छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज के विश्व सद्भावना भवन, टी.पी. नगर, कोरबा में पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरुकता को समर्पित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक मूल्यों तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी कोरबा श्री प्रसन्ना सोनकर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व महापौर श्री राजकिशोर प्रसाद, परिवहन नगर वार्ड की पार्षद श्रीमती प्रेमलता बंजारे, ब्रह्माकुमारी रुकमणी दीदी, बिंदु दीदी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

अतिथियों का स्वागत ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा तिलक लगाकर एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए छोटे-छोटे पौधे भेंट कर किया गया। यह अभिनव स्वागत प्रकृति के प्रति सम्मान और हरित भविष्य के संकल्प का प्रतीक बना।
अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्री प्रसन्ना सोनकर ने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पृथ्वी का संतुलन प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते हम सभी सजग नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण तथा स्वच्छता को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने ब्रह्माकुमारीज द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे जागरूकता कार्यों की सराहना की।

पूर्व महापौर श्री राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन का आधार है और इसके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हों। उन्होंने नागरिकों से वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने और अपने आसपास स्वच्छ एवं हरित वातावरण बनाने की अपील की। कार्यक्रम में उपस्थित पार्षद श्रीमती प्रेमलता बंजारे ने भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और स्वच्छ एवं हरित समाज के निर्माण में सभी की सहभागिता को आवश्यक बताया।

ब्रह्माकुमारी रुकमणी दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण की शुद्धता का संबंध मानव के विचारों की शुद्धता से भी है। जब मनुष्य के विचार सकारात्मक और श्रेष्ठ होते हैं तो उसका प्रभाव समाज और प्रकृति दोनों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता विकसित की जा सकती है। उन्होंने सभी को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए जीवन जीने की प्रेरणा दी।
ब्रह्माकुमारी बिंदु बहन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास जैसे बिजली की बचत, जल का संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और पौधारोपण जैसी आदतें मिलकर बड़े बदलाव का आधार बन सकती हैं। उन्होंने सभी उपस्थितजनों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान बी. के. सूरज भाई ने प्रकृति पर आधारित एक सुंदर एवं प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया। गीत के माध्यम से प्रकृति की महत्ता तथा उसके संरक्षण का संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने सराहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, ब्रह्माकुमारी बहनें एवं स्थानीय निवासी उपस्थित रहे। अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों को ईश्वरीय सौगात एवं प्रसाद प्रदान किया गया। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता तथा आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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