रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा से कथित अवैध उत्खनन के बाद मौहरीटोला में डंपिंग का आरोप, एनजीटी की रोक के बीच बेखौफ कारोबार पर उठे सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/स्वराज टुडे: मरवाही तहसील क्षेत्र में रेत के कथित अवैध कारोबार को लेकर एक के बाद एक गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। अमेराटिकरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले मौहरीटोला में सैकड़ों ट्रैक्टर के बराबर रेत भंडारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा क्षेत्र से कथित तौर पर निकाली जा रही रेत को ट्रैक्टरों के जरिए मौहरीटोला में लाकर डंप किया जा रहा है।
रोक के बावजूद रेत की इतनी बड़ी खेप आखिर कहां से आई?
एनजीटी के निर्देशों और रेत खनन से जुड़े प्रतिबंधों के बीच मौहरीटोला में इतनी बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आखिर यह रेत कहां से आई? इसे किसने निकाला? किसके निर्देश पर परिवहन किया गया? और क्या पूरे भंडारण के लिए वैध अनुमति मौजूद है?
खनिज विभाग की नजर से कैसे बचा कथित डंपिंग यार्ड?

सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का कथित भंडारण कोई मामूली गतिविधि नहीं है। इसके बावजूद यदि विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आती, तो खनिज विभाग की निगरानी और मैदानी जांच व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। क्या अधिकारियों ने मौहरीटोला का निरीक्षण किया है? यदि किया है तो कितनी मात्रा में रेत मिली? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ है तो इतने बड़े कथित भंडारण की जानकारी विभाग तक क्यों नहीं पहुंची?
रूमगा से मौहरीटोला तक क्या जुड़ी है पूरी कड़ी?
रूमगा, सिलपहरी और कोलबीरा से कथित अवैध उत्खनन तथा मौहरीटोला में कथित बड़े पैमाने पर भंडारण की बात सामने आने के बाद पूरे मामले की कड़ी जांच की जरूरत है। नदी घाटों से लेकर डंपिंग स्थल और वहां से आगे होने वाले परिवहन तक की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासन करे मौके की जांच
मौहरीटोला में तत्काल संयुक्त जांच कराकर रेत की मात्रा, स्रोत, भंडारण की अनुमति, परिवहन वाहनों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। यदि रेत अवैध रूप से भंडारित पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई भी जरूरी होगी। अब सवाल यह है कि मौहरीटोला में कथित सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का यह भंडारण किसकी अनुमति से हुआ? क्या प्रशासन मौके पर पहुंचकर जांच करेगा, या रेत के इस कथित खेल पर खामोशी ही कायम रहेगी?
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