नई दिल्ली/स्वराज टुडे: भारत की पहली बुलेट ट्रेन अब सिर्फ कागजों पर बना सपना नहीं, बल्कि फैक्ट्री के अंदर आकार लेती हकीकत बन चुकी है. 280 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और 250 किलोमीटर प्रति घंटे की ऑपरेशनल स्पीड वाली इस हाई-स्पीड ट्रेन की कार बॉडी बनकर तैयार हो चुकी है.
साइडवॉल, रूफ और दूसरे स्ट्रक्चरल हिस्सों को जोड़कर ट्रेन का पूरा ढांचा तैयार किया गया है. अब इसकी मजबूती परखने के लिए ‘स्क्वीज टेस्ट’ के फाइनल स्टेज चल रहे हैं. यानी पटरी पर दौड़ने से पहले ही बुलेट ट्रेन की पहली बड़ी परीक्षा शुरू हो चुकी है.
बेंगलुरु में BEML की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में तैयार हो रही भारत की पहली बुलेट ट्रेन के निर्माण का जायजा 1 नवंबर को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लिया. इस दौरान उन्होंने ट्रेन की कार बॉडी से लेकर पैसेंजर सीटों, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और दूसरे जरूरी उपकरणों को देखा. इस ट्रेन सेट में कुल 8 कोच होंगे. इसके निर्माण में भारतीय इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विकसित करने पर खास फोकस है.

बुलेट ट्रेन के कार बॉडी की चालू है ‘अग्नि परीक्षा’
- बुलेट ट्रेन का जो स्ट्रक्चर अभी फैक्ट्री में नजर आ रहा है, वह आगे चलकर एक हाई-स्पीड ट्रेन का हिस्सा बनेगा. रेल मंत्री ने बताया कि फिलहाल ट्रेन की इंटीग्रेटेड कार बॉडी तैयार की गई है. इसमें साइडवॉल, रूफवॉल, एंडवॉल और दूसरे स्ट्रक्चरल पार्ट्स को जोड़कर एक पूरा ढांचा बनाया गया है.
- अब इस कार बॉडी पर ‘स्क्वीज टेस्ट’ के जरिए मजबूती और स्ट्रक्चरल क्वालिटी की जांच की जा रही है. हाई-स्पीड ट्रेन में तेज रफ्तार के दौरान स्ट्रक्चर की मजबूती, रिजिडिटी और डाइमेंशनल स्टेबिलिटी बेहद अहम होती है. कार बॉडी का आकार और उसकी बनावट तय मानकों के अनुरूप बनी रहे, इसके लिए इस तरह के टेस्ट जरूरी हैं.
- कार बॉडी की जांच पूरी होने के बाद इसमें प्रोपल्शन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर और दूसरे जरूरी उपकरण लगाए जाएंगे. इसके अलावा ट्रेन के नीचे बोगी और उससे जुड़ी असेंबली फिट की जाएंगी. यानी अभी तैयार हुआ ढांचा आगे चलकर एक पूरी तरह काम करने वाली ट्रेन में तब्दील होगा.
50 डिग्री की गर्मी से लेकर माइनस टेंपरेचर तक होगी टेस्टिंग
- हाई-स्पीड ट्रेन बनाना सिर्फ उसकी बॉडी तैयार करने या उसे तेज दौड़ाने तक सीमित नहीं है. भारत जैसे देश में अलग-अलग मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ट्रेन के सिस्टम का हर हाल में बेहतर प्रदर्शन करना भी जरूरी है.
- इसी को ध्यान में रखते हुए आगे ट्रेन की क्लाइमेट टेस्टिंग की योजना है. इसमें करीब 50 डिग्री की भीषण गर्मी से लेकर माइनस टेंपरेचर तक अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रेन को परखा जाएगा.
- धूल भरे माहौल और बारिश जैसे हालात में भी इसके सिस्टम की जांच होगी. परीक्षण के दौरान यह भी परखा जाएगा कि लगातार बारिश और पानी के संपर्क में आने के बाद भी अलग-अलग उपकरण अच्छी तरह काम करते रहें.
