कोलकाता/स्वराज टुडे: पश्चिम बंगाल की सत्ता पर 15 साल तक काबिज रहने के बाद ममता बनर्जी की ना सिर्फ सरकार चली गई, बल्कि लगातार दूसरे चुनाव में शुभेंदु अधिकारी से मुकाबला हारना भी उनके चमकदार राजनीतिक करियर पर बड़े धब्बे के रूप में देखा जाएगा। पांच साल पहले नंदीग्राम में अधिकारी से मुकाबला हारीं ‘दीदी’ को इस बार उस भवानीपुर में हार का मुंह देखना पड़ा है, जो कभी उनका गढ़ था।
टीएमसी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, धार्मिक ध्रुवीकरण और भाजपा कार्यकर्ताओं के लगातार परिश्रम ने टीएमसी को महज 80 सीटों तक समेट दिया तो भगवा दल ने 200 पार जाकर सबको चौंका दिया। खुद ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव बेहद कठिन रहा और अंजाम वही हुआ जिसका अंदाजा संभवत: उनको मतदान के दिन तक हो चुका था। यही वजह है कि मतदान के दिन जब ममता बनर्जी को भवानीपुर में एक बूथ से दूसरे बूथ तक दौड़ते देखा गया तो राजनीतिक पंडितों को यह अनुमान हो चुका था कि ‘दीदी’ चक्रव्यूह में फंस चुकी हैं।
खुद 5 खंटे तक काउंटिंग सेंटर में रहीं ममता
पिछले दो चुनावों में अपेक्षाकृत शांत और विश्वास में दिखने वालीं ममता बनर्जी इस बार साखावत मेमोरियल हाई स्कूल में बने काउंटिंग सेंटर में पांच घंटे से अधिक समय तक खुद मौजूद रहीं। हालांकि, 18वें राउंड की काउंटिंग के बाद जब उन्होंने खुद को करीब 11 हजार वोट से पिछड़ते देखा तो बाहर निकल गईं और अंत में शुभेंदु अधिकारी 15105 वोट से विजेता घोषित हुए। काउंटिंग सेटर के बाहर ममता बनर्जी ने अपने साथ बदसलूकी का आरोप लगाया और यहां तक कहा कि उन्हे लात मारी गई।
राउंड दर राउंड कैसे बदला खेला
शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा और राउंड दर राउंड उसी तरह बदलता गया जैसे कोलकाता में होने वाले रोमांचक फुटबॉल मुकाबलों में खेला कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ झुकता दिखता है। शुरुआत में जब रुझान भाजपा के पक्ष में आने शुरू हुए तो भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी भी ममता बनर्जी से बढ़त बनाते दिखे। दूसरे राउंड की गिनती के बाद वह ममता बनर्जी से 1458 वोट की बढ़त ले चुके थे। तीसरे राउंड के बाद बनर्जी 898 वोट से आगे निकल गईं। सातवें राउंड तक तो उन्होंने इस मार्जिन को बढ़ाकर 17 हजार के पार कर दिया था। ऐसा लगने लगा कि इस बार ममता बनर्जी कम से कम अपनी सीट जरूर बचा लेंगी।
हालांकि, खेला होना अभी बाकी थी। काउंटिंग शुरू होने से पहले ही शुभेंदु अधिकारी ने कह दिया था कि शुरुआत में ममता बनर्जी आगे निकलेंगी लेकिन जब उनके समर्थन वाले पॉकेट्स के ईवीएम खुलेंगे तो वह निश्चित तौर पर जीत हासिल करेंगे। हुआ भी ठीक वैसा ही। 7वें राउंड के बाद बाजी तेजी से अधिकारी के पक्ष में झुकने लगा। 13वें राउंड की गिनती के बाद ममता बनर्जी 5349 वोट से ही आगे थीं। 16वें राउंड में अधिकारी 554 वोट से आगे निकल गए। 17वें राउंड में वह 6226 वोट से बढ़त हासिल कर चुके थे। 18वें राउंड में मार्जिन 10994 वोट का था जो अंतिम तौर पर 15105 पर जाकर खत्म हुआ।
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