दिल्ली/स्वराज टुडे: दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों ने दम तोड़ दिया। मृतकों में बुजुर्ग दंपति, बेटे-बहू व डेढ़ साल का पोता शामिल हैं।
हादसे के पांच दिन पहले परिवार (मृत बुजुर्ग के भाई के घर) में एक छोटा समारोह था, जिसमें पूरा परिवार व रिश्तेदार जुटे थे। रविवार को घर में एक बच्चे का जन्मदिन था। मानेसर में पूरे धूमधाम से जन्मदिन मनाने की तैयारी थी। शनिवार की रात 12 बजे वीडियो कॉल पर सभी उसे जन्मदिन की बधाई दी और केक भी कटा था। इसके साढ़े तीन घंटे बाद ही लगी भयंकर आग की चपेट में आकर 62 वर्षीय अरविंद जैन, उनकी पत्नी अनीता जैन, 34 वर्षीय बेटा निशांक जैन, बहू आंचल जैन व डेढ़ वर्षीय पोते अक्षय की दर्दनाक मौत हो गई।
विवेक विहार की जिस इमारत में हादसा हुआ वहां सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। यही हादसे के दौरान यहां रहने वाले नौ लोगों की जिंदगियों पर भारी पड़ गया।
सिर्फ एक ही सीढ़ी और लिफ्ट
आठ फ्लैट में रह रहे आठ परिवारों के नीचे आने के लिए केवल एक ही करीब 1.5 मीटर चौड़ी सीढ़ी और एक ही लिफ्ट लगी हुई थी। ऐसे में एक साथ सभी परिवारों का नीचे भाग पाना संभव नहीं था। रही सही कसर सीढ़ियों पर लगे टफन ग्लास ने पूरी कर दी। सीढ़ी पर लगे टफन ग्लास के चलते तापमान तेजी से बढ़ा। आग फैलने पर ये ग्लास टूट गए, जिससे सीढ़ियों से भाग पाना मुश्किल हो गया।
सुरक्षा के लिए लगाई गई ग्रिल
इमारत के पीछे और दाहिने किनारे पर बंदरों और कबूतरों को आने से रोकने के लिए लोहे की मोटी ग्रिल का एक जाल बनाया गया था। इस लोहे के जाल से पूरी इमारत को ढकी गयी है। दाहिनी ओर तो इस जाल की वजह से दो इमारतों के बीच आवश्यक छोड़ी जाने वाली जगह भी नहीं बची। ऐसे में बगल से दमकलकर्मी इमारत में घुस ही नहीं पाए और पीछे से ग्रिल को काटने में काफी समय लगा।
छत का पहले से लॉक दरवाजा
हादसे के वक्त छत की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर लगे दरवाजे में ताला लगा हुआ था। इसके चलते तीसरा परिवार सीढ़ी से आगे छत की ओर नहीं जा सका।
डिजिटल लॉक
इमारत के ज्यादातर फ्लैट में डिजिटल लॉक लगे हुए थे। एसी में धमाके के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट के कारण दरवाजों में लगे डिजिटल लॉक जाम हो गए और लोग कमरों से बाहर नहीं निकल सके।
निशांक फोन कर भाई और अन्य मदद मांगते रहे
निशांक ने मदद के लिए बड़े भाई के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी फोन किया था। उनके पिता अरविंद जैन के एक दोस्त मनोज जैन ने बताया कि 2 बजे उनकी अरविंद जैन ने बात हुई थी। रात ढाई बजे अपना काम करके सो गया। सुबह जगा तो फोन पर निशांक के दो मिस्ड कॉल थे। एक तड़के 3:50 बजे और दूसरा सुबह चार बजे का कॉल था। फोन साइलेंट मोड में होने के कारण फोन उठा नहीं पाया। मुझे इसका अफसोस रहेगा कि फोन नहीं उठा पाया।
यूपी पुलिस को 20 मिनट तक लगता रहा फोन
आपातकालीन मदद की कॉल उत्तर प्रदेश पुलिस के पास पहुंचने से हादसे की सूचना संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने में करीब 20 मिनट की देरी हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद उन्होंने पुलिस और दमकल विभाग को फोन कर सूचना देने की कोशिश की, लेकिन बार-बार कॉल उत्तर प्रदेश पुलिस के कंट्रोल रूम में लगती रही।
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