स्वामी आत्मानंद स्कूल की जगह प्राथमिक शाला एन.सी.डी.सी. में ठहराई गईं महिला खिलाड़ी टीमें, अव्यवस्था से नाराज़ — आदेश के बावजूद अधिकारियों ने नहीं दिया सहयोग

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छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: मुख्यमंत्री राष्ट्रीय महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग लेने कोरबा पहुँची महिला फुटबॉल टीमों को ठहराने के लिए प्रशासन द्वारा स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय जैसे सुविधा संपन्न स्कूल की जगह, प्राथमिक शाला एन.सी.डी.सी. (डायस कोड: 22051028503, विकासखंड एवं जिला: कोरबा) में रुकवाया गया, जहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।

फुटबॉल मैच खेलने कोरबा पहुंची महिला टीम को नहाने और शौच के लिए करना पड़ रहा संघर्ष

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टीमों के प्रबंधन और खिलाड़ियों का आरोप है कि उन्हें जो कमरे दिखाए गए थे, वे अच्छे थे, लेकिन वास्तव में जो कमरे दिए गए वे टूटे-फूटे, गंदे, बिना लाइट और पंखे के हैं। बाथरूमों में पानी की आपूर्ति नहीं है, कई शौचालय बंद हैं, और जो खुले हैं वे उपयोग के योग्य नहीं हैं। इन असुविधाओं के कारण खिलाड़ियों को नहाने और शौच के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो किसी भी खेल आयोजन के सम्मान के विपरीत है।

जिम्मेदारी से भाग रहे जिम्मेदार लोग

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अल्का फिलिप्स (मोबाइल: 7000371867), जिनसे पूर्व में बात हुई थी, अब फोन रिसीव नहीं कर रहीं और कोई सहयोग नहीं कर रहीं। साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारी श्री ताम्रेश्वर उपाध्याय (मोबाइल: 8305773677) को भी इस विषय में अवगत कराया गया, लेकिन उनका जवाब मिला कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं।

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हालांकि, वीडीओ कार्यालय की ओर से खिलाड़ियों को सहयोग करने के स्पष्ट निर्देश का आदेश पत्र भी मौजूद है, फिर भी स्कूल प्रशासन ने उस आदेश की अनदेखी की। यह लापरवाही केवल व्यवस्थागत विफलता नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की गरिमा के साथ भी अन्याय है।

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गौरतलब है कि प्राथमिक शाला एन.सी.डी.सी. की दीवार पर दर्ज सूचना के अनुसार, वर्ष 2023-24 में बालिका शौचालय निर्माण हेतु ₹42,000 की राशि स्वीकृत की गई थी, बावजूद इसके छात्राओं के लिए उपयोग योग्य शौचालय उपलब्ध नहीं कराया गया।

प्रतिभागी टीमों और उनके कोचिंग स्टाफ ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें तत्काल बेहतर और साफ-सुथरी ठहराव व्यवस्था दी जाए और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

यह पूरी घटना कोरबा जिले की प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की साख पर भी बट्टा लगाती है।

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दीपक साहू

संपादक

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