Close Menu
Swaraj TodaySwaraj Today
    What's Hot

    कोरबा में फ्लाई ऐश का जहर फैला रहा एसईसीएल, सरकार की चुप्पी पर जयसिंह अग्रवाल का तीखा हमला

    April 17, 2026

    Korba: एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेंटर में 18 अप्रैल को नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, न्यूरो-साइकेट्रिक व त्वचा रोग विशेषज्ञ देंगे सेवाएं

    April 17, 2026

    Ashoknagar: तीन हिन्दू नाबालिग लड़कियों का ब्रेनवाश, फिर निकाह के बाद रेप…तीनों बुर्का पहन अपने घर पहुंची तो खुला राज

    April 17, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, April 18
    Swaraj TodaySwaraj Today
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • होम
    • कोरबा
    • छत्तीसगढ़
    • देश
    • दुनिया
    • खेल
    • स्वास्थ्य
    • करियर जॉब
    • मनोरंजन
    Swaraj TodaySwaraj Today
    Home»Featured»लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बढ़ते प्रहार, आखिर कलम की आवाज़ से भय क्यों? पत्रकार आनंद पांडे और हरीश दिवेकर की गिरफ्तारी के मायने क्‍या ?
    Featured

    लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बढ़ते प्रहार, आखिर कलम की आवाज़ से भय क्यों? पत्रकार आनंद पांडे और हरीश दिवेकर की गिरफ्तारी के मायने क्‍या ?

    Deepak SahuBy Deepak SahuOctober 24, 2025
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
    iran freedom press e1714717545898
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link

    मध्यप्रदेश
    भोपाल/स्वराज टुडे:भारतीय लोकतंत्र की आत्मा उसकी संस्थाओं में निहित है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका ये तीन स्तंभ लोकतांत्रिक ढांचे की नींव हैं, परंतु इन स्तंभों के साथ पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा गया है, जिसने सदैव समाज की नब्ज़ टटोलने और सत्ता को आईना दिखाने का कार्य किया है। परंतु, विडंबना यह है कि आज वही चौथा स्तंभ लगातार हमलों और दमन के दौर से गुजर रहा है। पिछले एक दशक में मीडिया की स्वतंत्रता पर जो प्रहार हुए हैं, वे यह दर्शाते हैं कि सत्ता के गलियारों में कलम की ताकत से भय व्याप्त है। जहां भी पत्रकारिता ने सत्ताधारी वर्ग के भ्रष्टाचार, कदाचार या दोहरे चरित्र को उजागर किया है, वहां सत्ता ने अपनी पूरी ताकत से उसे दबाने का प्रयास किया है।

    मध्यप्रदेश में हाल की घटना इसका ताजा उदाहरण है, जब वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडे और हरीश दिवेकर को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों पत्रकारों ने राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा किया था। सत्ता की असहजता इतनी बढ़ी कि पत्रकारों को गिरफ्तार करने जैसे कदम उठा लिए गए। यह न केवल लोकतंत्र पर धब्बा है, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता का अपमान भी है। राजनीति का यह नया चेहरा बेहद चिंताजनक है। हालांकि लगभग 6 घंटे की पूछताछ के बाद दोनों पत्रकारों को राजस्थान पुलिस ने छोड़ दिया।

    पत्रकारिता प्रहरी है, उसे कुचलना लोकतंत्र के हित में नहीं

    राजस्थान की यह घटना कोई अलग मामला नहीं है। चाहे दिल्ली, मध्यप्रदेश या राजस्थान हर जगह सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेता पत्रकारों की कलम से घबराए दिखाई देते हैं। पत्रकारों पर मुकदमे, गिरफ्तारी और धमकी अब सामान्य राजनीतिक हथियार बन चुके हैं। यह प्रवृत्ति न केवल मीडिया की आज़ादी को सीमित कर रही है, बल्कि जनता के उस अधिकार को भी छीन रही है जिसके तहत उसे सच जानने का हक है। पत्रकारिता का उद्देश्य हमेशा सत्ता के निर्णयों पर प्रश्न उठाना रहा है। यही प्रश्न लोकतंत्र को संतुलित रखता है। परंतु जब सवाल करने वाला ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाए, तो इसका अर्थ साफ है सत्ता अब जवाबदेही से बचना चाहती है। यह स्थिति केवल विपक्ष या किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पूरी प्रणाली के लिए खतरनाक है। लोकतंत्र में पत्रकार की भूमिका प्रहरी की होती है, जो जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करता है। पर जब प्रहरी की आँखों पर ही पट्टी बांध दी जाए, तो व्यवस्था अंधी हो जाती है। दुर्भाग्य से, आज सत्ता में बैठे लोगों को मीडिया का “नियंत्रित संस्करण” चाहिए जो वही कहे, जो वे सुनना चाहते हैं। ऐसे दौर में स्वतंत्र पत्रकारिता किसी क्रांतिकारी कदम से कम नहीं रह गई है।

