* इंटेलिजेंस चीफ पर गंभीर आरोप, क्या साय सरकार लेगी कोई फैसला?
* जिसके हाथ में इंटेलिजेंस तंत्र की कमान, उसी पर कोर्ट में गलत तथ्य पेश करने के आरोप
* बलौदा बाजार की हिंसक घटना ने एडीजी इंटेलिजेंस की ताकत की खोली पोल
रायपुर/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने इंटेलिजेंस चीफ जैसे महत्वपूर्ण पद पर एक ऐसे गैर जिम्मेदार, लापरवाह और भ्रष्टाचारी अफसर एडीजी आईपीएस अमित कुमार को काबिज कर दिया है जो पूरी तरह से विफल साबित होते दिखाई दिए हैं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालत में गलत तथ्य पेश करने और झूठे साक्ष्य के आरोप में अमित कुमार सहित अन्य पांच अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में हलचल मच गई है। महज कुछ पैसों के लालच में आकर अमित कुमार ने कोर्ट में जज के सामने गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर आरोपी को सजा से बचाने जैसा घिनौना अपराध किया है।
कोर्ट में प्रस्तुत किया गलत एफ़िडेविट
दरअसल यह मामला उस समय का है जब भ्रष्टाचारी अफसर अमित कुमार दिल्ली में सीबीआई में पदस्थ थे। उस समय आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल पर आय से अधिक संपत्ति का एक केस दर्ज हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2016 को सीबीआई की स्वीकृति को अमान्य कर दिया था, जिसके बाद 10 मार्च 2016 को विशेष अदालत ने अग्रवाल को डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद अग्रवाल ने अपने जब्त दस्तावेज वापस मांगने की याचिका लगाई। सीबीआई ने 02 अगस्त 2016 को कोर्ट में जवाब दिया कि कानून मंत्रालय से आगे की कानूनी कार्रवाई पर बातचीत जारी है। जबकि सच्चाई यह थी कि कानून मंत्रालय 08 जून 2016 को ही अपनी राय दे चुका था कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने का कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने 06 अक्टूबर 2026 को आदेश में कहा कि संबंधित दस्तावेज और विभागीय फाइलें प्रथम दृष्टया कार्यवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। सूत्रों के अनुसार अमित कुमार ने अशोक कुमार अग्रवाल के दुश्मनों से करोड़ों रूपये की डील की और जानबूझकर कोर्ट में गलत एफ़िडेविट प्रस्तुत कर दिया, जिसकी जानकारी जैसे ही अशोक कुमार को लगी तो उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपने जब्त दस्तावेज वापस देने का आवेदन लगाया। अब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशानुसार छत्तीसगढ़ के इंटेलिजेंस चीफ़ अमित कुमार पर धारा 191/193 और 209 के तहत शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिये हैं।
जानबूझकर कानून मंत्रालय की राय छिपाई
अशोक अग्रवाल ने धारा 340 के तहत सीबीआई अधिकारियों पर गलत हलफ़नामा देने का आरोप लगाया। विशेष अदालत (राऊज एवेन्यू कोर्ट) ने 25 अक्टूबर 2025 को आवेदन खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि 02 अगस्त 2016 को कोर्ट में तथ्यात्मक रूप से गलत जवाब दाखिल किया गया। कानून मंत्रालय की राय को जानबूझकर छिपाया गया। जांच में सामने आया कि तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर विनीत विनायक ने फाइल में रखे इंटरनल ड्राफ्ट लेटर में नीली स्याही से कटिंग की थी, जिसका स्क्रीनशॉट अब कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा है।
*छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी हैं अमित कुमार*
छत्तीसगढ़ कैडर के 1998 बैच के सीनियर आईपीएस अधिकारी अमित कुमार वर्तमान में इंटेलिजेंस चीफ के पद पर हैं। लगभग 12 साल तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में ज्वाइंट डायरेक्टर और एंटी करप्शन विंग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अमित कुमार ने एक नहीं कई बार बड़ी गलतियां की। अमित कुमार कोयला घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई की तरफ से नोडल अधिकारी थे। उन्होंने यहां भी बड़ा भ्रष्टाचार का जाल बनाया था, जिसकी जानकारी जैसे ही वर्तमान मोदी सरकार और गृहमंत्री अमित शाह को मिली तो उन्होंने तुरंत उन्हें प्रतिनियुक्ति से वापस छत्तीसगढ़ भेज दिया। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उन्हें अमित कुमार जैसे नाकाबिल और भ्रष्टाचारी अधिकारी को प्रदेश के इंटेलिजेंस चीफ का इतना महत्वपूर्ण काम सौंपना पड़ा।
*एडीजी इंटेलिजेंस के संरक्षण में हुई अफीम की खेती*
अमित कुमार के इंटेलिजेंस की सबसे बड़ी विफलता का उदाहरण है दुर्ग जिले के समोदा गांव में मक्के की खेती के बीच बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती का होना। यह खेती भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के खेत पर हो रही थी। चर्चा है कि इस गोरखधंधे में अमित कुमार का संरक्षण है। यही कारण है पुलिस ने इस पूरे मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। मक्के की फसल के बीच करीब 05 से 06 एकड़ में अफीम की लहलहाती फसल उगाई गई।
*बलौदा बाजार का हिंसक प्रदर्शन बड़ा फेलियर*
छत्तीसगढ़ के इंटेलिजेंस का एक और सबसे बड़ा फेलियर था बलौदा बाजार का उग्र प्रदर्शन। इंटेलिजेंस को इस प्रदर्शन की भनक तक नहीं लगी और राज्य में इतना हिंसक प्रदर्शन हो गया। खास बात यह है कि इंटेलिजेंस की फेलियर का खामियाजा यह हुआ कि वकीलों ने 200 से ज्यादा दो घोड़े, 50 चार पहिया वाहनों को भी जला दिया। बाद में खानापूर्ति करते हुए पुलिस ने लगभग 100 लोगों को गिरफ्तार किया और कुछ दिनों में उन्हें रिहा कर दिया। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार बलौदा बाजार में होने वाले इस हिंसक प्रदर्शन की जानकारी एडीजी इंटेलिजेंस अमित कुमार को थी, लेकिन उन्होंने बताई इस जानकारी को सुलझा लिया और कुछ दिन बाद ही राज्य में इतनी बड़ी घटना घट गई।
अमित कुमार का असफल नेटवर्क
1. जबसे अमित कुमार को इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है, आंदोलन और धरना प्रदर्शन सहित कई बड़ी घटनाएं बढ़ गई हैं। अमित का इंटेलिजेंस नेटवर्क विफल है और वे इस पद के लिए काबिल व्यक्ति नहीं हैं।
2. हसदेव अरण्य के जंगलों में बिठाने की कटाई और प्रस्तावित कोयला खनन परियोजनाओं के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन जारी है।
3. छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक के विरोध में अप्रैल 2026 में ईसाई समुदाय और विभिन्न संगठनों ने रैलियां निकालीं। इसकी भनक भी इंटेलिजेंस को नहीं लग पाई।
4. प्रदेश किसान संघ के नेतृत्व में ‘दाम सत्याग्रह’ और ‘किसान भुगतान यात्रा’ के तहत राज्य प्रवर्तन प्रदर्शन शुरू किए हैं। इन परियोजनाओं के बारे में भी इंटेलिजेंस को ख़बर नहीं लगी और यही अमित कुमार का फेलियर है।
(विजया पाठक की रिपोर्ट)
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