- इस बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 280 kmph होगी, जबकि ऑपरेशन स्पीड 250 kmph रखी गई है. इस ट्रेन को 280 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन रफ्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है.
सिर्फ स्पीड नहीं, पैसेंजर के आराम का भी रखा जा रहा ध्यान
- बुलेट ट्रेन में यात्रियों का सफर कितना आरामदायक होगा, यह भी इसके निर्माण का एक अहम पहलू है. रेल मंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में पैसेंजर सीटों, हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर कंडीशनिंग यानी एचवीएसी सिस्टम, कपलर और दूसरे उपकरणों का भी जायजा लिया है.
- तेज रफ्तार पर चलने वाली ट्रेन में सीटों की डिजाइन, केबिन का टेंपरेचर, वाइब्रेशन और शोर जैसी चीजें यात्रियों के अनुभव को प्रभावित करती हैं. ऐसे में ट्रेन की इंजीनियरिंग में इन पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
- निरीक्षण के दौरान साइड मॉड्यूल और रूफ मॉड्यूल के निर्माण, उनके इंटीग्रेशन और असेंबली ऑपरेशन को भी देखा गया. कार बॉडी बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रिसिजन इंजीनियर्ड जिग्स और फिक्स्चर्स का भी निरीक्षण किया गया है.
50 डिग्री की गर्मी से लेकर माइनस टेंपरेचर तक होगी टेस्टिंग
- हाई-स्पीड ट्रेन बनाना सिर्फ उसकी बॉडी तैयार करने या उसे तेज दौड़ाने तक सीमित नहीं है. भारत जैसे देश में अलग-अलग मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ट्रेन के सिस्टम का हर हाल में बेहतर प्रदर्शन करना भी जरूरी है.
- इसी को ध्यान में रखते हुए आगे ट्रेन की क्लाइमेट टेस्टिंग की योजना है. इसमें करीब 50 डिग्री की भीषण गर्मी से लेकर माइनस टेंपरेचर तक अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रेन को परखा जाएगा.
- धूल भरे माहौल और बारिश जैसे हालात में भी इसके सिस्टम की जांच होगी. परीक्षण के दौरान यह भी परखा जाएगा कि लगातार बारिश और पानी के संपर्क में आने के बाद भी अलग-अलग उपकरण अच्छी तरह काम करते रहें.
- इस बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 280 kmph होगी, जबकि ऑपरेशन स्पीड 250 kmph रखी गई है. इस ट्रेन को 280 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन रफ्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है.
सिर्फ स्पीड नहीं, पैसेंजर के आराम का भी रखा जा रहा ध्यान
- बुलेट ट्रेन में यात्रियों का सफर कितना आरामदायक होगा, यह भी इसके निर्माण का एक अहम पहलू है. रेल मंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में पैसेंजर सीटों, हीटिंग, वेंटिलेशन एंड एयर कंडीशनिंग यानी एचवीएसी सिस्टम, कपलर और दूसरे उपकरणों का भी जायजा लिया है.
- तेज रफ्तार पर चलने वाली ट्रेन में सीटों की डिजाइन, केबिन का टेंपरेचर, वाइब्रेशन और शोर जैसी चीजें यात्रियों के अनुभव को प्रभावित करती हैं. ऐसे में ट्रेन की इंजीनियरिंग में इन पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
- निरीक्षण के दौरान साइड मॉड्यूल और रूफ मॉड्यूल के निर्माण, उनके इंटीग्रेशन और असेंबली ऑपरेशन को भी देखा गया. कार बॉडी बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रिसिजन इंजीनियर्ड जिग्स और फिक्स्चर्स का भी निरीक्षण किया गया है.
बुलेट ट्रेन के निर्माण में भारत की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
BEML की आदित्य मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में चल रहा यह काम भारत की हाई-स्पीड रेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिहाज से अहम माना जा रहा है. देश में कार बॉडी निर्माण, मॉड्यूल इंटीग्रेशन और क्वालिटी टेस्टिंग की क्षमता विकसित होने से एडवांस्ड रेल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के अनुभव को भी बढ़ावा मिलेगा.
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