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    Home»Featured»कमलनाथ की पहल पर प्रदेश के लाखों युवाओं को मिली राहत, आखिरकार मोहन सरकार को लेना पड़ा पदोन्‍नति में ओबीसी को आरक्षण देने का फैसला
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    कमलनाथ की पहल पर प्रदेश के लाखों युवाओं को मिली राहत, आखिरकार मोहन सरकार को लेना पड़ा पदोन्‍नति में ओबीसी को आरक्षण देने का फैसला

    Deepak SahuBy Deepak SahuJuly 2, 2025
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    *ओबीसी शासकीय सेवकों को पदोन्‍न‍ति में मिलेगा आरक्षण

    *पदोन्नति में आरक्षण का नियम लागू होने से लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों को भी मिलेगी सौगात

    *यह फैसला लाखों ओबीसी युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य के निर्माण का होगा अवसर

    भोपाल/स्वराज टुडे: मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा सरकार ने आखिरकार कदम आगे बढ़ा ही दिया। ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने का मामला लंबे समय से अदालतों में उलझा हुआ था, लेकिन अब सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। कांग्रेस का दावा है कि यह फैसला दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की दूरदर्शी पहल का नतीजा है। कमलनाथ सरकार ने अपने 18 माह के कार्यकाल में ओबीसी वर्ग के हित में कई बड़े निर्णय लिए थे। ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने का ऐतिहासिक निर्णय कमलनाथ कैबिनेट ने ही लिया था। उस समय इसे भाजपा नेताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते ओबीसी वर्ग के अधिकारों को वर्षों तक अदालतों में उलझाकर रखा।

    कमलनाथ सरकार की पहल से बदली तस्वीर

    कमलनाथ सरकार के फैसले से प्रदेश के लाखों युवाओं को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अवसर मिलेगा। कमलनाथ ने चुनावी घोषणा पत्र में ओबीसी, अनुसूचित जाति, जनजाति और गरीब सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का वादा किया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसे प्राथमिकता दी।

    भाजपा पर अदालत में मामला फंसाने का आरोप

    विश्लेषकों के अनुसार कमलनाथ ने ओबीसी वर्ग को उनका हक दिलाने का फैसला किया था, लेकिन भाजपा ने कोर्ट में जाकर इसे रोक दिया। भाजपा का असली चेहरा अब सामने आ गया है। अदालत में सरकार के वकील लगातार तारीखें लेते रहे और ओबीसी छात्रों की भर्ती अटकती रही। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा हमेशा दोहरी रणनीति अपनाती रही है। एक ओर आरक्षण के समर्थन में बयान दिए जाते हैं, दूसरी ओर अदालती प्रक्रिया लंबी खिंचती जाती है।

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    पदोन्नति में आरक्षण पर भी असर

    ओबीसी आरक्षण का प्रभाव सिर्फ शैक्षणिक और भर्ती प्रक्रिया पर ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण के मसले पर भी पड़ा है। मध्यप्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण लंबे समय से विवाद का विषय है। जब सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगाई, उसके बाद ओबीसी कर्मचारियों को भी नुकसान हुआ। कमलनाथ सरकार ने इस पर अध्ययन समिति गठित कर आंकड़े इकट्ठा किए थे ताकि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ठोस तर्क रखे जा सकें।

    यह कांग्रेस और कमलनाथ की जीत

    कांग्रेस नेताओं के अनुसार भाजपा ने ओबीसी वर्ग के हक छीनने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यह कांग्रेस और कमलनाथ की वैचारिक जीत है कि आज भाजपा को भी 27 फीसदी आरक्षण लागू करना पड़ रहा है। यह फैसला अदालत में पहले ही लागू हो जाता यदि भाजपा ने राजनीतिक अड़ंगे न लगाए होते। विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में ओबीसी आरक्षण बड़ा मुद्दा रहा है। कांग्रेस इसे हमेशा अपनी उपलब्धि बताती रही जबकि भाजपा असहज स्थिति में रही। अब 2025 में पंचायतों और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारी के बीच ओबीसी वर्ग को साधने के लिए भाजपा सरकार ने यह कदम बढ़ाया है। प्रदेश में ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। करीब 52 फीसदी ओबीसी आबादी होने के कारण कोई भी दल इस वर्ग की उपेक्षा नहीं कर सकता। हाल के वर्षों में भाजपा की ओबीसी नेताओं को संगठन में ज्यादा जगह देने की रणनीति भी इसी का हिस्सा रही है।

    लाखों ओबीसी युवाओं को भविष्य में मिलेगा लाभ

    यदि कमलनाथ सरकार का कार्यकाल पूरा होता तो ओबीसी आरक्षण पर आज कोई विवाद ही नहीं होता। भाजपा अब इस फैसले को लागू करके श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन ओबीसी वर्ग को असली हक कांग्रेस ने ही दिलाया था। वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता का कहना है कि आरक्षण को लेकर भाजपा हमेशा प्रतिबद्ध रही है। अदालतों में मामला फंसा था, जैसे ही कानूनी अड़चनें दूर हुईं, सरकार ने फैसले पर मुहर लगा दी। ओबीसी आरक्षण को लेकर मचे इस सियासी संग्राम में कांग्रेस ने जहां इसे अपनी वैचारिक जीत बताया, वहीं भाजपा सरकार ने इसे वर्ग के प्रति अपनी संवेदनशीलता कहा है। सच्चाई यह है कि लाखों ओबीसी युवाओं के लिए यह फैसला भविष्य निर्माण का अवसर लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया में यह कितना तेजी से लागू हो पाता है।

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    कमलनाथ का 18 माह का कार्यकाल में लिए अहम फैसले

    कमलनाथ सरकार का कार्यकाल भले ही 18 माह का रहा हो लेकिन उसमें लिए गए कई निर्णय ऐतिहासिक रहे। किसानों की कर्जमाफी से लेकर कन्या विवाह योजना में अनुदान बढ़ाना, संबल योजना को फिर से शुरू करना, शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज करना, गौशालाओं के लिए बजट जारी करना, युवाओं के लिए रोजगार मिशन शुरू करना, औद्योगिक निवेश को गति देना– इन सभी फैसलों का सीधा लाभ आम जनता को मिला। कमलनाथ सरकार ने 2019 में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को मंत्रिपरिषद से पारित कर तुरंत लागू किया था। इस फैसले का प्रदेशभर में स्वागत हुआ लेकिन भाजपा के कई नेताओं ने इसे अदालत में चुनौती दी।

    *विजया पाठक की रिपोर्ट*

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    Deepak Sahu

    Editor in Chief

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