छत्तीसगढ़
रायपुर-कोरबा/स्वराज टुडे: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेशों की अनदेखी किए जाने पर छत्तीसगढ़ सरकार और कोरबा पुलिस के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने इस मामले को “स्पष्ट और जानबूझकर किया गया उल्लंघन” करार देते हुए कोरबा के पुलिस अधीक्षक (SP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 24 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त निर्देश दिया है।
न्यायपालिका की सख्ती, प्रशासन पर सीधा सवाल
न्यायमूर्ति जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि अदालत के आदेशों की इस तरह अनदेखी न्याय व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से आदेश की अवहेलना प्रतीत होती है।
जानें क्या है पूरा मामला
यह मामला एक आपराधिक प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें आरोपी को हाईकोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया था कि प्रतिवादी क्रमांक-2 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश किया जाए।
आदेश के बावजूद नहीं हुआ पालन
अदालत ने 23 मार्च 2026 को अपने आदेश में कहा था कि 15 अप्रैल की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी को हर हाल में प्रस्तुत किया जाए। राज्य की ओर से बताया गया कि 15 अप्रैल को आरोपी को पेश किया गया था और 20 अप्रैल के लिए उपस्थिति से छूट मांगी गई थी। लेकिन 20 अप्रैल को सुनवाई के समय आरोपी की अनुपस्थिति ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा— यह मामला बेहद गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का यह “जानबूझकर उल्लंघन” है। न्यायिक निर्देशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
एसपी से जवाब-तलब, कार्रवाई के संकेत
खंडपीठ ने कोरबा एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जवाब संतोषजनक नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई तय है।
अगली सुनवाई में सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि—कोरबा एसपी आज 24 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों। प्रतिवादी क्रमांक-2 की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए
न्याय व्यवस्था का सख्त संदेश
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि अदालत अपने आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगी। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक अनुशासन की गंभीरता को रेखांकित करता है, जहां शीर्ष अदालत ने सख्त संदेश देते हुए व्यवस्था को आईना दिखाया है।
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