ड्यूटी से ‘तलाक’ और सरकारी जमीन से ‘निकाह’: शिकायत पर प्रशासन हरकत में, प्रधान आरक्षक को काम रोकने का आदेश

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छत्तीसगढ़
अम्बिकापुर/सरगुजा(स्वराज टुडे): अगर आपको लगता है कि छत्तीसगढ़ पुलिस केवल अपराधियों को पकड़ने के लिए होती है, तो सरगुजा संभाग की यह कहानी आपकी सोच बदल सकती है। यहां एक ऐसे ‘हुनरमंद’ प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती चर्चा में हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने वर्दी को कानून लागू करने का नहीं बल्कि सरकारी जमीन पर ‘साम्राज्य’ खड़ा करने का लाइसेंस समझ लिया।

मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन ने भी संज्ञान ले लिया है और अतिरिक्त तहसीलदार अम्बिकापुर-02 ने 6 मार्च 2026 को आदेश जारी कर सरकारी भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने के निर्देश दिए हैं।

तबादला, सेटिंग और ‘गायब’ होने की कहानी

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जानकारी के अनुसार प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती का तबादला एमसीबी जिले में हुआ था, लेकिन वे कथित तौर पर सूरजपुर पुलिस लाइन में अटैच रहे। आरोप है कि पिछले करीब एक महीने से वे नियमित ड्यूटी से भी गायब हैं। विभागीय स्तर पर वेतन रोकने की चर्चा है, लेकिन इसी बीच सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

अजीरमा में ‘भारती साम्राज्य’ का आरोप

शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार जायसवाल के अनुसार पटवारी हल्का नंबर-56 के ग्राम अजीरमा में स्थित खसरा नंबर 74/1 शासकीय भूमि है, जिसका रकबा लगभग 2.480 हेक्टेयर बताया गया है।

आरोप है कि इसी जमीन के लगभग 0.700 हेक्टेयर हिस्से पर प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती द्वारा:

शेड निर्माण बाउंड्री (प्रिकार) निर्माण तथा मक्का फसल बोने जैसी गतिविधियां की जा रही थीं।

शिकायत में यह भी कहा गया कि संबंधित कर्मचारी गांव के मूल निवासी नहीं हैं, इसके बावजूद सरकारी भूमि को निजी संपत्ति की तरह उपयोग किया जा रहा है।

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 प्रशासन का आदेश: निर्माण कार्य तत्काल बंद

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राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय, अम्बिकापुर-02 ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि:

शासकीय भूमि पर किया जा रहा निर्माण तत्काल बंद किया जाए संबंधित व्यक्ति 9 मार्च 2026 को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करे अनुपस्थित रहने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी

पुलिस और राजस्व अमले को भी निर्देश

जारी आदेश में प्रशासन ने कई अधिकारियों को निर्देश दिए हैं:

थाना प्रभारी गांधीनगर को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी को निर्माण रोकने और पालन प्रतिवेदन देने संबंधित व्यक्ति को नोटिस की तामील कराने के निर्देश दिए गए हैं।

कानून बनाम वर्दी

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आमतौर पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई होती है। लेकिन जब आरोप किसी वर्दीधारी कर्मचारी पर लगे, तो सवाल और गंभीर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकारी कर्मचारी ही सरकारी जमीन पर कब्जा करने लगें, तो आम नागरिकों को कानून का सम्मान करने की नसीहत देना कितना उचित रहेगा?

अब बड़ा सवाल

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि:

क्या वास्तव में अवैध निर्माण हटाया जाएगा, क्या विभागीय कार्रवाई भी होगी, या फिर मामला कागजों में ही ‘निपट’ जाएगा? सरगुजा में यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी बन गया है।

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दीपक साहू

संपादक

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