    यह भी पढ़ें :  राशिफल 17 अप्रैल, 2026 : जानिए कैसा रहेगा आपका आज का दिन

    पांडे और दिवेकर जैसे पत्रकारों ने जब सत्ता की परतें खोलनी शुरू कीं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि सच अब सत्ता के लिए असुविधाजनक हो चुका है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह प्रवृत्ति दोहरी है। जब सत्ता में कोई पार्टी होती है, तो वह मीडिया की स्वतंत्रता पर लगाम कसती है और जब वही पार्टी विपक्ष में जाती है तो वही मीडिया “लोकतंत्र की आत्मा” बन जाती है। यह दोहरा चरित्र भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा संकट है।

    क्या पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर प्रहार अब सामान्यीकृत हो चुका?

    सवाल यह भी उठता है कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाएं इस पर मौन क्यों हैं? क्या पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर प्रहार अब सामान्यीकृत हो चुका है? यदि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, तो फिर पत्रकारों को इस अधिकार से वंचित करना न केवल असंवैधानिक बल्कि अमानवीय भी है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता ने कलम को कैद करने का प्रयास किया है, तब-तब सत्य और विचार की ताकत और अधिक प्रखर होकर उभरी है। हर युग में सत्ता ने कलम को झुकाने की कोशिश की, परंतु कलम हर बार और तेज़ी से उठी है।

    छत्तीसगढ़ में भी ऐसा ही हुआ, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आलोचकों को डराने-धमकाने का प्रयास किया। मैंने भी महादेव सटटा ऐप को उजागर किया और इसके बदले कई बार छत्‍तीसगढ़ की पुलिस मुझे गिरफ्तार करने भोपाल आयी। छग के पत्रकार सुनील नामदेव को भी काफी प्रताडि़त किया। मप्र में भी पिछले कुछ दिनों में भ्रष्‍टाचार को उजागर करने के मामलों में करीब 08 पत्रकारों को गिरफ्तार किया। लेकिन जनता ने तय किया कि भ्रष्टाचार और दमन की राजनीति को जवाब देना है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है जब जनता ही न्यायाधीश बन जाती है।

    यह भी पढ़ें :  Korba: 5 लाख के चेक बाउंस मामले में न्यायालय का सख्त फैसला, अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने की प्रभावी पैरवी

    आज आवश्यकता है कि पत्रकारिता को “देशद्रोह” या “मानहानि” की परिभाषा में बांधने की जगह उसे लोकतंत्र की आत्मा के रूप में सम्मान दिया जाए। लोकतंत्र तभी स्वस्थ रह सकता है जब हर पत्रकार बिना भय के सच कह सके, हर नागरिक सवाल पूछ सके और हर सत्ता जवाब देने को बाध्य हो। पत्रकारिता को दबाने के प्रयास, चाहे वे किसी भी सरकार द्वारा किए जाएं, अंततः उसी सरकार की साख को कमजोर करते हैं। यह भूलना नहीं चाहिए कि कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली होती है और जब कलम जनता के पक्ष में चलती है, तो कोई सत्ता उसे रोक नहीं सकती।

    लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है जब कलम स्वतंत्र रहे। आनंद पांडे और हरीश दिवेकर की गिरफ्तारी जैसे उदाहरण हमें चेताते हैं कि यदि आज हमने इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई, तो कल यह प्रहार हर उस नागरिक पर होगा जो सच बोलने का साहस रखता है। इसलिए अब समय आ गया है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं आगे आएं, पत्रकारिता की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करें क्योंकि जब चौथा स्तंभ डगमगाता है, तो पूरा लोकतांत्रिक ढांचा हिल जाता है। सत्ता के इस भयभीत व्यवहार को रोकना अब आवश्यक है। पत्रकारिता का दमन किसी पार्टी या व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला है।

    *विजया पाठक की रिपोर्ट*

    यह भी पढ़ें: जीते जी पूछा नहीं…वृद्धाश्रम में हुई मौत तो शव लेने पहुंचा बेटा, अंतिम इच्छानुसार- छूने तक नहीं दिया, लेकिन पुलिस ने उन्हें दिया गार्ड ऑफ ऑनर, जानिए क्यों ?

