चेक अनादरण मामले में अभियुक्त संजय ओग्रे को कोर्ट ने ठहराया दोषी, 25 लाख जुर्माने के साथ सुनाई 2 साल की सश्रम कारावास की सजा

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छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: आज दिनांक 10 मार्च 2026 — न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,कु कुमुदिनी गर्ग कोरबा की न्यायालय द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण निर्णय में चेक अनादरण के मामले में अभियुक्त संजय ओग्रे को दोषी ठहराया गया है।
प्रकरण में परिवादी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा भैसमा की ओर से शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह द्वारा पैरवी की गई। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त द्वारा अपने ऋण दायित्व के निर्वहन हेतु ₹44,70,968/- का चेक जारी किया गया था, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “पर्याप्त निधि के अभाव” के कारण अनादरित हो गया। इसके पश्चात विधिक नोटिस दिए जाने के बावजूद अभियुक्त द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया गया।
साक्ष्यों एवं अभिलेखों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत दोषसिद्ध करते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹25,00,000/- के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की राशि परिवादी बैंक को प्रतिकर स्वरूप प्रदान करने का आदेश दिया गया है
परिवादी की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय न्याय की विजय है तथा ऐसे फैसलों से आर्थिक अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत होगा।

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दीपक साहू

संपादक

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