उत्तरप्रदेश
अयोध्या/स्वराज टुडे: अयोध्या-भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत विचारित एक प्रकरण में न्यायालय ने जज के नाम पर मनमाफिक निर्णय कराने के लिए एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के दोषी तत्कालीन पेशकार नरेंद्र बहादुर सिंह को चार वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹10,000/- के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी संबंधित न्यायालय में पेशकार के पद पर पदस्थ था। उसने एक वाद में पक्षकार से संपर्क कर यह दावा किया कि वह न्यायाधीश के नाम पर उनके पक्ष में निर्णय करा सकता है तथा इसके एवज में एक लाख रुपये की मांग की। शिकायत प्राप्त होने पर विधिवत जांच की गई एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य एवं गवाहों के परीक्षण के उपरांत न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध पाते हुए उपरोक्त दंडादेश पारित किया।
इस निर्णय के संबंध में शहर के वरिष्ठतम एवं प्रतिष्ठित अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि यह न्याय की विजय है। ऐसे कठोर निर्णयों से भ्रष्ट कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा तथा आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

Editor in Chief




















