छत्तीसगढ़
सूरजपुर/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित हेड कांस्टेबल तालिब शेख की पत्नी और 10 वर्षीय मासूम बेटी की बर्बर हत्या के मामले में सूरजपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.
वारदात के ठीक 725 दिन बाद न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियर की अदालत ने तीन मुख्य दोषियों को मृत्युदंड और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस हैवानियत से मां बेटी पर चाकू से दर्जनों वार किए गए, वह बेहद क्रूर और अमानवीय था. सजा सुनाए जाने के बाद भी दोषियों के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था और वे मुस्कुरा रहे थे.
कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे समाजविरोधी तत्वों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है और इन्हें समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं है. सूरजपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अंबिकापुर सेंट्रल जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आरोपियों को निम्नलिखित सजा सुनाई.
1. कुलदीप साहू : धारा 103 , 3 बीएनएस के तहत मृत्युदंड और 25,000 रुपये जुर्माना. इसके अलावा धारा 70 में प्राकृतिक मृत्यु तक कारावास और अन्य गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास.
2. फूल सिंह उर्फ रिंकू: धारा 103 , 3 बीएनएस के तहत मृत्युदंड और 25,000 रुपये जुर्माना. इसके अलावा अन्य धाराओं में उम्रकैद और कठोर कारावास.
3. चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके: धारा 103 , 3 बीएनएस के तहत मृत्युदंड और 25,000 रुपये जुर्माना. अन्य धाराओं में उम्रकैद व 3 साल का कठोर कारावास.
4. आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी: धारा 103 व 3 बीएनएस के तहत आजीवन कारावास और 20,000 रुपये जुर्माना.
दोषमुक्त आरोपी: अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपियों सूरज साहू और निल्केश्वर साहू को बरी कर दिया है.
कैसे शुरू हुआ विवाद और क्यों रची गई खौफनाक साजिश?
पूरे विवाद की शुरुआत 9 अक्टूबर 2024 की रात शहनाज अख्तर के जगराता कार्यक्रम से हुई थी. कार्यक्रम के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का नवापारा के कुछ स्थानीय युवकों से विवाद हो गया. इसके दो दिन बाद पुलिस टीम आरोपी के भाई संदीप साहू को पूछताछ के लिए थाने ले गई, जहां कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई. संदीप साहू का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था.
पुलिसकर्मी से पुरानी रंजिश और बदले की आग
भाई के साथ हुई मारपीट से मुख्य आरोपी कुलदीप साहू बौखला गया. उसका सूरजपुर थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल तालिब शेख से पहले से ही विवाद चल रहा था. कुलदीप ने पुलिस कार्रवाई का बदला लेने के लिए सीधे हेड कांस्टेबल तालिब शेख और उनके परिवार को निशाना बनाने की खौफनाक साजिश रच डाली.
मां पर 33 और बेटी पर 28 वार: हैवानियत का वो काला दिन
बदले की सनक में आरोपी कुलदीप साहू अपने साथियों संग पुलिसकर्मी तालिब शेख के घर में जबरन दाखिल हुआ. उस समय हेड कांस्टेबल ड्यूटी पर थे और घर में उनकी पत्नी मेहू फैज और 10 साल की बेटी मौजूद थीं. आरोपियों ने मासूम बेटी और उसकी मां को बेरहमी से बंधक बनाया.
लोक अभियोजक सुरेश शर्मा के अनुसार, दरिंदों ने मासूम बेटी के शरीर पर 28 बार और मां के शरीर पर 33 बार चाकू से ताबड़तोड़ वार किए. दोनों की दर्दनाक मौत के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की नीयत से शवों को ले जाकर झाड़ियों में फेंक दिया और फरार हो गए.
सजा सुनकर कोर्ट के बाहर मुस्कुराया हत्यारा कुलदीप
मामले में 29 सितंबर को ही अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दे दिया था. जब 29 सितंबर को मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को कोर्ट से बाहर लाया जा रहा था, तो उसके चेहरे पर अपनी करतूत का कोई पछतावा नहीं था. वो मीडिया के कैमरों को देखकर बेशर्मी से मुस्कुराया और पोज देता हुआ नजर आया. जज ने अपने विस्तृत फैसले में आरोपी के इस अमानवीय रवैये और मुस्कुराहट का विशेष उल्लेख किया और लिखा कि जो लोग इतने जघन्य अपराध के बाद भी सजा पर मुस्कुराते हैं, उनमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती. इन्हें जीने का हक नहीं.
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