    यह भी पढ़ें: पति की मौत के बाद देवर से करवा दी थी शादी, फिर विवाहिता ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ नदी में लगा दी छलांग, तीनों के शव बरामद

    यह भी पढ़ें :  Korba: जनपद उपाध्यक्ष सहित अन्य पर एक ग्रामीण ने पत्नी के साथ अनाचार कर हत्या का लगाया गंभीर आरोप, एसपी से लगाई न्याय की गुहार

    यह भी पढ़ें: पत्नी कर रही थी MBBS, पति डिलीवरी बॉय, एक ही फंदे पर लटके मिले दोनों; सुसाइड नोट ने खोला मौत का राज

    Swaraj Today converted
    Deepak Sahu

    Editor in Chief

    Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

    Related Posts

    कोरबा में फ्लाई ऐश का जहर फैला रहा एसईसीएल, सरकार की चुप्पी पर जयसिंह अग्रवाल का तीखा हमला

    April 17, 2026

    Korba: एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेंटर में 18 अप्रैल को नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, न्यूरो-साइकेट्रिक व त्वचा रोग विशेषज्ञ देंगे सेवाएं

    April 17, 2026

    Ashoknagar: तीन हिन्दू नाबालिग लड़कियों का ब्रेनवाश, फिर निकाह के बाद रेप…तीनों बुर्का पहन अपने घर पहुंची तो खुला राज

    April 17, 2026

    महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्‍यक्ष फुलोदेवी नेताम के निर्देश पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी वितरण में गड़बड़ी के विरोध में महिला कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

    April 17, 2026

    कोरबा में आंगनबाड़ी निर्माण बना ‘मौत का ढांचा’! घटिया मटेरियल से बच्चों की ज़िंदगी पर सीधा खतरा

    April 17, 2026

    फल नहीं, जहर बिक रहा! केमिकल से पकाए जा रहे फलों पर सख्ती, FSSAI का बड़ा अलर्ट

    April 17, 2026
    Top Posts

    किचन में आया नया जुगाड़, ‘विश्वगुरु चूल्हा’ से बिना LPG-इंडक्शन के झटपट 25 लोगों का खाना तैयार, देखें वायरल वीडियो……

    March 22, 2026826 Views

    Breaking: सक्ती के वेदांता पावर-प्लांट में भीषण हादसा, 9 की मौत की खबर, अनेक मजदूरों की हालत गंभीर

    April 14, 2026778 Views

    Mumbai: 38 साल की लेडी टीचर के जाल में कैसे फंसा 11वीं का छात्र ! पढ़िए एक शिक्षिका की डर्टी स्टोरी

    April 6, 2026763 Views
    Don't Miss

    कोरबा में फ्लाई ऐश का जहर फैला रहा एसईसीएल, सरकार की चुप्पी पर जयसिंह अग्रवाल का तीखा हमला

    April 17, 2026

    छत्तीसगढ़ कोरबा/स्वराज टुडे: पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा के मानिकपुर खदान क्षेत्र…

    Korba: एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेंटर में 18 अप्रैल को नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, न्यूरो-साइकेट्रिक व त्वचा रोग विशेषज्ञ देंगे सेवाएं

    April 17, 2026

    Ashoknagar: तीन हिन्दू नाबालिग लड़कियों का ब्रेनवाश, फिर निकाह के बाद रेप…तीनों बुर्का पहन अपने घर पहुंची तो खुला राज

    April 17, 2026

    महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्‍यक्ष फुलोदेवी नेताम के निर्देश पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी वितरण में गड़बड़ी के विरोध में महिला कांग्रेस ने किया प्रदर्शन

    April 17, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • YouTube
    • TikTok
    • WhatsApp
    • Twitter
    • Instagram
    About

    Owner & Chief Editor:
    DEEPAK SAHU

    Address:
    Punjabi Gurudwara Road, Purani Basti, Korba, Dist. - Korba, (C.G.) Pin - 495678

    Email:

    [email protected]

    Mobile:

    9827197872,
    8982710004

    Udyam Reg. No.:
    CG-10-0001978

    Post Calendar
    April 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    27282930  
    « Mar    
    Important Pages
    • Home
    • About Us
    • Disclaimer
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
    © 2026 Swaraj Today. Designed by Nimble Technology.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.