छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: पत्रकारिता की आड़ में डराने-धमकाने, ब्लैकमेलिंग और कथित अवैध वसूली के आरोपों ने अब कोरबा में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर पोर्टल और पत्रकारिता का पहचान पत्र लेकर घूमने वाले कुछ कथित लोगों की गतिविधियों पर कोरबा प्रेस क्लब ने कड़ा रुख अपनाया है। क्लब ने साफ संदेश दिया है कि पत्रकारिता की आड़ में किसी को डराकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को कोरबा प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी को ज्ञापन सौंपकर कथित अवैध वसूली, भयादोहन, फर्जी प्रेस आईडी और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब बने कथित वसूली का माध्यम!
प्रेस क्लब ने ज्ञापन में चिंता जताई है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर स्वयं को पत्रकार या न्यूज पोर्टल संचालक बताने वाले कुछ लोग समाचार प्रसारित करने की धमकी देकर आम नागरिकों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में खबर चलाने या रोकने के नाम पर विज्ञापन अथवा अन्य आर्थिक लाभ की मांग की जाती है। सबसे ज्यादा भयादोहन के शिकार ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हो रहे हैं
क्लब का कहना है कि कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग भी डिजिटल पोर्टल की आड़ में सक्रिय हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। पोर्टल बनवाकर चौथी फेल आदमी भी खुद को पत्रकार समझता है । इस तरह की गतिविधियां न केवल समाज और कारोबारी वर्ग के लिए चिंता का विषय हैं, बल्कि जिम्मेदारी से पत्रकारिता कर रहे वास्तविक पत्रकारों की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।
‘प्रेस’ लिखी गाड़ियों की भी हो जांच, फर्जी आईडी पर कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में प्रेस लिखे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। प्रेस क्लब ने सवाल उठाया कि आखिर किन लोगों को पत्रकारिता के नाम पर पहचान पत्र जारी किए जा रहे हैं और क्या उनका वास्तविक पत्रकारिता से कोई संबंध भी है? निजी संबंधों अथवा अन्य लाभ के उद्देश्य से फर्जी प्रेस आईडी जारी किए जाने की आशंकाओं की जांच कर गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
भ्रामक खबरों और चरित्रहनन पर भी उठाई आवाज
प्रेस क्लब ने सोशल मीडिया पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने, एकपक्षीय और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने तथा किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के नाम पर वास्तविक डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकारों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।
आलोचनात्मक पत्रकारिता पर नहीं, गैरकानूनी गतिविधियों पर हो कार्रवाई
ज्ञापन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि किसी खबर से असहमति को कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। प्रेस क्लब ने कहा कि पत्रकारिता में प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए कार्रवाई का आधार किसी की आलोचनात्मक खबर नहीं, बल्कि प्रमाणित गैरकानूनी गतिविधियां होनी चाहिए।
राज्य स्तर पर बने प्रभावी निगरानी तंत्र
कोरबा प्रेस क्लब ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि इस विषय को राज्य स्तर पर भी उठाया जाए। पुलिस प्रशासन, संबंधित विभागों और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसा तंत्र विकसित किया जाए, जिससे पत्रकारिता की आड़ में कथित भयादोहन और अवैध वसूली पर अंकुश लगाया जा सके तथा वास्तविक पत्रकारों के अधिकार सुरक्षित रहें। प्रेस क्लब ने समस्त अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी सलाह दी है कि वे कथित फर्जी पत्रकारों को बिल्कुल भी तवज्जों ना दें। दबाव बनाने की स्थिति में वे वैधानिक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे मौजूद
इस अवसर पर कोरबा प्रेस क्लब अध्यक्ष नौशाद खान, संरक्षक कमलेश यादव, उपाध्यक्ष राजकुमार शाह, सचिव दिनेश राज, उप सचिव हरीश तिवारी, कार्यकारिणी सदस्य नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा (मिठ्ठू) सहित प्रेस क्लब के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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