कोलकाता/स्वराज टुडे: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार ने प्रदेश के 252 मदरसों को बंद कर दिया. साथ ही करीब 100 मदरसों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है. सरकार की ओर से यह कदम प्रदेश में एक सर्वे करने के बाद उठाया गया है.
इस राज्यव्यापी सर्वे में कई ‘मदरसों के पास परमिशन और बुनियादी ढांचों की ‘कमी’ पाई गई. हालांकि, जिन मदरसों के पास सरकारी परमिशन होगी, वो चलते रहेंगे.
सर्वे के बाद कार्रवाई
राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मदरसा शिक्षा मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि जिन मदरसों के पास परमिशन होगी, वो काम करते रहेंगे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 की शुरुआत में एक सर्वे कराया गया था. इसमें विभाग ने मदरसों के बुनियादी ढांचे, परमिशन और मैनेजमेंट से जुड़ी चीजों की जांच की थी.
100 मदरसों को कारण बताओं नोटिस
अधिकारियों ने बताया कि जिन 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उनके जवाबों की जांच किए जाने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी. क्षुदीराम टुडू ने बताया कि यह काम सूबे के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिले निर्देशों के बाद शुरू की गई है. इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदेश में कितने मदरसों के पास परमिशन है और कितने बिना परमिशन के ही चलाए जा रहे हैं.
मदरसों के बारे में ‘शिकायत’ मिली
मदरसों पर हुई कार्रवाई पर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि कुछ मदरसों के बारे में बार-बार शिकायतें मिल रही थीं. कुछ जगहों पर वो लोग टीचर के तौर पर काम कर रहे थे, जो पहले चरमपंथी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं. घोष ने आगे कहा,
सरकारी मंजूरी और कानून के तहत चल रहे मदरसे काम करते रहेंगे. लेकिन सरकार अंधाधुंध मदरसे खोलने और परेशानी पैदा करने की परमिशन नहीं देगी.
इस कार्रवाई पर बंगाल की विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुणाल घोष ने सरकार को सलाह दी कि सभी मदरसों को एक ही नजर से देखा जाना चाहिए.
बता दें कि जिन मदरसों पर कार्रवाई हुई है. उनमें कम से कम 44 मदरसे मालदा में हैं. 37 उत्तर दिनाजपुर, 32 दक्षिण 24 परगना, 25 नदिया और 25 मुर्शिदाबाद में हैं.
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