
नई दिल्ली/स्वराज टुडे: राष्ट्रीय राजधानी में बांग्लादेशी घुसपैठियों को ढूंढ रही दिल्ली पुलिस को उस वक्त बड़ी सफलता मिली, जब उसने इन लोगों के मददगार एक ऐसे गिरोह को धर दबोचा जो इन लोगों को यहां लाकर उनके जाली दस्तावेज बनवाकर उन्हें यहां बसाता था।
इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि तीन बांग्लादेशी अप्रवासियों और उनके भारतीय मददगार को गिरफ्तार किया गया है।
वेश बदल कर दो पुलिसकर्मियों ने जुटाई जानकारी
पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ तब किया जब पुलिस अधिकारी एएसआई कृष्ण पांडे और हेड कांस्टेबल संजय ने साप्ताहिक बाजारों में कपड़ा व्यापारी के रूप में काम करते हुए खुफिया जानकारियां हासिल कीं, जिनके आधार पर पुलिस ने योजना बनाते हुए आरोपियों पर नजर रखी और सही वक्त पर उन्हें धर दबोचा।
विवाहित होते हुए भारतीय महिला से शादी कर भारत में रह रहा था बांग्लादेशी मोहम्मद इकबाल हुसैन
इस बारे में एक बयान जारी करते हुए पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में गिरोह का मुखिया मोहम्मद इकबाल हुसैन भी शामिल है, जो भारत में फरहान खान के नाम से काम करता था। उसे दिल्ली के नेहरू प्लेस इलाके से पकड़ा गया। पुलिस उपायुक्त (अपराध) आदित्य गौतम ने इस बारे में जारी एक बयान में बताया, ‘जांच में पता चला है कि हुसैन के पास बांग्लादेशी पासपोर्ट के साथ-साथ अवैध रूप से हासिल किया गया भारतीय पासपोर्ट भी था। साथ ही बांग्लादेश में पहले से शादीशुदा होने के बावजूद उसने खुद को भारतीय बताते हुए मध्य प्रदेश की एक महिला के साथ धोखाधड़ी करते हुए मेट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए दूसरी शादी भी कर ली थी।’
अवैध सिम कार्ड बेचने के मामले में जेल की हवा खा चुका है इकबाल हुसैन
पुलिस ने बताया कि ‘इकबाल हुसैन साल 2017 में असम सीमा के जरिए भारत में घुसपैठ करके आया था और फिर दिल्ली में आकर बस गया। वह शुरू में जामिया नगर में रहता था, फिर भारतीय पत्नी और बच्चों के साथ मालवीय नगर में रहने लगा। साल 2020 में उसे अवैध सिम कार्ड बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे जमानत मिल गई थी और उसने गैरकानूनी गतिविधियों को जारी रखा।’
फर्जी पहचान पत्र बनाने में मदद करने वाला भारतीय भी गिरफ्तार
पुलिस द्वारा गिरफ्तार दो अन्य बांग्लादेशी नागरिकों के नाम रजीब मियां और मोहम्मद मोमीन बादशा है। बयान में बताया गया कि तीनों ही आरोपियों ने फर्जीवाड़ा करते हुए अपने नकली नामों के साथ तमाम भारतीय पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड बनवा लिए थे। इन तीनों के अलावा पुलिस ने फर्जी जानकारी के साथ इन लोगों के आधार कार्ड बनाने में मदद करने वाले एक शख्स अग्रेसन कुमार को भी गिरफ्तार किया है, जो कि भारतीय नागरिक है।
बांग्लादेशियों को भारत में इस तरह से बसाया जाता था
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह असम बॉर्डर के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कराकर लाता था। जिसके बाद उन्हें वहां से ट्रेन के जरिए दिल्ली पहुंचाया जाता था। राजधानी पहुंचने के बाद यहां बसाने के लिए उनके जाली भारतीय पहचान दस्तावेज बनाने में मदद की जाती थी।
पुलिस ने बताया कि इन फर्जी पहचान पत्रों के जरिए ना केवल उन्हें कानूनी रूप से सुरक्षा मिल जाती है, बल्कि वे विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों को करने में भी सक्षम हो जाते हैं। साथ ही इनके जरिए उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का फायदा भी मिलने लगता है।
साथ ही पुलिस जांच के दौरान इस बात का खुलासा भी हुआ है कि यह गिरोह बीते कई सालों से काम कर रहा है, और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बिना पकड़ में आए आम भारतीयों की तरह रहने में मदद कर रहा है। पुलिस ने बताया कि अवैध रूप से आए प्रवासियों को सोची-समझी योजना के तहत दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के साप्ताहिक बाजारों में रखा जाता है, जहां पर वे कपड़ों को बेचने का काम करते हैं।
छापेमारी के दौरान अनेक आपत्तिजनक सामग्री जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस टीमों ने कई आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की, जिसमें एक भारतीय पासपोर्ट और विभिन्न नामों के कई आधार कार्ड, बांग्लादेशी पासपोर्ट और उनकी विदेशी राष्ट्रीयता की पुष्टि करने वाले अन्य दस्तावेज, फर्जी क्रेडेंशियल का उपयोग करके प्राप्त किए गए मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड, और कई मोबाइल फोन शामिल हैं, जिनमें इस गिरोह की अवैध गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं।
यह भी पढ़ें: गाय का दूध पीने के बाद महिला को पानी से लगने लगा डर, फिर देखते ही देखते हो गई मौत !
यह भी पढ़ें: पानीपत में जजपा नेता रविंद्र मिन्ना की गोली मारकर हत्या, चचेरे भाई सहित 2 लोगों पर भी फायरिंग, आरोपी फरार
यह भी पढ़ें: चेहरे पर एलोवेरा जेल के साथ लगाएं ये चीज, दाग धब्बे होंगे कम

Editor in Chief