छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले कोरबा में “दिया तले अंधेरा” की कहावत उस समय साकार होती दिखाई दी, जब एसईसीएल कोरबा क्षेत्र की पंद्रह ब्लॉक कॉलोनी लगभग 24 घंटे तक अंधेरे में डूबी रही। सोमवार 6 जुलाई की दोपहर से मंगलवार 7 जुलाई की दोपहर तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रहने से कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 24 घण्टे बाद भी बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने अथवा समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
लगातार बिजली गुल रहने से पेयजल आपूर्ति ठप हो गई, जिससे दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बिजली नहीं होने से घरेलू कार्य प्रभावित हुए, पेयजल संकट गहरा गया और लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
कॉलोनीवासियों एवं कर्मचारियों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही, उदासीनता और समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण समस्या घंटों तक बनी रही। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र के कर्मचारी दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य कर देश के बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं और राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, उन्हीं कर्मचारियों के परिवारों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इससे एसईसीएल प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कॉलोनीवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा कॉलोनियों की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय करना और आवश्यक तकनीकी सुधार करना अत्यंत आवश्यक है।
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