*निगम प्रशासन की कार्यशैली पर इस बार फिर से उठे कई बड़े सवाल…
*समय-समय में जानकारी दिये जाने पर भी अब तक नहीं हुई कोई ठोस कार्यवाही
*आखिर क्यों है निगम प्रशासन ऐसे अवैध रूप से किये गये अतिक्रमण पर मेहरबान ?
*आखिर कब जागेगा प्रशासन ? पूछती है जनता…
छत्तीसगढ़
रायगढ़/स्वराज टुडे: शहर के हृदय स्थल व नगर पालिक निगम से महज 500 मीटर की दूरी पर वार्ड क्रमांक 17 में ही स्थित नई सड़क, सुभाष चौक के पास फुटपाथ क्षेत्र में कथित रूप से किए गए अतिक्रमण और अवैध ढलाई के कारण जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने का मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि ममतास रेस्टोरेंट से जुड़े विजय अरोरा द्वारा दिनाँक 23 मई 2026 की मध्यरात्रि लगभग 12 बजे मुख्य सड़क मार्ग से सटे फुटपाथ क्षेत्र में सीमेंट, गिट्टी और बालू का मसाला डालकर ढलाई कराई गई, जिससे वर्षों से संचालित वर्षा जल एवं अन्य पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त स्थान से बहने वाला पानी पहले फुटपाथ क्षेत्र से होकर आगे दिनशॉ आइसक्रीम दुकान के समीप स्थित नाली में पहुंचता था, लेकिन ढलाई किए जाने के बाद पानी का निकास प्रभावित हो गया है। इसके चलते ढलाई स्थल के बगल वाले फुटपाथ क्षेत्र में लगातार पानी जमा होने की स्थिति बन रही है। नागरिकों का कहना है कि, बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे आसपास रहने वाले परिवारों, दुकानदारों तथा राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानीयों का सामना करना पड़ेगा।

शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि, नगर पालिक निगम की सफाई दरोगा कविता बेहरा ने बीते 23 मई 2026 को सुबह लगभग 11:30 बजे ही संबंधित श्रमिकों को उक्त स्थान पर किसी प्रकार की ढलाई नहीं करने की बतौर मौखिक चेतावनी दी थी। इसके बावजूद भी कथित रूप से देर रात ढलाई का कार्य कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि, यह कार्य प्रशासन की जानकारी से बचने के उद्देश्य से रात के समय किया गया।
मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने बताया कि, बीते दिनाँक 24 मई 2026, 25 मई 2026, 26 मई 2026, 28 मई 2026, 29 मई 2026, 31 मई 2026, से लेकर 05 जून 2026, 06 जून 2026, 12 जून 2026, 19 जून 2026, 22 जून 2026, 24 जून 2026 तक भी नगर पालिक निगम के संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों/सभापति को कई बार समय-समय पर व्हाट्सएप के माध्यम से दिनाँक व समयावधि की प्रदर्शित फोटो और जलभराव की स्थिति से संबंधित जानकारी भेजी गई है एवं समय-समय पर कई बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर व समय-समय पर कई बार मोबाईल कॉल के माध्यम से भी शिकायतें की जा चुकी है। इसके बावजूद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
इसके अलावा कलेक्टर रायगढ़ मयंक चतुर्वेदी तक को व्हाट्सएप के माध्यम से भी बीते दिनाँक 25 मई 2026, 28 मई 2026, 31 मई 2026 से 01 जून 2026, 05 जून 2026, 06 जून 2026 तक को दिनाँक व समयावधि की प्रदर्शित तस्वीरों और जलभराव की स्थिती की संबंधित जानकारी से भी अवगत कराया जा चुका है। शिकायतकर्ता का कहना है कि, उन्होंने दो बार पहली बार बीते दिनाँक 26 मई 2026 को व जब दूसरी बार बीते दिनाँक 08 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से कलेक्ट्रेट स्थित उनके कक्ष में उनसे मिलकर भी उन्हे समस्या बताई, तब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी द्वारा शिकायतकर्ता को यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है कि वो मेरा काम नहीं है, कमीश्नर का काम है, कमीश्नर को मैंने भेज दिया था, कमीश्नर को समझ में आऐगा तो वो करेंगे, उनको समझ में नहीं आऐगा तो वो नहीं करेंगे। बहरहाल जलभराव के इस मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता ने आगे यहाँ तक भी बताया है कि उनके द्वारा बीते दिनाँक 01 जून 2026 को टोल-फ्री-नंबर निदान 1100 में कॉल कर जलभराव की स्थिति से संबंधित शिकायत तक दर्ज कराई जा चुकी है इसके बावजूद भी आज दिनाँक तक उस शिकायत पर कोई कार्यवाही तक भी नहीं की गई है। आखिरकार शिकायतकर्ता द्वारा छत्तीसगढ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 में कॉल करके जलभराव की स्थिति की संबंधित शिकायत बीते दिनाँक 23 जून 2026 को दर्ज कराई गई। अब इसमें आगे यह देखना दिलचस्प रहेगा कि इस जलभराव के मामले में ठोस कार्यवाही होने में आगे और कितने दिनों तक का समय लगेगा ? या फिर कहीं ठोस कार्यवाही होते तक इस बार पूरी बरसात भरके बीत जाने का समय तो न लग जाऐगा कहीं ? या फिर इस बार भी स्थिति जस की तस ही मौजूद रहेगी ?
स्थानीय नागरिकों ने जनहित को देखते हुए संबंधित फुटपाथ पर की गई कथित अवैध ढलाई को तत्काल हटाने तथा जल निकासी व्यवस्था को पूर्ववत बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो बरसात के दौरान क्षेत्र में जलभराव की समस्या निरंतर बनी रहेगी, जिससे कभी भी किसी भी प्रकार की कोई भी अप्रिय घटना दुर्घटना के गटित होने और लोगों को डेंगु, मलेरिया, टाइफाइड वगैरह जैसी कई गंभीर बिमारीयों की चपेट में आने से भी इंकार किया नहीं जा सकता है।
आपको बता दें कि प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक और कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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