छत्तीसगढ़
सक्ती-हसौद/स्वराज टुडे: शनिवार शाम हसौद थाने में सन्नाटा पसरा था। ड्यूटी रजिस्टर पर दस्तखत, वायरलेस की आवाज और गश्त की तैयारी के बीच एक खबर आई जिसने पूरे जिले की पुलिस को हिला दिया । दरअसल सक्ती जिले के हसौद थाने में पदस्थ आरक्षक जय कुमार लहरे ने थाने की ऊपरी मंजिल के एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

घटना के तुरंत बाद साथी कर्मियों ने शव को नीचे उतारकर हसौद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया।
परिवार में पसरा मातम

इस दुःखद घटना की खबर लगते ही आरक्षक जय कुमार लहरे के घर में कोहराम मच गया। पत्नी, बच्चे और रिश्तेदार स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। आंखें नम थीं और सवाल एक ही था – “ऐसा क्यों हुआ?” फिलहाल परिजन भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आत्महत्या के पीछे की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
वर्दी और दबाव

इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को सामने ला दिया है। लगातार ड्यूटी, कम स्टाफ, जनता की उम्मीदें और व्यक्तिगत जिम्मेदारियां – इन सबके बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। कई बार वर्दी के भीतर का तनाव बाहर नहीं दिखता। अपनी समस्याओं को लेकर भीतर ही भीतर तनावपूर्ण जीवन जीते रहते हैं । जब बात बर्दाश्त से बाहर हो जाती है तो उसका नतीजा इस तरह की घटनाओं के रूप में सामने आता है ।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। साथ ही विभाग में काउंसलिंग और सहयोग की व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
जय लहरे की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह एक परिवार के उजड़ने की कहानी है, और एक सिस्टम को आईना दिखाने वाली घटना है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जय लहरे ने किन परिस्थितियों में खुदकुशी का रास्ता चुना ।
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