्रदेश
    इंदौर/स्वराज टुडे: इंदौर में निवासरत मीसाबंदी एवं राष्ट्रीय समिति सदस्य लोकतंत्र सेनानी संगठन रामबाबू अग्रवाल आपातकाल के दिनों को याद करके आज भी सिहर उठते हैं । उन्होंने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत में 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा अपनी सत्ता बचाने के लिए उठाया गया कदम था, जो ऐतिहासिक मुकदमों और जन आंदोलनों की परिणति थी और यह दिन इतिहास में तानाशाही के काले अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।

    हाई कोर्ट का फैसला सुनकर बौखला गई थी इंदिरा गांधी

    उल्लेखनीय है कि 1971 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले समाजवादी नेता राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, उन्होंने आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया और भ्रष्ट हथकंडे अपनाए .मामला हाई कोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट का फैसला 12 जून 1975 को आया जिसमें जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी को दोषी ठहराया. उनका चुनाव रद्द कर दिया गया और अगले 6 वर्षों तक उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई।

    इस संकट से बचने के लिए इंदिरा सरकार ने 39वां संविधान संशोधन पारित किया, जिसके तहत प्रधानमंत्री के चुनाव को न्यायिक समीक्षा से बाहर कर दिया गया.वैसे (हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही विपक्षी दलों और छात्रों ने जयप्रकाश नारायण लोकनायक जेपी के नेतृत्व में ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया. जेपी ने इंदिरा गांधी से इस्तीफा देने की मांग की और पुलिस व सेना से असंवैधानिक आदेश न मानने की अपील की इस आंदोलन ने पूरे देश में इंदिरा सरकार के खिलाफ असंतोष को चरम पर पहुंचा दिया, जिससे ही घबराकर आपातकाल लगाया गया) जिसका मुख्य कारण इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला और जेपी के आंदोलन से पैदा हुए राजनीतिक संकट था ।

    25 जून 1975 की रात की गई आपातकाल की घोषणा

    इंदिरा गांधी की सलाह पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने 25 जून 1975 की रात को अनुच्छेद 352 के तहत आंतरिक आपातकाल की घोषणा कर दी, क्योंकि जस्टिस सिन्हा ने अपने फ़ैसले में रायबरेली से इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली समाजवादी नेता राजनारायण की याचिका पर फैसला सुनाते हुए प्रधानमंत्री के संसदीय चुनाव को अवैध घोषित कर दिया. उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने के साथ ही उन्हें छह वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया था. 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने की छूट दे दी थी. वह लोकसभा में जा सकती थीं लेकिन वोट नहीं कर सकती थीं.इसके बाद 25 जून 1975 को लागू आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर सख्त सेंसरशिप लगा दी गई और मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया।

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    एक लाख से ज्यादा विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फौरन जेल में डाल दिया गया

    जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई और एल.के. आडवाणी सहित एक लाख से ज्यादा विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। फर्नांडीस समाजवादी ट्रेड यूनियन के प्रमुख नेता थे. 1974 में उन्होंने ऐतिहासिक रेलवे हड़ताल का नेतृत्व किया था, जिसे इंदिरा सरकार ने बहुत बेरहमी से कुचल दिया था। आपातकाल के दौरान प्रमुख नेताओं को मीसा जैसे कानूनों के तहत जेल में डाल दिया गया क्योंकि वे सरकार के सबसे मुखर आलोचक थे। भोपाल जेल में बंद समाजवादी नेता मधु लिमये थे ।

    जयप्रकाश नारायण, अटलबिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, राजनारायण, मोरारजी देसाई, चन्द्रशेखरजी आदि नेतागण गिरफ्तार किये गये। हमारे साथ इंदौर जिला जेल में श्री के.सी. सुदर्शन एवं कुशाभाऊ ठाकरे, मामा बालेश्वर दयाल जी को भी लाया गया।

