मुम्बई/स्वराज टुडे: हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्म निर्देशक, निर्माता और लेखक संजय गुप्ता का 30 अक्टूबर 2026 को मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 57 वर्ष के थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घर पर गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके चलते उनका निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर फैल गई।
संजय गुप्ता ने वर्ष 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फ़ायर’ से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई। वे विशेष रूप से अपराध, गैंगस्टर और एक्शन प्रधान फिल्मों के निर्देशन तथा निर्माण के लिए जाने जाते थे।
उनकी फिल्मों में तेज रफ्तार घटनाक्रम, प्रभावशाली एक्शन दृश्य और अपराध जगत की कहानियों को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की विशिष्ट शैली दिखाई देती थी।
उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘राम शस्त्र’, ‘हमेशा’, ‘जंग’, ‘खौफ’, ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’, ‘ज़िंदा’, ‘दस कहानियाँ’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘जज़्बा’, ‘काबिल’ और ‘मुंबई सागा’ शामिल हैं। वर्ष 2002 में प्रदर्शित फिल्म ‘कांटे’ उनके निर्देशन करियर की चर्चित फिल्मों में से एक रही। इसके अतिरिक्त ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ के निर्माण और ‘शूटआउट एट वडाला’ के निर्देशन एवं सह-निर्माण से भी वे जुड़े रहे।
संजय गुप्ता ने अपने करियर में कई लोकप्रिय कलाकारों के साथ काम किया। संजय दत्त और जॉन अब्राहम जैसे अभिनेताओं के साथ उनकी कई फिल्में दर्शकों के बीच चर्चित रहीं। उन्होंने ‘व्हाइट फेदर फिल्म्स’ के माध्यम से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
संजय गुप्ता का जीवन फिल्मों के प्रति जुनून और रचनात्मकता से जुड़ा रहा है। वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थे और फिल्म उद्योग तथा समसामयिक विषयों पर अपने विचार साझा करते रहते थे। इससे पहले भी वे एक गंभीर सड़क दुर्घटना का सामना कर चुके थे, जिसमें उन्हें कई चोटें आई थीं, लेकिन वे स्वस्थ होकर लौटे थे।
उनके निधन की खबर फिल्म जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी विशिष्ट निर्देशन शैली और यादगार फिल्मों के माध्यम से एक अलग स्थान बनाया था। उनका योगदान और उनकी फिल्में दर्शकों के बीच लंबे समय तक याद की जाती रहेंगी।
हिंदी सिनेमा के इस प्रतिभाशाली फिल्मकार को विनम्र श्रद्धांजलि।
(मुम्बई से नासिर खान की रिपोर्ट)

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