नई दिल्ली/स्वराज टुडे: दुनियाभर से इस्लाम के फॉलोवर्स को लेकर अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं. पाकिस्तान के सैकड़ों लोग ऑन कैमरा कह चुके हैं कि वीजा होने के बावजूद अमेरिकी एयरपोर्ट्स पर पुलिस कपड़े उतारकर तलाशी लेती है तब एंट्री मिलती है.
जापान में मुसलमानों के शवों को दफनाने के लिए कब्रिस्तान बनाने के लिए जमीन देने से इनकार करने की मांग संसद में उठ चुकी है. उधर ब्रिटेन में लाखों मुसलमानों की नागरिकता छिनने का खतरा मंडरा रहा है. अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमले के बाद भारत से लेकर अमेरिका तक के लोगों के मन में अभी तक भय का माहौल है, जिसे दूर करने के लिए एक फिल्म भी बनी थी.
लाखों ब्रिटिश मुसलमानों की नागरिकता छिन सकती है: रिपोर्ट
‘मिडिल ईस्ट आई’ में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन युवाओं के पैरेंट्स विदेशी हैं वो ब्रिटिश नागरिकता खो सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिटिश गृहमंत्री शबाना महमूद के पास नागरिकता छीनने की जो संवैधानिक शक्तियां हैं, उनका मिसयूज हो सकता है.
‘द इंडिपेंडेंट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन एक ‘नस्लभेदी दो-स्तरीय प्रणाली के तहत ब्रिटिश नागरिकों की नागरिकता छीन रहा है. ये रिपोर्ट एक नए अध्ययन के आधार पर है, जो बताती है कि ब्रिटेन G20 संगठन का एकलौता देश है जो इस तरह बड़े पैमाने पर नागरिकता छीन रहा है.
2010 से लेकर अबतक 200 से अधिक लोगों से नागरिकता छीन ली गई है, जिनसे देश को खतरा बताया गया था. नागरिकता छीनने के मामले में ब्रिटेन केवल बहरीन और निकारागुआ से पीछे है. फ्रांस ने नई सदी में 2000 से 2020 के बीच 16 बार ऐसा कड़ा कदम उठाया है.
यह गुप्त प्रणाली ड्यूल नेशनलिटी (दोहरी नागरिकता) रखने वालों या Naturalised Briton को उनकी नागरिकता से वंचित कर सकती है. इसके लिए सरकार को किसी प्रमाण या जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होती है.
‘मिडिल ईस्ट आई’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन में प्रवासियों को दी गई नागरिकता छीनने की शक्तियां बेहद गुप्त हैं. ब्रिटेन की कुल मुस्लिम आबादी के 13 फीसदी लोगों की नागरिकता गृह मंत्री शबाना के फैसले से छिन सकती है. खासकर उनकी जिनका नाता साउथ एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका महाद्वीप के देशों से है. रिपोर्ट में लिखा है कि ब्रिटिश कानून में मौजूद सीक्रेट शक्तियों से एक बड़ी आबादी डर के साये में है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सोमालिया, नाइजीरिया और मिडिल ईस्ट के लाखों प्रवासी आगे चलकर ब्रिटिश नागरिक बन गए. यूके के नए नियमों में नागरिकता को लेकर नस्लीय भेदभाव झलकता है. इसमें मुसलमानों के ब्रिटेन में होने का अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि वे ‘कैसे’ हैं. नए नियमों में नागरिकता छीनने का अधिकार गृह मंत्रालय के अफसरों के विवेक पर निर्भर है.
पॉलिटिकल माइलेज के लिए छीन रहे नागरिकता?
रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की पिछली सरकार ने पॉलिटिकल माइलेज लेने के लिए लोगों की नागरिकता छीनी. वर्तमान सरकार ने नागरिकता छीनने की शक्तियों का विस्तार किया है.
जानिए भारत की क्या है स्थिति
भारत में लाखों लोगों ने स्वेच्छा से अपनी नागरिकता छोड़ी है, खासकर पिछले 5-6 सालों में (2020-2024), जिसमें हर साल 1.6 लाख से 2.25 लाख लोग शामिल हैं, इसका मुख्य कारण बेहतर अवसरों की तलाश है, जबकि सरकार द्वारा नागरिकता छीनने (deprivation/revocation) के विशिष्ट आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार स्वेच्छा से भारत की नागरिकता छोड़ने (Renunciation) वालों की संख्या इस प्रकार है :
● 2020: 85,256
● 2021: 1,63,370
● 2022: 2,25,620
● 2023: 2,16,219
● 2024: 2,06,378
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