    इंदौर जिला जेल से ही पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा, श्री कैलाश जोशी, एवं सुंदर लाल जी पटवा, बैरिस्टर त्रिवेदी, नीमच के कन्हैयालाल डूंगरवाल, श्री शरद यादव, श्री रघु ठाकुर एवं भेरूलाल पाटीदार को भी इंदौर जिला जेल में लाया गया। इंदौर जिला जेल से श्री कुशाल भाऊ ठाकरे जी को बेगमगंज खुली जेल भेज दिया गया। सुश्री उमा भारती को जब वह 14 साल की थी और उनके भाई के साथ इंदौर में गीता भवन में प्रवचन के लिए आई थी तो मुझे उनको मोटरसाइकिल पर जिला जेल किसी से मिलने के लिए कपड़े बदलकर ले जाना पड़ा। जब चुनाव की घोषणा हुई और जेल से मीसाबंदी छूटने लगे तो मुझे ठाकरे जी का मैसेज मिला और मैने उनसे जाकर खुली जेल में मुलाकात की रात उनके साथ गुजर कर स्वर्गीय मधुलीमियजी जी तक मैसेज पहुंचा।

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    गूंजा था नारा ‘ सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

    कोर्ट के फैसले बाद लोकनायक’ जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा से गद्दी छोड़ने को कहा. 25 जून 1975 की शाम को नई दिल्‍ली के रामलीला मैदान का नजारा देखने लायक था उस जगह एक साथ इतने लोग कभी नहीं जुटे थे.यही वो जगह थी जब जेपी ने बुलंद आवाज में राष्‍ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की मशहूर पंक्तियां कहीं, ‘सिंहासन खाली करो क‍ि जनता आती है…’ उस रैली को मोरारजी देसाई, अटल बिहार वाजपेयी, चंद्रशेखर जैसे नेताओं ने भी संबाधित किया। जेपी ने यहीं से इंदिरा से कुर्सी छोड़ने को कहा जेपी ने सेना और पुलिस से असंवैधानिक और अनैतिक आदेश मानने से इनकार करने का आह्वान किया, जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में पूरे देश में मजदूर आंदोलन चरम पर था, उन पर बड़ौदा डायनामाइट कांड का आरोप भी लगाया गया, जार्ज फर्नांडीस भूमिगत रहकर पूरे देश में तानाशाही सरकार के खिलाफ आंदोलनरत थे।

    रैली की गूंज ने इंदिरा को किया था मजबूर

    रामलीला मैदान की वो रैली इतनी विशाल थी कि उसकी गूंज प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच रही थी यह रैली रात 9 बजे खत्‍म हुई, तबतक इंदिरा समझ चुकी थीं कि माहौल उनके खिलाफ हो चुका है। कोई और रास्‍ता न देख मजबूरी में उन्‍होंने आपातकाल लगाने का फैसला किया. आधी रात से थोड़ी देर पहले, राष्‍ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आपतकाल की घोषणा की.अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई. विपक्ष के नेता हिरासत में ले लिए गए। 26 जून की सुबह इंदिरा ने रेडियो पर आपातकाल की जानकारी दी.28 जून को अखबारों ने पन्‍ने खाली छोड़कर विरोध जताया.इसके बाद अगले 21 महीनों तक कई दमनकारी कदम उठाए गए. जनवरी 1977 में इंदिरा ने चुनाव कराने का फैसला किया. कांग्रेस बुरी तरह चुनाव हारी. जनता पार्टी का गठबंधन 345 सीटें जीतकर सत्‍ता में आ गया. आखिकार 21 मार्च, 1977 को आधिकारिक रूप से आपातकाल हटा लिया गया।

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    सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 34981 लोगों को मीसा के तहत बिना मुकदमे के बंदी बनाया गया था। इसके अलावा 75818 लोगों को DIR/ DISIR के तहत गिरफ्तार किया गया। जिस तरह इंदौर जिला जेल में श्री सुदर्शन जी आदि प्रतिदिन शाखा में लगते थे,इसी तरह पूरे देश की जेलों में श्रद्धेय कुशाभाऊ ठाकरे जी के RSS के साथी गण प्यारे लाल जी खंडेलवाल, मेघराज जी जैन, कृष्ण मुरारी मोघे छत्तीसगढ़ राजस्थान के भी संघ प्रचारक लोग जेल में कार्यकर्ताओं को ऊर्जावान रखने का कार्य करते थे ।

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    Deepak Sahu

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