उत्तरप्रदेश
लखनऊ/स्वराज टुडे: कभी उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के पोस्टर बॉय कहे जाने वाले सबसे भरोसेमंद अफसरों में शुमार आईएएस अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें अब उनके गले का फांस बन गई हैं। आईआईटी रुड़की से पढ़ाई और यूपीएससी की मेरिट लिस्ट में देशभर में 8वीं रैंक हासिल करने वाले इस अधिकारी का सफर अब सलाखों की आहट तक पहुंच गया है।
ED के निशाने पर UPSC टॉपर DM
ताजा मामला और भी गंभीर है क्योंकि अब वे आधिकारिक तौर पर ‘दागी’ और ‘सरकारी आरोपी’ घोषित हो चुके हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला? मुख्यमंत्री कार्यालय के सबसे भरोसेमंद अफसरों में शुमार आईएएस अभिषेक प्रकाश की पूरी कहानी।
अभिषेक प्रकाश के चर्चा में आने की सबसे ताजा और बड़ी वजह एसआईटी (SIT) द्वारा दाखिल की गई 1600 पन्नों की चार्जशीट है। जनवरी 2026 की शुरुआत में ही जांच एजेंसी ने उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में मुख्य आरोपी के रूप में नामजद किया है। मार्च 2025 में हुए निलंबन के बाद अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इतना ही नहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनकी बेनामी संपत्तियों की कुंडली खंगालने में जुट गया है।
क्या हैं 5% का ‘कमीशन कांड’
रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिषेक प्रकाश पर आरोप है कि जब वे ‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब उन्होंने एक सोलर कंपनी को सब्सिडी और प्रोजेक्ट क्लीयरेंस दिलाने के बदले 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। यह डील उनके कथित बिचौलिए के जरिए हो रही थी। जब ऑडियो सबूत और करोड़ों के लेनदेन की बात मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंची, तो जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उन पर कड़ा एक्शन लिया गया। जांच में उनकी लखनऊ और बरेली जैसी जगहों पर करोड़ों की अवैध संपत्तियों का भी खुलासा हुआ है।
UPSC की शानदार शुरुआत: 8वीं रैंक का रुतबा
बिहार के सिवान जिले के एक साधारण परिवार से आने वाले अभिषेक प्रकाश की मेधा का लोहा हर कोई मानता था। साल 2005 में जब यूपीएससी का रिजल्ट आया, तो अभिषेक ने ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया था। 2006 बैच के इस अफसर को पहले नागालैंड कैडर मिला था, लेकिन किस्मत उन्हें उत्तर प्रदेश ले आई। अभिषेक प्रकाश 2011-12 में लखीमपुर खीरी जिले में डीएम रह चुके हैं। इसके अलावा वह हमीरपुर, बरेली और अलीगढ़ जिले में डीएम और कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
IAS अभिषेक प्रकाश की अद्भुत प्रेम कहानी
अभिषेक प्रकाश की पर्सनल लाइफ भी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं रही। उनकी मुलाकात 2009 बैच की आईएएस अदिति सिंह से हुई। जल्द ही यह दोस्ती प्यार में बदली और दोनों ने शादी कर ली। शादी के आधार (Spouse Ground) पर ही अभिषेक ने अपना कैडर बदलकर यूपी करवा लिया। उस दौर में इस कपल को यूपी का ‘पावर कपल’ कहा जाता था।
बेपनाह मोहब्बत में कैसे आई कड़वाहट?
हालांकि, यह प्रेम कहानी ज्यादा लंबी नहीं चली। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के बीच कड़वाहट इतनी बढ़ी कि मामला सार्वजनिक शिकायतों और कानूनी जंग तक पहुंच गया। उनकी पत्नी ने ही शासन से उनकी शिकायत की थी और उन्हें वापस नागालैंड भेजने की मांग की थी। अंततः दोनों का तलाक हो गया, लेकिन इस व्यक्तिगत विवाद ने उनकी प्रशासनिक छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।
फैमिली बैकग्राउंड
एक सामान्य बिहारी परिवार में जन्मे अभिषेक ने बचपन से ही अभावों के बीच पढ़ाई की थी। आईआईटी रुड़की से बीटेक करने के बाद वे युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए थे। लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) जैसे रसूखदार पद पर रहते हुए उन्होंने काफी नाम कमाया, लेकिन रसूख और पैसे की हवस ने एक होनहार करियर को विवादों की भेंट चढ़ा दिया।
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